सरयू राय का एक और धमाका, खनन विभाग में 36 सौ करोड़ का घोटाला

संसदीय कार्य मंत्री सरयू राय ने कल चाईबासा परिसदन में पत्रकारों से वार्ता के क्रम में बताया कि अकेले पश्चिम सिंहभूम में राज्य सरकार को 36 सौ करोड़ का चूना लगा दिया गया है। आश्चर्य इस बात की है, कि इतने बड़े घोटाले पर कार्रवाई छोड़ दीजिये, जांच तक कराने की भी किसी ने जहमत नहीं उठाई। उनका कहना था कि राज्य सरकार को चाहिए कि वह इस मामले की जांच कराए और दोषी खनन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

संसदीय कार्य मंत्री सरयू राय ने कल चाईबासा परिसदन में पत्रकारों से वार्ता के क्रम में बताया कि अकेले पश्चिम सिंहभूम में राज्य सरकार को 36 सौ करोड़ का चूना लगा दिया गया है। आश्चर्य इस बात की है, कि इतने बड़े घोटाले पर कार्रवाई छोड़ दीजिये, जांच तक कराने की भी किसी ने जहमत नहीं उठाई। उनका कहना था कि राज्य सरकार को चाहिए कि वह इस मामले की जांच कराए और दोषी खनन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

सरयू राय का कहना था कि खनन मामले में शाह कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय ने एक आदेश जारी किया था। इसी आदेश पर उस समय के तत्कालीन जिला खनन पदाधिकारी ने खनन कंपनियों पर 63 सौ करोड़ की पेनाल्टी लगाई थी, लेकिन उसके बाद के जिला खनन पदाधिकारी ने उसे घटाकर 27 सौ करोड़ में कन्वर्ट कर दिया, जिससे राज्य को सीधे-सीधे 36 सौ करोड़ का घाटा हो गया।

सरयू राय ने संवाददाताओं को बताया कि जिस हिसाब से तत्कालीन जिला खनन पदाधिकारी ने सीमा से अधिक खनन का आरोप लगाते हुए कंपनियों के खिलाफ 63 सौ करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगाकर एक रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी थी, बाद वाले जिला खनन पदाधिकारी ने गलत तरीके से उस पेनाल्टी को घटाकर 27 सौ करोड़ कर दिया।

सरयू राय ने यह भी कहा कि एक जिला खनन पदाधिकारी ने पहले के रेट और खनन करनेवाले क्षेत्र को प्राथमिकता दी, और दूसरे ने किसकी मिलीभगत से रेट घटाया, ये जांच का विषय है। वे कौन लोग है, जिन्होने सरकार के खजाने में जानेवाले 36 सौ करोड़ पर रोक लगा दी। वर्ष 2013 में शाह कमीशन की रिपोर्ट के बाद तत्कालीन जिला खनन पदाधिकारी अजीत कुमार ने 63 सौ करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जबकि वर्तमान जिला खनन पदाधिकारी कमलेश्वरी दास ने इस राशि को घटाकर 27 सौ करोड़ कर दी।

अगर जिला खनन पदाधिकारी कमलेश्वरी दास की बात करें तो वे कहते है कि इंडियन ब्यूरो आफ माइन्स की गाइड लाइन पर स्वयं उन्होंने ऐसा फैसला लिया, जबकि सरयू राय के अनुसार ऐसा करने का अधिकार सिर्फ विभागीय मंत्री को है, जबकि खनन मंत्रालय विभाग मुख्यमंत्री रघुवर दास के पास है। ऐसे में क्या सरयू राय के उठाये इस सवाल पर रघुवर दास इस पूरे मामले की जांच करायेंगे?  हमें तो दूर-दूर तक ऐसा नहीं दीखता। इधर देखने में आ रहा है कि जैसे-जैसे विधानसभा के शीतकालीन सत्र का समय नजदीक आता जा रहा है, पहले राजबाला वर्मा प्रकरण और अब ये खनन घोटाला की धमक, रघुवर सरकार की सेहत के लिए ठीक नहीं लगता, आनेवाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र का दृश्य कैसा होगा?  वह अभी से ही दिखने लगा है।

Krishna Bihari Mishra

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Sat Jan 6 , 2018
संसदीय कार्य मंत्री सरयू राय, जो नित्य नये धमाके करने के लिए जाने जाते हैं, जो खुलकर मुख्य सचिव राजबाला वर्मा और प. सिंहभूम के जिला खनन पदाधिकारी को कटघरे में रख रहे हैं। उन्हें मुख्यमंत्री रघुवर दास से भी यह पूछना चाहिए कि जिस अधिकारी ने अपने उपर के मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी की बात नहीं मानी, उनके द्वारा मांगे गये स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिया।

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