पेंशन योजना का लाभ उठानेवालों PM मोदी से पूछो तो कि 60 साल के बाद 3000 का भैल्यू क्या होगा?

12 सितम्बर को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रांची में थे। यहां उन्होंने आते ही झारखण्ड विधानसभा के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन किया, साथ ही कारपोरेट जगत से जुड़े अतिप्रतिष्ठित धनाढ्यों को उनके अपने सामानों के इम्पोर्ट एवं एक्सपोर्ट के लिए साहेबगंज में बंदरगाह का भी उद्घाटन कर दिया, साथ ही रांची से देश को संबोधन के क्रम में दो और योजनाओं का शुभारंभ किया।

12 सितम्बर को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रांची में थे। यहां उन्होंने आते ही झारखण्ड विधानसभा के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन किया, साथ ही कारपोरेट जगत से जुड़े अतिप्रतिष्ठित धनाढ्यों को उनके अपने सामानों के इम्पोर्ट एवं एक्सपोर्ट के लिए साहेबगंज में बंदरगाह का भी उद्घाटन कर दिया, साथ ही रांची से देश को संबोधन के क्रम में दो और योजनाओं का शुभारंभ किया। जिसमें एक था प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के अन्तर्गत लघु और सीमांत किसानों के लिए पेंशन और दूसरा छोटे व्यापारियों और स्वरोजगारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना।

इन दोनों योजनाओं में बताया गया है कि एक व्यक्ति जिसकी उम्र 18-40 तक हैं, उसे प्रति माह 60 वर्ष तक 55-200 रुपये मासिक सरकार को देने हैं, और इतने ही पैसे सरकार भी अपनी ओर से उन्हें देगी, बाद में जब उनकी उम्र 60 वर्ष की हो जायेगी तो उन्हें 3000 रुपये प्रति माह पेंशन मिलेंगे। साथ ही यह भी बताया गया कि व्यापारियों और स्वरोजगारियों के लिए चालू किये गये इस राष्ट्रीय पेंशन योजना से देश के करीब तीन करोड़ व्यापारियों का भविष्य सुरक्षित हो जायेगा, और यही बात किसानों के लिए भी दुहराई गई कि जब वे 60 वर्ष के हो जायेंगे तो उन्हें प्रतिमाह तीन हजार रुपये मिलेंगे।

अब सवाल उठता है कि जिस पार्टी के नेता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने स्वयं अपने जैसे नेताओं, विधायकों/सांसदों/मंत्रियों/प्रधानमंत्रियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम लागू रखी और देश के विभिन्न केन्द्रीय विभागों में कार्यरत अधिकारियों/कर्मचारियों को न्यू पेंशन स्कीम में ठेल दिया। जिसका विरोध बड़े पैमाने पर केन्द्रीय कर्मचारी तथा उन राज्यों के कर्मचारी कर रहे हैं, जिन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की कृपा से न्यू पेंशन स्कीम में ठेल दिया गया, उस पार्टी का नेता आखिर इतना किसानों और व्यापारियों पर फिदा क्यों हैं?

भाई संदेह तो जाता ही हैं, क्योंकि देश राज्य की जनता तो इतनी भोली है कि जो चाहे, वो इन्हें उल्लू बनाकर चला जाता हैं, यानी वो कहावत है कि कद्दू चाकू पर गिरे या चाकू कद्दू पर गिरे, लहुलूहान तो अंत में कद्दू को ही होना है, इसलिए पीएम मोदी जी कुछ भी करें, फायदा किसे होना है, ये तो जो जानकार लोग हैं, वे अच्छी तरह जानते है।

खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके पार्टी के मुख्यमंत्री (जिनजिन राज्यों में सत्ता संभाले हैं) भला वे भी तीन हजार रुपये का ये मासिक पेंशन क्यों नहीं लेते, आखिर किसानों/व्यापारियों/स्वरोजगारियों पर जो ये कृपा लूटा रहे हैं, वहीं कृपा खुद क्यों नहीं ले लेते? आखिर वे कौन सा काम इनसे बेहतर करते हैं, कि वे कुछ ही दिन ही सत्ता में रहेंगे और वे लाखों रुपये पेंशन के हकदार हैं और वह भी ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत, और देश के विभिन्न केन्द्रीय कर्मचारी/अधिकारी का भविष्य ही न्यू पेंशन स्कीम के तहत बर्बाद कर दें।

और जितनी उदारता और महानता के साथ स्वयं को दिखाते हुए ये कह रहे है कि किसानों/व्यापारियों/स्वरोजगारियों को आज से ठीक 60 साल बाद तीन हजार रुपये प्रति माह मासिक पेंशन मिलेंगे तो प्रधानमंत्री और उनके आगेपीछे चलनेवाले नेता ही बता दें कि जो बंदा आज 18 साल का है, जब वो साठ साल का होगा, क्या उस वक्त तीन हजार रुपये की इतनी भैल्यू होगी कि वो दो जून का रोटी भी अपने लिए बंदोबस्त कर लें, और अगर नहीं तो इस प्रकार के सब्जबाग क्यों दिखाये जा रहे है?

और जो किसान/व्यापारी/स्वरोजगारी इस लालच में पड़कर कि उन्हें आनेवाले समय में तीन हजार पेंशन मिलेगा, इस योजना में पड़ते हैं, वे शायद भूल रहे है कि आज के 55 रुपये के बराबर भी उस वक्त के तीन हजार की भैल्यू नहीं होगी, नहीं तो जरा आज ही आप पीछे जाइये, आज से ठीक 60 साल पीछे देश में रुपये की भैल्यू क्या थी? और आज हमारे नेताओं ने उस भारतीय रुपये की भैल्यू क्या बना कर रख दी हैं।

लोग कहते है कि आजादी के वक्त एक रुपये, एक डॉलर के बराबर हुआ करता था, आज एक डॉलर के लिए भारतीयों को करीब 72 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, ऐसे में अंततः जो लोग इस योजना का लाभ लेने के चक्कर में पडेंगे, उनका हाल वहीं होगा, जैसे एक विज्ञापन में हमने पढ़ा था कि जिस देश में लालचियों की संख्या अधिक होती हैं, वहां ठग कभी भूखों नहीं मरता, मतलब समझना हैं समझिये, नहीं तो उल्लू बनिये, कौन मना कर रहा ?

रही बात अखबार/चैनल की, तो वे तो भांड हैं, उन्हें तो विज्ञापन और पैसे मिलने चाहिए, वे इस पेंशन योजना में भी क्रांति दिखा देंगे, लेकिन जब आप 60 साल के होंगे और तीन हजार जब आपके हाथ में आयेंगे तो आप उस दिन स्वयं को छला हुआ महसूस करोगे, आप खुद कहोगे कि ये तो अपने जमाने के 55 रुपये से भी बहुत कम हैं और फिर अपनी किस्मत पर रोओगे, उस वक्त भाजपा या मोदी भी नहीं होंगे कि आप उन्हें कोस सकोगे कि आपने हमारे साथ ऐसा दगा क्यों किया?

Krishna Bihari Mishra

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