जब अपने पर पड़ी तो ACB की कार्रवाई पर ही प्रश्न चिह्न लगा दिया, हड़ताल की दे डाली धमकी

14 नवम्बर को बरकट्ठा अंचलाधिकारी मनोज कुमार तिवारी को एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा पांच हजार रुपये रिश्वत लेते उनके आवास से उनकी गिरफ्तारी से नाराज राज्य प्रशासनिक सेवा के सभी पदाधिकारी 16 नवम्बर से सामूहिक अवकाश पर चले गये है। करीब 800 से ज्यादा पदाधिकारी 20 नवम्बर तक सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। ये निर्णय झारखण्ड प्रशासनिक सेवा संघ ने कल रांची में ले लिया। संघ ने धमकी देते हुए कहा कि उनकी मांगे 20 नवम्बर तक पूरी नहीं हुई, तो वे इसके बाद अनिश्चितकालीन  हड़ताल पर चले जायेंगे। झारखण्ड प्रशासनिक सेवा संघ से जुड़े नेताओं का कहना हैं कि…

  • सीओ की गिरफ्तारी व मारपीट की न्यायिक जांच हो।
  • दोषी अफसरों पर कड़ी कार्रवाई हो।
  • सीओ की पत्नी की प्राथमिकी दर्ज हो।
  • एसीबी की कार्रवाई की वीडियोग्राफी हो।
  • छापामारी के दौरान मजिस्ट्रेट मौजूद हो।

इनकी मांगों पर राज्य की मुख्य सचिव ने क्या कहा? वह भी देखिये…

  • एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई के दौरान मजिस्ट्रेट भी होंगे।
  • सीओ की पिटाई करनेवाले पर केस दर्ज करने का निर्देश।
  • पदाधिकारियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय का आश्वासन।

बताया जाता है कि इन अधिकारियों के हड़ताल पर चले जाने से जमीन अधिग्रहण, विधि व्यवस्था, गृह प्रवेश योजना, मनरेगा, जमीन रजिस्ट्री समेत कई कार्य प्रभावित होंगे, पर अगर आम जनता से इस संबंध में पूछेंगे, तो ये यहीं कहेंगे कि ऐसे भी ये कौन काम जनता के हित में ईमानदारी से करते हैं कि इनके हड़ताल पर चले जाने से आम जनता का कार्य प्रभावित होगा, सहीं मायनों में प्रभावित होंगे उनके काम, जो ठेकेदार हैं, दलाल हैं, नेता हैं, मंत्री हैं, अधिकारी हैं, इंजीनियर्स हैं और वे स्वयं जो हड़ताल पर जाने की धमकी दे रहे हैं। आम जनता तो जैसे कल थी, वैसे आज भी रहेंगी।

जिस प्रकार से सीओ की गिरफ्तारी और एसीबी के खिलाफ झारखण्ड प्रशासनिक सेवा संघ के लोग लामबंद हुए हैं, अवकाश पर चले गये, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की धमकी दे रहे हैं। ठीक उसी प्रकार उन सारे संघों को भी गोलबंद हो जाना चाहिए, जिनके विभागों से संबंधित कोई भी अधिकारी या कर्मचारी को अब तक एसीबी ने गिरफ्तार किया है, आखिर उनका भी क्या दोष, हो सकता है कि उन्हें भी एसीबी ने इसी प्रकार गिरफ्तार किया हो, जैसा कि बरकट्ठा के अंचलाधिकारी को किया, जैसा कि झारखण्ड प्रशासनिक सेवा संघ के लोग कह रहे हैं।

कमाल हैं, छोटा कर्मचारी को एसीबी घूस लेते गिरफ्तार करें तो कोई शोर नहीं, और जब बड़ी मछली को एसीबी पकड़ें तो उसके लिए सामूहिक अवकाश और हड़ताल की धमकी, ये तो कोई बात नहीं हुई। कौन नहीं जानता कि जब लोग गलत करते पकड़े जाते हैं, तो खुद को बचाने के लिए क्या नहीं करते? हो सकता है, कि इसमें एक प्रतिशत गलत भी होता हो, पर  एसीबी की कार्रवाई पर प्रश्न चिह्न उठाते हुए, अनिश्चितकालीन हड़ताल की धमकी तो यही बताता है कि एसीबी और राज्य सरकार जान लें कि अगर उसने राज्य प्रशासनिक सेवा संघ से जुड़े भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा करने की कोशिश की, तो उसकी खैर नहीं।

मैं तो राज्य सरकार से ही अनुरोध करुंगा कि वह एसीबी को बंद ही कर दें, क्योंकि झारखण्ड में तो भ्रष्टाचार सदाचार का आधार है। जैसे एसीबी ही बताएं कि अब तक जितने लोगों को उसने घूस लेते गिरफ्तार किया है, उनमें से वह कितने लोगों को सजा दिलाने में कामयाब हुई हैं। अखबारों में लोग तो घूस लेते हुए गिरफ्तार होनेवाले महानुभावों के नाम सुनते हैं, फोटो देखते हैं, पर फिर वे इन आरोपों से मुक्त कब और कैसे हो जाते हैं?  पता ही नहीं लगता।

झारखण्ड प्रशासनिक सेवा संघ ने ताल ठोक दी हैं। मुख्य सचिव, झारखण्ड प्रशासनिक सेवा संघ की मांगों के आगे झुक चुकी हैं, तो फिर मुख्यमंत्री रघुवर दास की क्या मजाल, कि वे इनकी मांगों के आगे नहीं झुके, वे भी जल्द झुकेंगे और इनकी सारी मांगे मान ली जायेगी। हो सकता है कि घूस लेते गिरफ्तार, वह सीओ जल्द ही किसी अन्य जगह पर काम करता भी नजर आये।

चिंता न करें, ये झारखण्ड हैं भाई। यहां तो निर्बलों को ही सजा सुनाकर सूली पर चढ़ा दिया जाता हैं, अगर आप ताकतवर हैं तो आप को कोई छू भी नहीं सकता। ताजा मामला आपके सामने हैं, जल्द ही परिणाम निकलेगा। हो सकता है कि एसीबी के अधिकारियों पर ही कार्रवाई हो जाये कि तुमने झारखण्ड प्रशासनिक सेवा संघ से जुड़े महानुभावों के गर्दन पर हाथ क्यों डाला? भला इनके जैसा ईमानदार आदमी तो पूरे दुनिया में नहीं हैं, लोग इनकी ईमानदारी की कसमें खाते हैं, और उसमें डूबकर अपना जीवन कृतार्थ कर लेते हैं।