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ZKTOR का नो-URL मॉडल, डेटा स्क्रैपिंग और डीपफेक के जोखिम घटाने पर जोर, कंपनी के अनुसार दस महीने के सार्वजनिक बीटा में दस लाख से अधिक उपयोगकर्ता

नई दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में सॉफ्टा टेक्नोलॉजीज के संस्थापक सुनील कुमार सिंह ने सोशल सुपर-ऐप ZKTOR में तस्वीर और वीडियो देखने की अनुमति को उनके अनियंत्रित वितरण से अलग रखने वाला नो-URL मीडिया आर्किटेक्चर को सभी के समक्ष प्रस्तुत किया। इस दौरान लाइव तकनीकी प्रदर्शन के दौरान श्री सिंह ने बताया कि भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में दस महीने के मास पब्लिक बीटा में दस लाख से अधिक लोग जुड़े हैं। कंपनी ने भूटान और मालदीव में भी देश-आधारित परीक्षण अपनी ओर से बढ़ाई है।

कंपनी का कहना है कि, प्राइवेसी एंड डेटा सेफ्टी बाई डिजाइन के तहत संरक्षित मीडिया के सामान्य एवं पुनः इस्तेमाल होने वाले सार्वजनिक फाइल लिंक नहीं बनाए जा रहे। हर डिलीवरी पर रिक्वेस्ट ऑथराइजेशन चेक उपयोगकर्ता की चुनी ऑडियंस के अनुसार अनुमति जाँचता है। तकनीकी संदर्भ मिल जाने पर भी अनधिकृत अनुरोध खारिज होता है। इस एड्रेस और अथॉरिटी के अलगाव में सुरक्षा सिर्फ स्क्रीन की सेटिंग नहीं, सर्वर से फाइल देने की शर्त है।

कंपनी का यह भी कहना है कि इसका उद्देश्य ऑटोमेटेड बॉट्स की अनधिकृत डेटा स्क्रैपिंग और इमेज एक्सट्रैक्शन सीमित कर डीपफेक, सिंथेटिक मीडिया के दुरुपयोग और प्रतिरूपण का जोखिम घटाना है। यह स्क्रीनशॉट, स्क्रीन रिकॉर्डिंग, बाहरी कैमरे या अधिकृत प्राप्तकर्ता द्वारा नकल रोकने की गारंटी नहीं है। वयस्कों की पोस्ट में दिखने वाले बच्चों, जिनका अपना खाता नहीं है, की तस्वीरें भी उन्हीं मीडिया-सुरक्षा सीमाओं में आती हैं।

सॉफ्टा के कथनानुसार, डेटा संप्रभुता के लिए प्रत्येक देश में अलग सर्वर, एन्क्रिप्शन बाउंड्री, रोटेटिंग कीज़ और एक्सेस कंट्रोल के साथ स्थानीय बैकअप तथा डिजास्टर रिकवरी रखी गई है। कंपनी इस देश-आधारित डेटा पृथक्करण को भारत के DPDP ढाँचे और यूरोपीय GDPR को ध्यान में रखकर तैयार मॉडल बताती है।

कंपनी ने जवाबदेही के लिए देश-आधारित शिकायत अधिकारियों और महिलाएं एंड बाल शाखा की व्यवस्था बनाई है। इसमें सीमित केस एक्सेस, स्थानीय भाषाओं में मानवीय समीक्षा, कारण सहित निर्णय, स्पष्ट सूचना, एस्केलेशन और औपचारिक अपील शामिल हैं। शिकायत के लिए सार्वजनिक URL नहीं, सुरक्षित आंतरिक प्रोटेक्टेड कंटेंट रेफरेंस इस्तेमाल होता है। VDL प्रोटेक्टिव एआई यौन सामग्री, प्रतिरूपण और बाल-सुरक्षा जोखिमों को समीक्षा के लिए चिह्नित करता है। कंपनी के कथनानुसार इसका काम प्रोफाइलिंग या विज्ञापनदाताओं को निजी डेटा देना नहीं है।

फेसबुक और इंस्टाग्राम के विकल्प के रूप में पेश ZKTOR में समाचार, पोस्ट, शॉर्ट क्लिप्स, लॉन्ग-फॉर्म वीडियो चैनल, पेज, क्लब और एन्क्रिप्टेड वॉयस-वीडियो कॉल आदि भी शामिल हैं। कंपनी इसे प्रोफाइलिंग, बिहेवियरल ट्रैकिंग और पुश्ड-एल्गोरिदम से मुक्त, उपयोगकर्ता-नियंत्रित फीड वाला मंच बता रही है। लोकल डिजिटल वर्ल्ड्स चुनी भाषा, जिले और समुदाय के आधार पर हाइपरलोकल जुड़ाव देत रहे हैं। लक्ष्य ग्रामीण भारत, युवाओं और जेन ज़ी की भागीदारी तथा प्रवासियों को उनकी आवाजाही ट्रैक किए बिना अपने क्षेत्र से जोड़ कर रखना है।

कंपनी ने बताया कि अगले चरण की पहल SNDESH को स्वतंत्र और ZKTOR से जुड़े मैसेंजर के रूप में विकसित किया जाना है। इसके घोषित जीरो-नॉलेज सर्वर मॉडल में डिवाइस-टू-डिवाइस एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, मैसेज-लेवल कीज़ और रोटेटिंग सर्वर-साइड सुरक्षा शामिल हैं। निजी बातचीत को विज्ञापन प्रोफाइलिंग और फीड रैंकिंग से अलग रखने का उद्देश्य भी रखा गया है।

KHOZU.com को एविडेंस-फर्स्ट सर्च और एआई-असिस्टेड डिस्कवरी पहल के रूप में प्रस्तुत है। इसका घोषित मॉडल प्रोफाइलिंग या संरक्षित मीडिया उजागर किए बिना जाँच योग्य स्रोतों, संदर्भ और स्पष्ट सुधारों के जरिए जानकारी की विश्वसनीयता बढ़ाने पर केंद्रित किया गया है।

इसी साझा इंजीनियरिंग में ZHAN विषय, भाषा और स्थानीयता के आधार पर संदर्भानुकूल विज्ञापन जोड़ता है, व्यवहार का डिजिटल डोजियर बनाकर नहीं। HOLA AI बहुभाषी सहायता, EZOWM स्थानीय वाणिज्य और ZWATO कारोबारी प्रशासन के लिए हैं। कंपनी ने क्रिएटर कार्यक्रम में संबंधित कंटेंट से होने वाली आय का 70 प्रतिशत हिस्सा क्रिएटर्स को देने की व्यवस्था बताई है। स्थानीय व्यवसायों और रचनाकारों की कमाई को बढ़ाना इस आर्थिक विकेंद्रीकरण का लक्ष्य है।

फिनिश नागरिक के अनुसार, फिनलैंड की गोपनीयता संस्कृति में दो दशक से अधिक के अनुभव और भारत-केंद्रित 12 वर्षों के शोध ने ग्रामीण जरूरतों को इस मॉडल से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि विकास के लिए बाहरी वेंचर कैपिटल, बड़े कारोबारी घरानों का निवेश या भारत, फिनलैंड और यूरोपीय संघ के सरकारी अनुदान नहीं लिए गए, ताकि तकनीक और डेटा-उपयोग संबंधी निर्णय स्वतंत्र रहें।

सुनील कुमार सिंह भारतीय विकास केंद्रों, फिनलैंड मुख्यालय और शिकागो रिसर्च गेटवे को जोड़ने वाली व्यवस्था को इसरो से प्रेरित फ्रूगल इंजीनियरिंग, यानी कम संसाधनों में सटीक इंजीनियरिंग बताते हैं। उनके मुताबिक, महिलाओं का दृश्यता का अधिकार, यानी राइट टू बी विजिबल, तस्वीरों के अनियंत्रित वितरण की अनुमति नहीं बनना चाहिए। कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और गरिमा के साथ ऑनलाइन भागीदारी, कंटेंट निर्माण और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बरकरार रखना है, ताकि वैश्विक पहुँच के बावजूद जवाबदेही स्थानीय और स्पष्ट रहे।

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