अपनी बात

हमेशा याद रखिये जयरामजी, पखाने को पखाने से साफ नहीं किया जा सकता, उसके लिए स्वच्छ जल और झाड़ू की आवश्यकता होती है

हमेशा याद रखिये जयराम जी, पखाने से पखाने को साफ नहीं किया जाता, उसे साफ करने के लिए स्वच्छ जल और झाड़ू की आवश्यकता होती है। अगर किसी ने आपके साथ बदतमीजी की, तो इसका मतलब यह भी नहीं कि आप भी उसके साथ बदतमीजी करें। आप ये भूले नहीं कि आप एक जनप्रतिनिधि है। एक जनप्रतिनिधि अपने विधानसभा क्षेत्र का सम्मान होता है। उस विधानसभा क्षेत्र के केवल विकास ही नहीं, बल्कि उस क्षेत्र में रहनेवाले लोगों का एक चेहरा भी होता है।

लेकिन जिस प्रकार से आप हर मुद्दे पर गरम हो जाते हैं। जिस प्रकार का आचरण करते हैं। वो अशोभनीय होता है। आपके उक्त आचरण का कोई भी व्यक्ति जिसके अंदर थोड़ा सा भी मानवीय मूल्य है। पसंद नहीं करेगा। उलटे आपको ही कटघरे में खड़ा करेगा। अब आप स्वयं देखिये, आप पर जब अंगुलियां उठी, लोगों ने आपको कटघरे में खड़ा करना शुरू किया, तब आपने स्पीकर रबीन्द्र नाथ महतो से गुहार लगाई कि वे आपकी प्रतिष्ठा की रक्षा करें।

लेकिन आज ही रांची में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने गये झारखण्ड विधानसभाध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो से आपके प्रकरण पर जब पत्रकारों ने उनसे सवाल पूछे, तो रबीन्द्र नाथ महतो ने क्या कहा? उन्होंने तो साफ कह दिया कि हर व्यक्ति को बातचीत में संयमित भाषा का प्रयोग करना चाहिए। बोली में मधुरता होनी चाहिए। भाषा ऐसी हो, जो सबको मीठी लगे। मतलब साफ है कि रबीन्द्र नाथ महतो ने आपको एक अच्छी नसीहत दे डाली कि आप अपने में सुधार लाये।

आप ही जो हर बात में झारखण्ड के महान पुरोधा विनोद बिहारी महतो जी का नाम लेते हैं। क्या विनोद बिहारी महतो की भाषा ऐसी ही थी। जैसी आपकी भाषा है। क्या विनोद बिहारी महतो जी के समय भ्रष्टाचार नहीं था। अरे भ्रष्टाचार तो ऐसी महामारी है, जिसे कोई सदा के लिए समाप्त कर ही नहीं सकता। ये मनुष्य के आचरण में इस प्रकार समा गया है कि उसे कोई मिटा नहीं सकता। हां, उसे नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन कैसे? क्या गाली देकर?

क्या महात्मा गांधी को अंग्रेज बहुत अच्छा कहा करते थे? जरा ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल का गांधी पर बयान देखिये। वे गांधी के  घोर आलोचक थे। भारत की स्वतंत्रता के कट्टर विरोधी थे। 1931 में जब गांधी जी गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए लंदन गये थे, उस वक्त उन्होंने गांधी का घोर अपमान किया था। पर क्या, कभी गांधी ने विंस्टन चर्चिल का अपमान किया। अरे गांधी जी को तो गोरों ने चलती ट्रेन से फेंक दिया था। उसके बावजूद भी गांधी ने कभी अंग्रेजों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी नहीं की। वे अपनी धारा में चलते रहे और अंततः अपने जीवन काल में ही भारत को स्वतंत्र कराकर दम लिया।

आप कभी पत्रकारों पर उखड़ जाते हैं। आप कभी सत्तापक्ष के नेताओं पर उलूल-जुलूल बयान दे देते हैं, आखिर ये कब तक चलेगा या आपने संकल्प ले लिया है कि आप नहीं सुधरेंगे और जब आप नहीं सुधरेंगे तो डूमरी की जनता का जब दिमाग घूमेगा तो वो सुधार देगी, फिर आप कही के नहीं रहेंगे, क्योंकि वक्त हमेशा एक जैसा नहीं होता। आप जिस पुलिस से उलझ रहे हैं, उस पुलिस को तो एक सामान्य बच्चा तक जानता है कि वे गाली से बात करते हैं। बिना गाली के तो वे रह ही नहीं सकते। इसलिए एक इज्जतदार आदमी थाने नहीं जाता, अगर कोई उक्त इज्जतदार आदमी को थप्पड़ मार दें या उसकी इज्जत से भी खेलना चाहे, तो वो थाने की ओर जाने का प्रयास नहीं करता, क्योंकि वो जानता है कि वे थाने में जायेगा तो उसकी इज्जत का फलूदा बन जायेगा।

अरे भाई, ये कौन नहीं जानता है कि झारखण्ड के पुलिस थानों में कैसे प्राथमिकी दर्ज की जाती है, कैसे प्राथमिकी दर्ज करवाई जाती है और कैसे प्राथमिकी में घालमेल की जाती है और कैसे उस प्राथमिकी के चक्कर में एक इज्जतदार आदमी अपनी इज्जत का फलूदा बना चुका होता है। लेकिन फिर भी वो इज्जतदार आदमी, पुलिस थाने में रहनेवाले पुलिसकर्मियों से नहीं उलझता।

क्या यहां की जनता नहीं जानती कि एक दारोगा या एक सिपाही की कितनी सैलरी है? और एक सिपाही या दारोगा, नौकरी लगते ही, अरबों का मालिक कैसे हो जाता है। उसके घर में तीन-तीन बाइक, दो-दो चारपहियें और कई एकड़ जमीन और बंगले कहां से आ जाते हैं? सभी जानते हैं। लेकिन वे इनसे लड़ना नहीं चाहते। चुपचाप अपनी इज्जत बचाते हैं और उनके ऊपर इन पुलिसकर्मियों द्वारा जो अत्याचार होता है, उस अत्याचार को वे ईश्वर की अदालत में पहुंचा देते हैं। ईश्वर ऐसा न्याय करता है कि ये अपनी जिंदगी में ही कौड़ी के तीन हो जाते हैं।

ऐसी अनेक कहानियां, इस विद्रोही24 के पास है। आइयेगा प्रमाण के साथ सुना देंगे। दिखा देंगे। लेकिन आप भी उनकी तरह मवाली बनेंगे। गाली देंगे। उनके जैसा आचरण करेंगे तो फिर हो गया आपकी विधायिकी। आप समझने की कोशिश कीजिये। अगर कोई व्यक्ति या दल आपके द्वारा किये गये इस आचरण का समर्थन कर रहा है, तो वो आपके हितैषी नहीं, बल्कि आपका परमशत्रु हैं। आप स्वयं को परिमार्जित करिये। आप स्वयं में सुधार लाइये। आपके अंदर जो ऊर्जा है। आपके अंदर जो युवाओं और समाज को देने के लिए जो ज्वाला धधक रही है। उसे संभालिये। नहीं तो, ये लोग आपको इस स्थिति में डाल देंगे कि आप कुछ नहीं कर पायेंगे। स्वयं को संभालिये।

किसी की गाली का जवाब गाली नहीं हो सकता। गंदगी को गंदगी के द्वारा साफ नहीं किया जा सकता। बुराई को सिर्फ अच्छाई के द्वारा ही समाप्त किया जा सकता है। अगर कोई गाली-गलौज करें तो आप मुस्कुराना सीखिये और उसके गाली-गलौज का जवाब क्या हो सकता है, उस पर चिन्तन करते हुए उसका मुकाबला कीजिये। देखियेगा, आपकी वो जीत स्थायी होगी, समाज में उसका प्रभाव भी दिखेगा। याद रखिये, दुनिया में बड़े यशवालों की प्रतिमा चौक-चौराहों पर लगाई जाती है, ताकि लोग प्रेरणा लें। गाली-गलौज करनेवालों की अगर कही प्रतिमा लगाई गई हो, तो आप हमें बताइयेगा।

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