छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के अत्याचार से परेशान एक पत्रकार ने की आत्महत्या की कोशिश

आज एक वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो रही है। ये वीडियो है छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के एक पत्रकार सौरभ अग्रवाल की है। सौरभ ने बीती रात आत्महत्या की कोशिश की थी, जिसके बाद वे एक अस्पताल में आइसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे है। आत्महत्या करने की कोशिश के पूर्व उन्होंने अपनी वेदना एक वीडियो के माध्यम से आम जनता के बीच रखी थी, और उस वीडियो के माध्यम से जनता से कुछ सवाल भी पूछे, जो बहुत ही दर्दनाक है।

आज एक वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो रही है। ये वीडियो है छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के एक पत्रकार सौरभ अग्रवाल की है। सौरभ ने बीती रात आत्महत्या की कोशिश की थी, जिसके बाद वे एक अस्पताल में आइसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे है। आत्महत्या करने की कोशिश के पूर्व उन्होंने अपनी वेदना एक वीडियो के माध्यम से आम जनता के बीच रखी थी, और उस वीडियो के माध्यम से जनता से कुछ सवाल भी पूछे, जो बहुत ही दर्दनाक है।

सौरभ अग्रवाल ने इस वीडियो में रमन सरकार की कड़ी आलोचना की है, साथ ही उन्होंने कुछ नेताओं, कोल माफियाओं, पुलिसकर्मियों तथा कुछ पत्रकारों के नाम भी लिये है, जिसके वजह से वे कुछ दिनों से परेशान चल रहे हैं, तथा जिसके कारण उन्हें आत्महत्या करने को विवश होना पड़ा है।

सौरभ अग्रवाल का कहना है कि वे पत्रकार है, कुछ लिखते हैं, सच लिखते हैं, जिसके कारण उनकी जिंदगी ही, इस भाजपा सरकार में नरकमय हो गई है, और अब उनके पास आत्महत्या करने के सिवा दूसरा कोई विकल्प ही नहीं है।

उनका कहना है कि इस रमन सरकार में उनका जीना दूभर हो गया है, एक फर्जी प्राथमिकी का मसला खत्म हुआ नहीं कि दूसरी फर्जी प्राथमिकी उनके खिलाफ दर्ज हो जा रही है, ये फर्जी प्राथमिकी कराने का सिलसिला थम ही नहीं रहा। ये फर्जी प्राथमिकी ऐसे-ऐसे जगहों में दर्ज हो जा रही है, कि उस इलाके में आज तक वे कभी गये ही नहीं, एक फर्जी प्राथमिकी दर्ज हो जाने के बाद, उस में बेल अभी मिला भी नहीं कि दूसरी फर्जी प्राथमिकी दर्ज कर दी जा रही, ऐसे में उसके पास आत्मदाह करने के सिवा दुसरा कोई रास्ता नहीं।

वे वीडियो में आम लोगों से पूछते है कि आप स्वयं बताये कि आपके हालात उनके जैसे हो, तो वे क्या करते, वे कहते है कि उनके पास, उनकी मां के अलावा कोई नहीं है, खाने-पीने की भी तंगी है, ऐसे में वह कैसे जीये? केस लड़े, रोटी की व्यवस्था करें या अपनी जीवनलीला ही समाप्त कर लें। वे बात-बात में छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार को कोसना नहीं भूलते, वे कहते है कि जब से ये सरकार आई है, उनके जैसे लोगों का जीना दूभर हो गया, इसलिए उनके पास आत्महत्या करने के सिवा दूसरा कोई विकल्प नहीं।

इसी बीच आत्महत्या उन्होंने करने की कोशिश की, ईश्वर की कृपा हुई, वे फिलहाल बच गये है, और इलाजरत है, लेकिन फिर बात यहीं आती है कि  सौरभ बच भी गये, तो क्या उनकी समस्याओं का निदान निकल जायेगा? आखिर राजनीतिक दल और उनके नेता किसी इन्सान के साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं, आखिर किसी की जिंदगी से खेलने में, उन्हें कौन सा आनन्द मिल रहा है? क्यों भाजपाइयों, लोग आपकी सरकार इसी लिए राज्य में बनाते हैं कि आप किसी की जिंदगी से ही खेल जाओ।

Krishna Bihari Mishra

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