Author: Krishna Bihari Mishra

अपनी बात

भाजपा में लोकसभा चुनाव के दौरान झारखण्ड में होनेवाले ‘अमंगल’ को ‘मंगल’ भी नहीं रोक पायेंगे?

आप कितना भी पटना से रांची या दिल्ली से रांची भाया पटना का चक्कर लगा लीजिये, भाजपा के लोकसभा चुनाव प्रभारी मंगल पाडेय जी, पर आप झारखण्ड में भाजपा के उपर लगनेवाले इस बार के ग्रहण को आप नहीं बचा पायेंगे, क्योंकि उसके एक नहीं अनेक कारण हैं, जिसे आप न तो कभी सुलझा पायेंगे और न आपसे वह सुलझ ही सकता है।

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राजनीति

कोल्हान महासाझा संवाद के माध्यम से महागठबंधन के नब्ज को टटोला जनसंगठनों ने, समर्थन की घोषणा

2019 में लोकसभा चुनाव होने है और साल के अंत में झारखण्ड में विधानसभा के चुनाव अवश्यम्भावी हैं, सूत्र तो ये भी बताते हैं कि केन्द्र में जहां नरेन्द्र मोदी की सरकार गई, उसका असर झारखण्ड में भी पड़ेगा और रघुवर सरकार साल के अंत का भी इंतजार नहीं करेगी, उस वक्त सत्तारुढ़ दल में ऐसी भगदड़ मचेगी कि सत्ता के लालचियों का समूह उन दलों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना चाहेगा,

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अपनी बात

अमित शाह की कमेटी में बेटे का नाम देख गदगद BJP नेता की सारी हेकड़ी जनता ने फेसबुक पर निकाली

भाई, बाप अमीर हो या गरीब, किसे अपने बेटे की तरक्की अच्छी नहीं लगती, और खासकर उस वक्त और, जब सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठे दल का अध्यक्ष जब उसे अपने द्वारा बनाई जा रही कमेटी में महत्वपूर्ण स्थान दे दें। भाजपा के एक बहुत बड़े नेता तथा पटना साहिब सीट से भाजपा की ओर से लोकसभा के संभावित प्रत्याशी आर के सिन्हा इन दिनों बहुत खुश है,

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अपनी बात

CM से सवाल, जब उपायुक्त और एसपी ही सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाएं तब आम आदमी क्या करें?

याद करिये दिसम्बर 2013 रांची की घटना, रांची के बड़ा तालाब में एक घटना घटी थी, जिसमें बोटिंग के दौरान तत्कालीन मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती दुर्घटना का शिकार होते-होते बचे थे, जिसमें तीन लोगों की जानें चली गई थी, वह भी इसलिए कि यहां सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं रखा गया था। इस घटना के बाद ऐसा लगा कि राज्य के अधिकारी सबक लेंगे तथा नौका विहार करने के दौरान सुरक्षा-मानकों का पालन करेंगे,

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अपनी बात

केरल की वामपंथी सरकार और ‘द टेलीग्राफ’ की घटिया स्तर की मनोवृत्ति को आदित्य की सटीक चुनौती

जिन केरल के वामपंथी महिलाओं ने अचानक धर्म का स्वाद चखा है, जिन्हें भगवान अयप्पा में अचानक श्रद्धा उमड़ पड़ी हैं, हालांकि ये श्रद्धा अचानक क्यों उमड़ी हैं, केरल के धर्मप्रेमी बुद्धिजीवी अच्छी तरह जानते हैं, उन्हें रांची का अय्यपा मंदिर बुला रहा हैं, क्या वे केरल से यहां दर्शन करने आयेंगी? क्योंकि धर्म और भगवान को जो जानते हैं, वे तो मानते है कि वो सर्वत्र हैं, तो क्या जरुरत हैं,

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राजनीति

आंदोलनकारियों ने राज्यपाल से लगाई गुहार, रायसा जलाशय परियोजना को रद्द करने की मांग

झारखण्ड में विकास की नई धारा बह रही है, पर ये विकास की नई धारा झारखण्ड के आदिवासियों-मूलवासियों की जीवनलीला ही समाप्त कर दे रही हैं। सच्चाई है कि झारखण्ड में कई बड़े-बड़े डैम पहले बनाये गये, जिससे करोड़ों आदिवासियों-मूलवासियों का समूह विस्थापन का शिकार हो गया। उन्हें अपने गांव, जमीन, खेत, जंगल आदि से बेदखल कर दिया गया। चांडिल जैसे बड़े डैम से गांवों और किसानों को आज सिंचाई के लिए पानी तक नहीं मिल रहा।

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राजनीति

नाराज सवर्णों को मनाने एवं कांग्रेस को जमीन सुंघाने के लिए मोदी देंगे, सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण

सच पूछिये, तो देश की जो हालात है, वह किसी से छुपा नहीं है, सरकार के पास नौकरियों का अभाव हैं, जो निजी क्षेत्र में नौकरियां हैं, वह भी घटती जा रही हैं, देश में बढ़ती जनसंख्या ने, बेरोजगारी की वो फौज खड़ी कर दी हैं कि ये एक महामारी का रुप ले चुकी है। हमारा मानना है कि जब तक इस बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए, एक जनसंख्या नीति नहीं बनेगी तथा इसमें धार्मिक कट्टरता पर रोक नहीं लगेगी…

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अपनी बात

LS चुनाव को लेकर अमित शाह ने बनाई कमेटी, अर्जुन मुंडा को मिली जगह, रघुवर को नहीं मिला स्थान

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने आसन्न लोकसभा चुनाव को देखते हुए तैयारियां शुरु कर दी है। अमित शाह ने भाजपा को सफलता दिलाने के लिए फिलहाल कई कमेटियां बनाई हैं, जिनमें एक भाजपा के लिए संकल्प पत्र तैयार करेगी, दूसरी प्रचार-प्रसार, जबकि तीसरी कमेटी सामाजिक-स्वयंसेवी संगठन संपर्क का काम देखेंगी।

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राजनीति

8-9 जनवरी को वाम श्रमिक संगठनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल को लेकर रांची में वामदलों ने की बैठक

इनके हड़ताल को समर्थन देने के लिए रांची स्थित भाकपा माले कार्यालय में सभी वामदलों के नेताओं ने बैठक की, तथा इस हड़ताल को हर हाल में सफल बनाने का संकल्प लिया गया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव एवं पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने इस अवसर पर कहा कि केन्द्र सरकार की जनविरोधी नीतियों, किसान-मजदूर विरोधी नीतियों और कारपोरेट परस्त नीतियों के खिलाफ यह हड़ताल है,

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अपनी बात

वामपंथियों ने केरल में चखा धर्म का स्वाद, ‘द टेलीग्राफ’ ने आतंकी समर्थित पत्थरबाजों के प्रति दिखाई सहानुभूति

हमने तो सोचा था कि वामपंथी, गरीबों की रोजी-रोटी की लड़ाई लड़ते हैं, पर वे दंगे भी फैलाते हैं, ये हमने सपने में भी नहीं सोचा था। केरल में भगवान अयप्पा के नाम पर केरल की वामपंथी सरकार द्वारा पूरे राज्य में सांप्रदायिक दंगे की लगाई आग ने सारी गलतफहमियां बहुतों की दूर कर दी, भला जो दल धर्म को अफीम समझता हो, उसे धर्म के मामले में इतना दखल देने की आवश्यकता क्यों पड़ गई?

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