राजनीति

दलित युवक संजू प्रधान को जिंदा जलाने की घटना से आहत भाजपाइयों ने राजभवन का दरवाजा खटखटाया, हेमन्त सरकार की शिकायत के साथ-साथ सीबीआई जांच की मांग उठाई

सिमडेगा के कोलेबिरा थाना के बेसराजारा गाँव के दलित युवक संजू प्रधान को जिन्दा जलाकर मारने की घटना पर भारतीय जनता पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात कर पूरे मामले की CBI जाँच कराने, दोषियों को दण्डित करने, परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा, सरकारी नौकरी एवं सुरक्षा मुहैया कराने की गुहार लगाई है।

भाजपा ने कहा कि गत 4 जनवरी 2022 को सिमडेगा जिला अन्तर्गत कोलेबिरा थाना के बेसराजारा गाँव में घटित एक हृदय विदारक घटना से सभी काफी दुःखी एवं विचलित हैं। कोलेबिरा थाना के बेसराजारा गाँव के रहने वाले संजू प्रधान को आस-पास के रहनेवाले ग्रामीणों की उग्र भीड़ (जिसमें 500 से अधिक लोग थे) ने पीट-पीटकर अधमरा कर दिया एवं पास में ही जलावन के लिए रखी हुई लकड़ी में आग लगाकर उसे जिन्दा जला दिया। इस घटना की पूरे झारखण्ड में भर्त्सना की गई एवं तत्संबंधित समाचार राज्य के सभी प्रमुख अखबारों में प्रकाशित भी हुआ।

भारतीय जनता पार्टी ने इस शर्मनाक घटना के प्रति गंभीर चिंता व्यक्त की है। घटना की गंभीरता एवं पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने हेतु एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने घटना स्थल का दौरा किया, जिसमें विधायक दल के नेता सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, राष्ट्रीय मंत्री सह महापौर डॉ. आशा लकड़ा, अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद समीर उरांव, प्रदेश उपाध्यक्ष गंगोत्री कुजूर सहित पार्टी के स्थानीय वरिष्ठ नेतागण शामिल थे। भाजपा प्रतिनिधिमंडल एवं दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के घटना स्थल पहुंचने पर मृतक संजू प्रधान के परिजनों उनकी पत्नी, मां एवं स्थानीय ग्रामीणों से मिलकर घटना के संबंध में जो जानकारी प्राप्त हुई वह इस प्रकार है :

दिनांक 28-12-2021 को कोलेबिरा के स्थानीय विधायक ने बंबलकेरा गांव में खूंटकटी स्थापना दिवस मनाने के नाम पर आयोजित सभा में लोगों को भड़काया था। जिसकी परिणति सुनियोजित साजिश के रूप में संजू प्रधान की हत्या के रूप में सामने आया। बताया गया कि संजू प्रधान, के बेसराजारा स्थित घर के सामने हाट लगता है वहाँ गौ-माँस की खूलेआम बिक्री होती है, जिसका विरोध ये किया करते थे, इस वजह से दूसरे समुदाय के लोग इन पर काफी कुपित रहते थे।

यह बताया गया कि 4 जनवरी, 2022 (मंगलवार) को बम्बलकेरा ग्राम में ग्राम प्रधान सुबन बुद्ध की अध्यक्षता में ग्राम सभा का आयोजन करने के बाद इनके नेतृत्व में 500 से अधिक लोगों की भीड़ दोपहर लगभग 1.30 बजे घर में पहुंचा और गौर करने वाली बात है कि ग्राम सभा के पश्चात भीड़ के साथ ठेठईटॉगर पुलिस दल भी बेसराजरा में पहुंची थी।

पुलिस के सामने में ग्राम प्रधान सुबन बुद्ध ने संजू प्रधान को हाथ पकड़कर घसीटते हुए भीड़ में ले गया और पत्थर / लाठी-डंडे से पीटकर अधमरा कर दिया। इतना ही नहीं पास में रखे जलावन की लकड़ी का चिता बनाकर जिन्दा आग में डालकर मार दिया। मृतक की पत्नी सपना देवी एवं माँ जब संजू की जान बचाने के लिए हाथ जोड़ने लगी तो इन्हें भी धकेलकर एवं मारपीट कर भगा दिया।

इन लोगों का कहना है कि घटनास्थल पर मौजूद ठेठईटॉगर थाना पुलिस के सामने लाख आरजू मिन्नतें एवं पैर पकड़ कर बचाने की गुहार लगाने के बावजूद पुलिस ने भीड़ पर कोई कार्रवाई नहीं की। यहाँ तक कि पुलिस मुकदर्शक बनकर घटना का Video बनाते रही। पुलिस की मानवीय संवेदनशीलता एवं संवैधानिक कर्तव्यबोध भी नहीं दिखा।

उसी दिन कोलेबिरा थाना के पुलिस पदाधिकारी ने बिना कुछ लिखे व बताए मृतक की पत्नी सपना देवी से तीन सादा कागज पर हस्ताक्षर करा लिए। चूँकि इस समय मृतक की पत्नी की मानसिक हालात सामान्य नहीं थी, इस वजह से इन्होंने पुलिस के दबाव में हस्ताक्षर भी कर दिया। पीड़ित परिवार का कहना है कि यह घटना सुनियोजित थी और इसमें कई प्रमुख लोगों की संलिप्तता भी हैं।

दिनांक 7 जनवरी, 2022 को मृतक की पत्नी सपना देवी ने थाना प्रभारी कोलेबिरा (सिमडेगा) को आवेदन देकर इस घटना के जिम्मेवार दोषी व्यक्तियों के नाम सुबन बुढ़, नेल्सन बुढ़, सुलेमान मुण्डा, सुरसेन मुण्डु, विश्राम बुढ़, जिलन लुगुन, उदय समद, जोलेन बुढ़, मारसेल मुण्डा सहित अज्ञात 500 व्यक्तियों को नामजद आरोपी बनाया है। थाना में किए गए FIR की छायाप्रति संलग्न है।

जिसमें विस्तार से उक्त घटना की जानकारी दी गई है। लेकिन अभी तक नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई है, उल्टे ही पुलिस ने पीड़िता सपना देवी के चचेरे ससुर श्री लोढ़े प्रधान, नरपति प्रधान एवं महेश्वर प्रधान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पीड़िता का कहना है कि ये तीनों न ग्राम सभा में गए थे और न ही घटना के समय भीड़ में उपस्थित थे। जानबुझकर पुलिस मामले को दूसरे तरफ मोड़ना चाह रही है।

इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद जिला उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक (SP) दूसरे दिन घटना स्थल पर पहुंचे। इससे साफ प्रतीत होता है कि सिमडेगा प्रशासन इस मामले को हल्के में लेकर दबाना और जाँच की दिशा को दूसरे तरफ मोड़ना चाहती है। इस पूरी घटना के लिए सिमडेगा पुलिस अधीक्षक एवं थाना प्रभारी कोलेबिरा व ठेठईटॉगर जिम्मेवार हैं एवं कई सफेदपोश लोगों की संलिप्तता होने की संभावना लगती है। यदि पुलिस प्रशासन सचेत रहती तो इतनी बड़ी घटना को टाला जा सकता था।

घटना की पूरी जानकारी लेने पर यह प्रतीत होता है कि दलित युवक संजू प्रधान की हत्या का मुख्य कारण है कि इनके द्वारा उस क्षेत्र में प्रतिबंधित गौ-माँस की बिक्री का विरोध किया जाता था जिसके कारण संजू प्रधान एक समुदाय के लोगों की आँखों की किरकिरी बने हुए थे। परिणामस्वरूप इनकी हत्या कर दी गई।अतएव हम सभी आपसे आग्रह करते हैं कि इस दर्दनाक घटना की केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जाँच कराने का समुचित निर्देश राज्य सरकार को देने की कृपा करेंगे ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिले एवं हत्यारों को कड़ी सजा मिल सके और लोगों का कानून पर भरोसा कायम रहे। साथ ही पीड़ित परिवार को राहत के तौर पर तत्काल 10 लाख रूपये, सरकारी नौकरी और परिवार को पूरी सुरक्षा मुहैया कराने हेतु निर्देशित करने की कृपा की जाये।