इधर नेता प्रतिपक्ष ने फेसबुक के माध्यम से CM हेमन्त सोरेन के नैतिकता पर सवाल उठाई, इधर उन्हीं के पोस्ट पर आम जनता ने बाबूलाल मरांडी को धो डाला
कल नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आईपीआरडी झारखण्ड से रिलीज हुई एक फोटो को अपने फेसबुक पर डालकर कुछ पंक्तियां लिख डाली। जो सीधे मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नैतिकता पर सवाल खड़े कर रहे थे। वो पंक्तियां क्या थी। सर्वप्रथम उस पर ध्यान दें। बाबूलाल मरांडी ने जो पंक्तियां लिखी वो नीचे दी गई है…
“संगत से गुण आत है, संगत से गुण जात।” जिस पूजा सिंघल के मामले को कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का प्रतीक बताया गया, आज वही सत्ता के मंच पर दिखाई दें, तो सवाल उठना लाज़िमी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ पूजा सिंघल और राजीव बक्शी की मौजूदगी क्या संदेश देती है? क्या यही है भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई, या फिर अब नारा बदल चुका है? लगता है ‘स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन’ में सबसे बड़ा स्टेक झारखंड की नैतिकता ही है। जनता तस्वीरें भी देखती है और संदेश भी समझती है।

बाबूलाल मरांडी ने ये पंक्तियां तो लिख डाली। लेकिन उन्हीं के फेसबुक पर जो कमेन्ट्स आये। वो बाबूलाल मरांडी और भाजपा के होश उड़ा देनेवाले थे। विद्रोही24 तो चाहेगा कि बाबूलाल मरांडी को चाहिए कि उन कमेन्ट्सों को वे पढ़े, क्योंकि संगत से गुण होत है, संगत से गुण जात वाली लोकोक्ति उनके जैसे नेताओं और उनकी पार्टी के अंदर बैठे महान आत्मा वाले नेताओं पर भी लागू होती है।
आप और आपके नेताओं ने पार्टी को कैसे धूल-धूसरित किया है। पार्टी पिछले दो विधानसभा चुनाव से कैसे स्वयं को बर्बाद कर रही है। आनेवाले समय में भी पार्टी ठीक से खड़ी हो पायेगी भी या नहीं, कुछ कहा नहीं जा सकता। इसी आलेख में जो फोटो आपकी दी गई है। आखिर आप किनके साथ बैठे हैं? आप भी बता दीजिये, क्योंकि आप जब किसी पर कीचड़ उछालेंगे तो कुछ कीचड़ छिटककर आपके उपर भी आयेंगे।
आम जनता जिसको इन सब से कोई मतलब नहीं, वो जानती है कि हर प्रकार से लूटना और बर्बाद होना उन्हीं को हैं, तो देखिये वही जानता आपके कमेन्ट्स में कैसे दिल खोलकर आपको रास्ता दिखा रही है। कुछ कमेन्ट्स आप भी देख लीजिये… आपके ही पोस्ट पर जितेन्द्र पाठक लिखते है कि इनको पाल पोसकर बड़ा बनानेवाले रघुवर दास ही है। अशोक कुमार राय लिखते है कि सही बात है लेकिन चंपत राय, क्या ज्ञानेश कुमार की संगत से ऐसा हो गये या दोनों पर ही मोदी-शाह की संगत का ऐसा खराब असर हो गया सर जी, इस पर भी प्रकाश डालने की कृपा करें।
अश्विनी कुमार ने लिखा बाबूलाल मरांडी जी, यदि भ्रष्टाचार के खिलाफ आपकी लड़ाई सिद्धांतों की है, तो फिर हर मामले में एक जैसा रवैया क्यों नहीं? पूजा सिंघल पर गंभीर आरोप लगने के बाद यह सवाल भी उठा कि उन्हें पूर्ववर्ती सरकारों में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां क्यों मिलती रहीं और विपक्ष ने रघुवर दास सरकार पर उन्हें संरक्षण देने के आरोप लगाए। इसी तरह इलेक्टोरल बॉन्ड, अडानी से जुड़े टेंडर और हितों के टकराव के आरोप, राम मंदिर दान प्रबंधन से जुड़े विवाद और जांच, तथा मोहन यादव से जुड़े भूमि मामलों पर लगे आरोप—इन सभी मामलों में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग उठी है। यदि विपक्ष के मामलों में आप तत्काल कार्रवाई चाहते हैं, तो सत्ता पक्ष से जुड़े आरोपों पर भी उतनी ही मुखरता दिखाइए। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई चयनात्मक नहीं, बल्कि सभी के लिए समान मानदंडों पर आधारित होनी चाहिए।
जय प्रकाश ने लिखा सही कहा श्रीमान आपने संगत से गुण आत है, संगत से गुण जात। आपका भी गुण बीजेपी के संगत में रहकर खराब हो गया, नहीं तो आपने कहा था कि कुतुबमीनार से कूद जायेंगे। लेकिन बीजेपी में नहीं जायेंगे। रत्नेश कुमार ने लिखा हाथी वाला मालिक को छोड़, अब मईयां सम्मान देनेवाले के पास। राजकमल तिवारी ने लिखा आपलोग झूठमूठ विरोध करते हैं श्रीमान, आपका शीर्ष नेतृत्व का जेएमएम से अच्छा बांडिंग है, जीता जागता उदाहरण राज्यसभा चुनाव है, आगे भी देखने को मिलेगा, जनता मूर्ख नहीं है, सब देख रही है।
वाहिद अली ने लिखा कुतुबमीनार वाले साहेब से नैतिकता? अमित कुमार ने लिखा मधु कोड़ा के बारे में क्या ख्याल है? अवध राज ने लिखा जितना याद आ रहा है मैडम जी ने आप ही लोग के काल में उत्पात मचाया था और जेल हेमन्त जी के काल में गई थीं। राजीव बख्शी तो आपलोगों के भी चहेते हुआ करते थे, जितना स्मरण है। मेरी याददाश्त गलत हो तो कृपया निःसंकोच सुधार करने की कृपा करेंगे। बीरेन्द्र यादव लिखते है दूसरों पर कुछ बोलने से पहले अपनी पार्टी के क्रिया कलापों और अपनी गिरेबां पर भी नजर डाल लीजिए। जहां पहले आपकी तरफ से किसी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया जाता है फिर उसे पार्टी में शामिल कर सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री बना दिया जाता है।
कई लोगों ने तो फोटो के साथ कमेन्टस उनके पोस्ट पर चेप दिये हैं। जो बताने के लिए काफी है कि आम जनता फिलहाल भाजपा के स्थानीय नेताओं व केन्द्रीय नेताओं से किस प्रकार गुस्से में हैं। अगर ये गुस्सा जारी रहा तो आनेवाले समय में यह गुस्सा केवल राज्यस्तर पर ही नहीं, केन्द्रीय स्तर पर भी दिखेगा। क्योंकि इथेनॉल ने कई जनता के बाइक और कारों के इंजन को क्षतिग्रस्त कर दिया है। ये मत भूलियेगा कि बाइक मध्यमवर्गीय परिवारों के मुख्य वाहन है और उन्हें इथेनॉल ने गजब का झांसा देना शुरु कर दिया है। जब वोट देने जायेंगे तो उन्हें उनका बाइक जरुर याद आयेगा कि वे कितने में लिये और कितने जल्दी बर्बाद हो गये, वो भी इथेनॉल के कारण। ये इथेनॉल का भी फायदा कौन उठा रहा है, वो तो बाबूलाल मरांडी भी जानते होंगे।
