बाबू लाल ने कहा जिस SSP को दंडित करना चाहिए, उसे धनबाद का दारोमदार दिजियेगा तो अपराध बढ़ेगा ही, इसने पलामू में भी किया था घोर अपराध  

भाजपा विधायक दल के नेता बाबू लाल मरांडी ने राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को आज पत्र लिखा, उस पत्र में उन्होंने साफ-साफ लिखा है कि जिस पुलिस अधिकारी को दंडित करना चाहिए, उसे धनबाद जैसे शहर में बिठा दिया गया, क्या ये शर्मनाक नहीं हैं। आश्चर्य तो यह हो रहा है कि आखिर उक्त SSP में राज्य के मुख्यमंत्री अथवा पुलिस महानिदेशक ने क्या देखा कि उसे धनबाद का एसएसपी बना दिया गया।

क्या सरकार भूल गई कि इस व्यक्ति ने पलामू में क्या अपराध किया है, अगर भूल गई तो हम उसे याद दिलाते हैं, ये कहना है बाबू लाल मरांडी का। उन्होंने साफ कहा कि जब तक उसे हटाया नहीं जायेगा, अपराध में कमी नहीं आयेगी, यही कारण है कि धनबाद में कल फिर अपराध हुआ और दो अपराधी  धनबाद जेल से भाग निकले, और कितने सबूत चाहिए, सरकार को। बाबू लाल मरांडी का पत्र इस प्रकार है…

माननीय मुख्यमंत्री जी,

मुख्यमंत्री जी, आप झारखंड को किस दिशा में ले जा रहे हैं? पूरे सूबे की कानून व्यवस्था तार-तार हो रही है। धनबाद में जज उत्तम आनंद की षडयंत्र के तहत की गई हत्या ने मौजूदा विधि-व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। आप इनके परिवार से मिले एवं संवेदना भी व्यक्त की। आनेवाले दिनों में इनके परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी और दूसरी मिलने वाली अन्य सुविधा भी आप देंगे।

लेकिन सवाल है झारखंड की विधि-व्यवस्था की। क्या इससे अपराध रूक जाएगा? क्या ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी? इसी संदर्भ में हम आपका ध्यान मौजूदा धनबाद के एसएसपी संजीव कुमार के पिछले बतौर पलामू एसपी के कार्यकाल में घटित एक हैरान करने वाली घटना एवं उसमें पुलिस की अकर्मण्यता, लापरवाही एवं उदासीनता की ओर आकृष्ट कर रहे हैं।

जो यह बताने के लिए काफी है कि ऐसे अयोग्य पुलिस आफिसर को धनबाद जैसे संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण जिले में पुलिस प्रमुख के पद पर तैनात किया जाएगा तो जज की हत्या जैसे दिल को दहला देने वाली घटना समेत वहां के अपराधिक घटनाओं पर आखिर कैसे काबू पाया जाएगा? इस संबंध में प्रतापपुर छत्तीसगढ़ के गोपाल प्रसाद कल मुझसे मिले थे और उन्होंने मुझे आवेदन के साथ एफआईआर की प्रतिलिपि उपलब्ध कराते हुए घटना के बारे में जो कुछ विस्तार से बताया वह इस प्रकार है।

25 मई 2021 को औरंगाबाद, बिहार का एक परिवार अपने बेटा-बहु से मिलकर छत्तीसगढ़ से पलामू के रास्ते औरंगाबाद लौट रहा था। उसमें एक सत्तर वर्षीय इनके बुजुर्ग पिता, इनकी मां और ड्राइवर था। पलामू जिले के कांडाघाटी, थाना नावाबाजार इलाके में इनकी मां को छोड़कर बुजुर्ग पिता और ड्राइवर का अपहरण कर लिया गया। उन्हें छोड़ने के लिए अपहर्ताओं ने 60 लाख रुपये तक का डिमांड किया।

डिमांड पर तौल-मौल हुआ और उन्हें छोड़ने के लिए 10 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। परिवार के लोग पुलिस के संपर्क में थे और हर जानकारी से अपडेट करा रहे थे। जिन मोबाइल नंबरों से अपराधकर्मी पैसे के लिए बारगेनिंग कर रहे थे, वे सभी नंबर पुलिस को परिवारवालों ने उपलब्ध करा दिये थे।परिवारवालों ने कहा कि हम गरीब हैं 10 लाख कहां से देंगे।

तब पुलिस ने आश्वासन दिया कि हम 10 लाख का इंतजाम करके दे देंगे, क्योंकि किसी भी कीमत पर उन्हें अपराधियों को पकड़ना है। जब पुलिस ने इस बारे में कुछ नहीं किया तो परिवारवालों ने किसी तरह अपने करीबियों से सहयोग लेकर 10 लाख रुपये का इंतजाम किया। इसकी सूचना पुलिस को दी। तब 9 जून की रात 9 बजे अभियान एसपी विजय शंकर और डीएसपी सुरजीत कुमार नवाबाजार और चैनपुर थाना की पुलिस के साथ परिवार के लोग अपहर्ताओं को पैसा देने के लिए गए।

उम्मीद थी कि अपहरण किये गये लोगों को छुड़ा लिया जाएगा और अपहरणकर्ताओं को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अपहरणकर्ता 10 लाख रुपये ले गए। अपहरण किये गये लोगों को भी नहीं छुड़ाया जा सका और अपराधी भी चकमा देकर भाग निकले। ये सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ। जबकि परिवार के लोगों ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि पैसा लेनेवाले अपहर्ताओं के दलाल को पकड़ लिजिए। लेकिन, अधिकारी नहीं माने और अपराधियों को जाने दिया। 

मुख्यमंत्री जी, घटना हुए दो महीने से अधिक हो गए हैं।  न बुजुर्ग पिता और ड्राइवर को ही पुलिस छुड़ा सकी है और न ही अपरणकर्ता अपराधी ही पकड़े जा सके हैं। अभी तक अपहृत और न अपहरण करने वालों का आज तक कोई सुराग मिला है। पुलिस चाहती तो उसी दिन लोगों को छुड़ा सकती थी और अपराधियों को पकड़ सकती थी। तब पलामू के एसपी संजीव कुमार थे। ये उनकी असफलता और अकर्मण्यता का परिणाम कहा जा सकता है।

आप ही बताइए मुख्यमंत्री जी कि इतने गंभीर मामले में तो वहां के एसपी संजीव कुमार पर आपको कठोर कार्रवाई करना चाहिए था, लेकिन इसके बदले आपने ऐसे अयोग्य और नकारा पुलिस अधिकारी को पदोन्नति देते हुए धनबाद जैसे महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील जिले का एसएसपी बनाकर पदोन्नति कर दी। धनबाद झारखंड की आर्थिक राजधानी माना जाता है।

धनबाद अपराधिक घटनाओं के लिए कुख्यात माना जाता है। ऐसे अधिकारी को आप पदोन्नति देंगे तो अपराधियों का मनोबल बढ़ेगा ही। धनबाद के जज उत्तम आनंद की हत्या ऐसी ही एक साजिश है। इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध है और इसकी निष्पक्ष जांच सीबीआई ही कर सकती है, क्योंकि कटघरे में यहां की पुलिस तंत्र ही है।

धनबाद के एसएसपी संजीव कुमार पहले पलामू में एसपी पद पर पदस्थापित थे। तब वहां अपराधियों को बचाने में इनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इस वजह से इनके कार्यकाल में अपराधियों का मनोबल खूब बढ़ा। पलामू में दो लोगों के अपहरण मामले में संजीव कुमार तत्कालीन एसपी की भूमिका संदेह के घेरे में है। धनबाद में यदि अपने पद पर बने रहे तो इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि आने वाले दिनों में इससे भी बड़ी अपराधिक घटना हो जाय। 

मुख्यमंत्री जी आज पूरा झारखंड आप से उम्मीद कर रही है कि न्याय करनेवाले जज दिवंगत उत्तम आनंद को इंसाफ कब मिलेगा। इस पूरे मामले की कार्रवाई एवं निष्पक्ष जाँच के लिए पहले आप धनबाद में पदस्थापित एसएसपी संजीव कुमार को वहां से हटाए, निलंबित करें एवं ऐसे स्वच्छन्द पदाधिकारी पर विभागीय कार्रवाई शुरु की जाय। ताकि धनबाद में जज की षड्यंत्रपूर्वक किए गए हत्या की जाँच निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से हो सके।

पलामू में उपरोक्त वर्णित अपहरण की घटना, कंडाघाटी थाना कांड संख्या-32/21 एवं धनबाद में हुए जज के षड्यंत्रपूर्वक किए गए हत्या की जाँच सीबीआई से कराने के लिए आप त्वरित कार्रवाई करेंगे ताकि पीड़ित पक्षों को न्याय मिल सके।

आपका

(बाबूलाल मरांडी)

Krishna Bihari Mishra

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