अपनी बात

मैंने तो एग्जिट पोल के पूर्व ही कह दिया था कि बंगाल में भाजपा आ रही है, भाजपा के आने के कारण भी थे और अगर किसी मीडिया या एग्जिट पोल करनेवालों को उसकी भनक नहीं लगी तो ये उनकी मूर्खता ही कही जायेगी

मैंने 22 अप्रैल को पहली बार फेसबुक पर लिखा था कि ‘प. बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार, प. बंगाल की जनता कमल खिलाने को हुई तैयार….’ जब 23 अप्रैल को बंगाल में पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया तो मैंने 24 अप्रैल को लिखा ‘पं. बंगाल में कल संपन्न हुए प्रथम चरण के मतदान में भाजपा को भारी बढ़त’ और जब 29 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान संपन्न हुआ, तो मैंने फेसबुक पर उसी दिन लिख दिया – ‘प. बंगाल में संपन्न हुए दूसरे चरण में भी भाजपा के पक्ष में भारी मतदान, बंगाल में पहली बार बनेगी भाजपा की सरकार।

इसके पूर्व असम विधानसभा के चुनाव संपन्न हुए तो उसके बहुत दिन पहले ही मैंने लिख दिया था कि असम में भाजपा की फिर से सरकार बननी तय। ये सारी बातें आज भी मेरे फेसबुक पर देखने को मिल जायेंगे, कोई भी व्यक्ति देख सकता है। जो लोग मुझे जानते हैं या मेरी पत्रकारिता को जानते हैं। वे यह भी जानते हैं कि मैंने जो भी बातें किसी भी चुनाव के बारे में लिखी है। वो सत्य ही साबित हुई है, कभी असत्य नहीं हुई।

जब झारखण्ड में रघुवर दास के शासनकाल के दौरान 2019 में विधानसभा चुनाव हो रहे थे। तब उस वक्त सारे मीडिया हाउस जिसमें प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया दोनों शामिल थे, भविष्यवाणी कर दी थी कि रघुवर यानी भाजपा फिर से शासन में आ रहे हैं। लेकिन मैंने ताल ठोक कर कह दिया था कि रघुवर शासन का अंत होना सुनिश्चित। हेमन्त की ताजपोशी होगी, झामुमो गठबंधन को मिलेगी सफलता और हुआ भी यही। जब झारखण्ड में 2024 में विधानसभा के चुनाव हुए तो उस वक्त सारे के सारे मीडिया हाउस ने कह दिया कि हेमन्त गये। लेकिन मैंने तालठोक कर कहा कि हेमन्त की होगी फिर से वापसी और वे 55-60 सीटें जीतेंगे। हुआ भी यही।

हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी जब हमने बहुत पहले ये कहना शुरु किया कि प्रशांत किशोर वोट कटवा साबित होंगे, उन्हें एक भी सीट नहीं मिलेंगी। एनडीए गठबंधन को सफलता मिलेगी तो कोई भी हमारी बातों को मानने को तैयार नहीं था। परिणाम क्या निकला। हमारी बात सत्य हुई। एनडीए फिर से बिहार में सत्ता में आई। इसी बीच जब 2024 में महाराष्ट्र में विधानसभा का चुनाव हो रहा था और मैंने कहा कि वहां भाजपा भारी बहुमत लाने जा रही है तो लोग मानने को तैयार नहीं थे। लेकिन हुआ वहीं जो मैंने कहा।

आज असम और बंगाल में भाजपा को भारी सफलता मिली है। असम में उसकी तीसरी तो बंगाल में पहली सफलता है। अब आप कहेंगे कि आपने कैसे अनुमान लगाया कि भाजपा बंगाल में भारी मतों से जीतने जा रही है। तो मैं साफ कह देता हूं कि मैं किसी राजनीतिक दलों के भाषणबाजी या प्रिंट अथवा इलेक्ट्रानिक मीडिया का बकवास न देखता हूं और न सुनता हूं। मैं तो सिर्फ जमीन से जुड़े मतदाताओं का नब्ज टटोलता हूं और जो उनकी धड़कनें बताती है। उस धड़कन को देखकर बता देता हूं कि परिणाम क्या आने जा रहा है।

बंगाल में भाजपा के जितने के एक कारण नहीं हैं। बल्कि अनेक कारण है। पहला कारण – संघ और उनके आनुषांगिक संगठनों के बीच अच्छा तालमेल तथा इस तालमेल का बंगाल की जनता के साथ बेहतर संबंध। दूसरा कारण – ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के साथ-साथ, उनके सारे नेताओं व कार्यकर्ताओं का बंगाल में उग्रता का प्रदर्शन, जो बंगाल की जनता के बीच उनकी पार्टी के प्रति घृणा को जन्म दे रहा था। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का बंगाल के मतदाताओं के साथ दुर्व्यवहार, उन्हें मतदान करने से रोकना, अपने विरोधियों की जमकर पिटाई करना, महिलाओं के साथ बदतमीजी करना, बंगाल की जनता को रास नहीं आया। तीसरा कारण – मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा देना।

चौथा कारण – बांग्लादेश में हिन्दुओं का बड़े पैमाने पर नरसंहार का होना, महिलाओं के ऊपर क्रूरता, इस्कॉन जैसी संस्थाओं व विभिन्न मंदिरों का विध्वंस किया जाना, गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर की प्रतिमाओं को नष्ट करना जब प. बंगाल की जनता ने देखा तो उन्हें यह अच्छा नहीं लगा। प. बंगाल की जनता चाहती थी कि बांग्लादेश में हो रहे अत्याचार पर ममता बनर्जी मुखर हो। लेकिन वो इस पर एक शब्द नहीं बोली और इधर बंगाल में भी मुस्लिम बहुल इलाकों में हिन्दुओं पर जब अत्याचार होने लगे और उन्हें मुस्लिम बहुल इलाकों से बाहर किया जाने लगा, तो बंगाल की जनता ने संकल्प ले लिया कि ममता बनर्जी की सरकार को सबक सिखाना है और इसे सबक कौन सिखायेगा तब उन्हें विकल्प के रूप में भाजपा सर्वाधिक मजबूत संगठन के रूप में दिखाई पड़ा और सभी उस ओर हो लिये।

पांचवां कारण – महिलाओं में दिन-प्रतिदिन असुरक्षा की बढ़ रही भावना ने ममता बनर्जी के प्रति घृणा को और बढ़ाया। बंगाली परिवारों को लगा कि उनके घर की स्त्रियां-बालिकाएं अब ममता बनर्जी की सरकार में सुरक्षित नहीं हैं। छठा कारण – बंगाल में रोजगार का अभाव, भय का वातावरण ने आग में घी का काम किया। सातवां कारण – पिछले चुनावों में जो राजनीतिक दल के कार्यकर्ता तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के अत्याचार के शिकार हुए थे, चाहे वो वाममोर्चा के लोग हो या भाजपा के, सभी ने तृणमूल को सत्ता से हटाने के लिए एकता के सूत्र में बंधे और तृणमूल को सत्ता से बाहर कर दिया।

आठवां कारण – चूंकि बंगाल की जनता जानती थी कि अगर फिर से बंगाल में तृणमूल आ गई तो उनका अत्याचार और बढ़ेगा, गुंडागर्दी और बढ़ेंगी, फिर से तृणमूल के विरोधी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के घर जलाये जायेंगे। तो उन्होंने संकल्प लिया कि चाहे जो हो, वे इस बार नहीं डरेंगे, ऐसे भी मरना है और वैसे भी मरना है, वोट करेंगे, लोगों ने वोट किया और दूसरी ओर केन्द्र ने पूरे बंगाल में केन्द्रीय अर्द्धसैनिक बलों की टुकड़ियों को जिस प्रकार से लगाया। लोगों को लगा कि इस बार शांतिपूर्ण मतदान होंगे, लोगों ने बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया।

नवां कारण – चुनाव आयोग ने पहली बार बंगाल में शांतिपूर्वक चुनाव कराया, जिसके कारण इस बार पहली बार बंगाल के चुनावी हिंसा में एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई। चुनाव आयोग ने सफल मतदान कराने में महती भूमिका निभाई, हालांकि तृणमूल ने ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ा, जिससे चुनाव आयोग पर अंगुली उठे। लेकिन इन सब से अलग चुनाव आयोग ने वहीं किया, जो उसे करना चाहिए। दसवां कारण – विशेष गहण पुनरीक्षण यानी एसआईआर ने भी कमाल दिखाया। जो मृत मतदाता थे, जो बांग्लादेशी घुसपैठिये थे, जो रोहिंग्या थे, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया। जिससे बड़ी संख्या में जो गलत तरीके से मतदाताओं का बाढ़ आ गया था, उसे कम किया गया। जिसका परिणाम हुआ कि ममता के कुशासन का अंत हो गया।

इधर जो ममता के कट्टर समर्थक पत्रकार थे। वे मानने को तैयार ही नहीं थे, कि ममता के शासन का अंत होने जा रहा है। आश्चर्य यह भी है कि उन्हीं के माइक पर कई मतदाता बार-बार बोल रहे हैं। बहुत हो चुका, अब हम जयश्रीराम बोलेगा, देखते हैं कौन क्या कर लेता है, हमें परिवर्तन चाहिए। लेकिन ये बार-बार ममता नाम का भजन ही गा रहे थे।

उसी में एक मीडिया हाउस था- न्यूज24। न्यूज 24 का राजीव रंजन – राष्ट्र की बात, माहौल क्या है? वाली अपने चंक में ममता भक्ति में लगा हुआ था। वो ताल ठोक कर कह रहा था कि ममता राहुल गांधी नहीं हैं, ममता बनर्जी अखिलेश यादव नहीं, ममता बनर्जी उसी स्तर पर भाजपा से जाकर लड़ने का मादा रखती है, जो मादा भाजपा रखती है, भाजपा जो व्यूह रच रही है। वो कह रहा था कि ये बात ख्याल रखियेगा, ममता बनर्जी केवल हेलीकॉप्टर से ही रैली नहीं करती, उनके बूथ-बूथ पर घर-घर की मैपिंग, उनके कार्यकर्ताओं ने कर रखी है, जो भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है।

इस मूर्ख पत्रकार को घमंड था कि दुनिया की सारी बुद्धि उसी के दिमाग में घुस गई है। उसने यह भी कहा जो बांग्ला बोलनेवाले लोग हैं उसमें 90 प्रतिशत लोगों ने दीदी का समर्थन किया, उनकी योजनाओं का लाभ लेनेवालों ने दीदी का समर्थन किया, लेकिन जो हिन्दी भाषी थे, उनका भाजपा की ओर ज्यादा झुकाव था। मतलब ये हिन्दी और बांग्ला भाषियों में भी विवाद उत्पन्न कर रहा था। इसका कहना था कि महिला और मुस्लिम पर ममता बनर्जी का पूरा प्रभाव है। अरे भाई, जब तुम्हारी नजरों में इतना ही प्रभाव था तो आज ममता बनर्जी का ये हाल क्यों हो गया?

एक एग्जिट पोल कराने वाले महाशय संभवतः प्रदीप गुप्ता एक्सिस पोल करवाते हैं। उन्होंने माइलेज लेने की कोशिश की कि किसी ने बताया ही नहीं कि उसने किसको वोट दिया, इसलिए वे एग्जिट पोल नहीं कर पाये। यानी आपकी बुद्धि ध्वस्त हो गई तो आपने मतदाताओं पर तोहमत लगा दिये। अरे बंगाल की जनता कब से कायर हो गई, भाई और जब कायर होती तो फिर इतनी बड़ी संख्या में वोट कैसे देने निकल गई? या जो उनके परिवार के लोग बाहर रहते थे, उन्हें बाहर से बुलवाकर भाजपा के पक्ष में मतदान कैसे करवा दिया।

यानी अपनी मूर्खता को विद्वता का रूप न दें, ऐसे भी जनता जान गई है कि गोदी मीडिया कहते-कहते आपलोग भी कही ममता मीडिया तो कही राहुल मीडिया तो कही वाम मीडिया तो कही सपाई मीडिया हो गये हैं। फिलहाल सच्चाई यही है कि बंगाल को भाजपा ने फतह कर लिया है। जनता ने आशीर्वाद दे दिया है। जनता ने कह दिया है कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी का ये इलाका, आपका है, आप सुशासन दीजिये।

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