राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के प्रति प्रभात खबर की संकीर्ण सोच ने पत्रकारिता के स्तर को किया धराशायी
कोई अखबार इस प्रकार की क्षुद्रता पर उतर जाये कि राज्यपाल के समाचार को अपने अखबारों से किक आउट करना शुरु करें, तो आप इसे क्या कहेंगे? उसकी मूर्खता या उसकी विद्वता या उसकी ढिठई। हम तो इसे ढिठई ही कहेंगे और ये ढिठई की है रांची से प्रकाशित होनेवाले अखबार प्रभात खबर ने जो खुद को अखबार नहीं आंदोलन कहता है। इस अखबार ने इस प्रकार की ढिठई, एक बार नहीं कई बार की है। जिसका दृष्टांत आप सभी के सामने विद्रोही24 रख रहा है। आप स्वयं विचार करें, क्या ये स्वस्थ पत्रकारिता है?
जब विद्रोही24 ने अखबार के इस प्रकार के ढिठई करने के अभिप्राय का पता लगाया तो पता चला कि इस अखबार के प्रधान संपादक ने कुछ दिनों पहले खनन से संबंधित विषयों को लेकर एक विशेष कार्यक्रम अखबार की ओर से कराने की सोची थी। जिसका उद्घाटन राज्यपाल को करना था और इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल को ही बनाया जा रहा था। जिस पर राजभवन (वर्तमान में लोक भवन) ने अपनी मंजूरी नहीं दी और इस कार्यक्रम को लेकर राजभवन का मूड भी सही नहीं था, क्योंकि राज्य में खनन की स्थिति क्या है? राजभवन से बेहतर कौन जानता है।
कहा जाता है कि इधर राजभवन ने ना कहा और उधर प्रभात खबर के प्रधान संपादक ने इसे अपने दिल पर ले लिया और उसी दिन से प्रभात खबर ने राज्यपाल के समाचार को अपने अखबार से किक आउट करना शुरु किया और देखते ही देखते कई प्रमुख कार्यक्रमों में राज्यपाल के शामिल होने के बावजूद इस अखबार ने अपनी ढिठई दिखा दी। लोग बताते है कि हालांकि इधर कुछ दिनों में प्रभात खबर ने राज्यपाल की खबरों को लेकर नरमी दिखाई है। लेकिन इसके पूर्व उसकी दिखाई ढिठई ने अखबार और पत्रकारिता दोनों को शर्मसार किया है। प्रमाण आपके सामने हैं। विद्रोही24 ने आपके सामने सब कुछ स्पष्ट कर दिया है…

घटना संख्या एकः एक अक्टूबर को रांची के मोराबादी मैदान में एक्सपो उत्सव था। जिसका उद्घाटन राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार द्वारा किया गया था। इस दौरान राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने वहां उपस्थित लोगों को संबोधित भी किया था। जिसका प्रेस विज्ञप्ति भी राजभवन द्वारा जारी किया गया था। उक्त प्रेस विज्ञप्ति के साथ राज्यपाल से संबंधित यहां के फोटो भी प्रेषित किये गये थे। होना तो यह चाहिए था कि दो अक्तूबर को प्रभात खबर में राज्यपाल से संबंधित खबरों को प्रमुखता देनी चाहिए थी। लेकिन इस अखबार ने राज्यपाल की खबर को स्थान नहीं दी।

घटना संख्या दोः दो अक्टूबर को रांची के अग्रसेन भवन में अग्रवाल सभा अपना 50वां स्थापना दिवस समारोह मना रहा था। इस कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। तीन अक्तूबर को प्रभात खबर ने यह खबर प्रमुखता से छापी। वहां मौजूद कई प्रमुख लोगों के विचार और फोटो प्रभात खबर में दिखे, लेकिन यहां भी प्रभात खबर में राज्यपाल नहीं दिखे। विद्रोही24 ने इस मुद्दे को उस वक्त प्रमुखता से उठाया था। जिसकी बुद्धिजीवियों के बीच चर्चा भी हुई।

घटना संख्या तीनः पांच अक्तूबर को रांची के आर्यभट्ट सभागार में झारखण्ड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय अपना दूसरा दीक्षांत समारोह मना रहा था। जिसमें राज्यपाल प्रमुख रूप से मौजूद थे। यहां राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने वहां उपस्थित लोगों को संबोधित भी किया। प्रभात खबर ने छः अक्तूबर को इससे संबंधित खबरें छापी। लेकिन राज्यपाल के संभाषण को स्थान नहीं दिया। जबकि इस अखबार ने केन्द्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के भाषण को प्रमुखता से छापा। लेकिन राज्यपाल यहां भी नदारद रहे।

घटना संख्या चारः आठ अक्तूबर को रांची के बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार वहां के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करने गये थे। नौ अक्तूबर को प्रभात खबर ने यहां की समाचार को प्रमुखता से छापा। लेकिन यहां भी प्रभात खबर ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से संबंधित खबरों को प्रमुखता नहीं दी।
