होली का असर, चौथे दिन ही आजसू छात्र संघ का आमरण अनशन ‘टे’ बोल दिया

स्थानीय व नियोजन नीति में संशोधन को लेकर मोराबादी मैदान में लेटे आजसू छात्र संघ के नेताओं का आमरन अनशन चौथे दिन यानी 1 मार्च को ही ‘टे’ बोल गया, चूंकि 2 मार्च को होली थी, और होली के दिन कौन ऐसा छात्र, युवा या नेता होगा जो होली का मजा न ले, इसलिए बहुत ही गोपणीय ढंग से इस आमरन अनशन को तुड़वाने के लिए सम्मानजनक रास्ता निकलवाया गया, भाजपा और आजसू के सत्तारुढ़ दल के नेता मोराबादी मैदान पहुंचे, जूस पिलवाया।

स्थानीय व नियोजन नीति में संशोधन को लेकर मोराबादी मैदान में लेटे आजसू छात्र संघ के नेताओं का आमरन अनशन चौथे दिन यानी 1 मार्च को ही ‘टे’ बोल गया, चूंकि 2 मार्च को होली थी, और होली के दिन कौन ऐसा छात्र, युवा या नेता होगा जो होली का मजा न ले, इसलिए बहुत ही गोपणीय ढंग से इस आमरन अनशन को तुड़वाने के लिए सम्मानजनक रास्ता निकलवाया गया, भाजपा और आजसू के सत्तारुढ़ दल के नेता मोराबादी मैदान पहुंचे, माला पहनवाया, जूस पिलवाया और लीजिये आमरन अनशन खत्म।

ज्ञातव्य है कि राज्य में स्थानीय व नियोजन नीति जो लागू हुई हैं, उस स्थानीय व नियोजन नीति को लागू कराने में सत्ता में शामिल इन्हीं के नेताओं का बड़ा हाथ है, जिस दिन स्थानीय नीति व नियोजन नीति लागू हुई थी, उसी दिन इन्हीं के नेता व सत्तारुढ़ दल में शामिल मंत्री चंद्र प्रकाश चौधरी ने स्थानीय व नियोजन नीति की खुलकर प्रशंसा की थी, पर अब इन्हीं के नेता स्थानीय व नियोजन नीति पर सरकार के खिलाफ आग उगल रहे हैं।

आश्चर्य यह है कि एक ओर आजसू के नेता स्वयं सत्ता सुख भोग रहे हैं और एक दिन भी इस स्थानीय व नियोजन नीति को लेकर उपवास पर बैठने को तैयार नहीं हैं, पर अपने छात्र विंग को इसके लिए आंदोलन करने को कहते ही नहीं, बल्कि उन्हें इस आग में झोंक भी देते हैं, पर चूंकि होली आ गई, ऐसे में ये नेता होली मनाते, अपने बच्चों के संग मालपूए खाते, तब जब ये बात आम जनता तक पहुंचती, तो इनका छीछालेदर होना तय था, इसलिए ये अपनी सम्मान बचाने के लिए, छात्र आंदोलन को विराम लगाने की चाल चली।

कांग्रेस से भाजपा में आये विधायक राधा कृष्ण किशोर को पकड़ा और चंद्र प्रकाश चौधरी को अनशन स्थल पर भेजकर अनशन समाप्त कराया, इस प्रकार चार दिनों से चली आ रही जनता की आंखों में धूल झोंकनेवाली नौटंकी का समापन हो गया। इसी तीन-चार दिनों में कुछ युवा अस्पताल भी पहुंच गये, पर आजसू के मंत्री और नेताओं का इस पर कोई असर नहीं था, उन्हें तो लग रहा था कि बस तीर मार लिये, अब तो उन्हें कोई झूका ही नहीं सकता, पर तीन-चार दिनों में ही सारी हेकड़ी निकल गई। जनता के सामने इनके आंदोलन की हवा निकल गई, यानी एक होली ने इनके सारे किये-कराये पर पानी फेर दिया।

Krishna Bihari Mishra

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