रांची में आदिवासियों ने रघुवर सरकार को चेताया, अगर कुरमी और तेली समुदाय को…

32 आदिवासी जाति हो जा होशियार, तुम्हारी जमीन, नौकरी, शिक्षा, मुखिया पद पर लटक रहा तलवार, क्योंकि बीजेपी, आजसू, झामुमो, जेवीएम, कांग्रेस सभी कुर्मी और तेली को आदिवासी बनाने को है तैयार, 32 आदिवासी जाति लड़ने के लिए हो जा तैयार। बैनर पर लिखा ये नारा आनेवाले संकट का एक खांचा तैयार कर दिया है।

32 आदिवासी जाति हो जा होशियार, तुम्हारी जमीन, नौकरी, शिक्षा, मुखिया पद पर लटक रहा तलवार, क्योंकि बीजेपी, आजसू, झामुमो, जेवीएम, कांग्रेस सभी कुर्मी और तेली को आदिवासी बनाने को है तैयार, 32 आदिवासी जाति लड़ने के लिए हो जा तैयार। बैनर पर लिखा ये नारा आनेवाले संकट का एक खांचा तैयार कर दिया है। आदिवासी समुदाय को लग रहा है कि राज्य की राजनीतिक पार्टियां अपने स्वार्थ के लिए आदिवासी समुदाय के हक को छीनने का प्रयास कर रही है। आज रांची के मोरहाबादी में एक बार फिर बड़ी संख्या में राज्य के विभिन्न कोनों से आदिवासियों का समूह जुटा और राज्य सरकार को चेतावनी दी कि वे आदिवासियों की भावनाओं से न खेलें, जो संविधान ने उन्हें अधिकार दिये हैं, उन अधिकारों को चुनौती न दें।

आज की रैली में वे लोग भी दीखे, जो कभी भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता करते थे और मंत्री पद को भी सुशोभित किया, पर आदिवासी मुद्दे पर वे आज की रैली में सभी के साथ एकताबद्ध दीखे, जो बताता है कि आदिवासियों पर आ रहे आसन्न संकटों को लेकर आदिवासियों के अंदर सारे के सारे वर्ग विभिन्न गिले-शिकवे को दूर कर एक साथ दिखाई पड़ रहे है, जो बता रहे है कि आज न तो कल अगर स्थितियां नहीं सुधरी तो आदिवासी समुदाय अपने हक के लिए, अपनी पहचान का सुरक्षित रखने के लिए कुछ भी कर सकता है।

आज की रैली में सभी वक्ताओं ने राज्य सरकार को आगाह किया कि वे कुरमी या तेली को जो आदिवासी बनाने पर तूले है, उससे बाज आये। उनका कहना था कि आदिवासियों की परम्पराएं और उनकी संस्कृतियां इन सबसे अलग है, इसलिए उन्हें अनुसूचित जन-जाति में लाने की बात किसी भी दृष्टिकोण से ठीक नहीं। इस आदिवासी रैली में पुस्तकें भी बांटी गई, जो सीएनटी-एसपीटी कानून तथा भूमि अधिग्रहण से भी संबंधित थी। आदिवासी महारैली का आयोजन आदिवासी सभा और आदिवासी हो महासभा ने किया था। महारैली में सभी वक्ताओं ने सरकार को चेताया कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो सरकार आदिवासियों की ओर से एक और बड़ा आंदोलन को झेलने के लिए तैयार रहे।

Krishna Bihari Mishra

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CM या अपने विरोधियों की अगर आप इज्जत नहीं कर सकते तो गाली-गलौज भी न करें

Thu Apr 26 , 2018
ये भाषा आदिवासियों की नहीं हो सकती और न ही कोई आदिवासी ऐसी भाषाओं को स्वीकार करेगा, या ऐसे लोगों को समर्थन करेगा, जो इस प्रकार की भाषा, अपने विरोधियों अथवा वैचारिक रुप से नहीं मेल खानेवालों के खिलाफ प्रयोग करते हैं। आमतौर पर सार्वजनिक मंचों पर किसी भी आर्गेनाइजेशन या समुदाय या व्यक्ति के खिलाफ कोई भी व्यक्ति आपत्तिजनक अथवा असंवैधानिक शब्दों का प्रयोग नहीं करता,

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