भारतीय नक्षत्रों का लेखा-जोखा – इस बार चित्रा डरायेगा, ठीक उसी प्रकार जैसे पिछले साल हथिया डराया था
पूरे देश में मानसून ने गजब ढाया है। समय पर आये मानसून से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। जो सहृदय कवि हैं, उनकी लेखिनियां उमड़ते-घुमड़ते काले बादलों को देख मचलने लगी है। प्रेम विरह में पागल प्रेमियों का हृदय एक-दूसरे में खोने को ललच उठा हैं। ऐसे में इस साल बारिश के भारतीय नक्षत्र कौन सा गुल खिला रहे हैं। बरसेंगे, खुब बरसेंगे या लोगों के दिलों को तरसायेंगे।
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