योगदा सत्संग मठ आप आध्यात्मिक उन्नति के लिए आते हैं, याद रखें कि ग्रूप मेडिटेशन का कोई विकल्प नहीं होता, इसका लाभ हमेशा उठाएं – ब्रह्मचारी अतुलानन्द

आखिर आप योगदा सत्संग मठ हमेशा क्यों आते हैं? यह सवाल था – ब्रह्मचारी अतुलानन्द का, योगदा सत्संग के साप्ताहिक सत्संग में भाग ले रहे योगदा भक्तों से। कई योगदा भक्तों ने अपने-अपने ढंग से ब्रह्मचारी अतुलानन्द को संतुष्ट करने का प्रयास किया। लेकिन ब्रह्मचारी अतुलानन्द ने जो उत्तर दिया, उस उत्तर से सभी संतुष्ट हो गये। उत्तर था – उत्तरोत्तर आध्यात्मिक उन्नति के लिये। उन्होंने यह भी कहा कि इस आध्यात्मिक उन्नति में हम सिर्फ ईश्वर को ढुंढने का प्रयास करते हैं, लेकिन अगर हम सामूहिक रुप से ईश्वर को ढुंढने का प्रयास करें, तो हमें ईश्वर को प्राप्त करने में आसानी होगी।

ब्रह्मचारी अतुलानन्द ने कहा कि हमलोग सभी यात्रा पर है। यह यात्रा कब समाप्त हो जायेगी, कहा नहीं जा सकता। बिजली कभी भी किसी पर गिर सकती है और प्राणान्त हो सकता है, इसलिए यात्रा समाप्त हो, उसके पूर्व हमें अपनी आध्यात्मिक उन्नति की ओर ध्यान देना हैं, तथा ईश्वर को प्राप्त करने का प्रयास करना है। सफलता मिल गई तो आनन्द का विषय है, अगर नहीं भी मिली तो यह प्रयास छोड़ना नहीं है।

उन्होंने सभी को कहा कि ईश्वर को ढुंढने में ज्यादा समय लगाइये। मन को हमेशा ईश्वर और गुरु के प्रति लगायें। कोई भी काम करें, तो उस काम को भी ईश्वर को समर्पित करके करें, इससे आपका काम कर्मयोग में परिवर्तित हो जायेगा। जिसका लाभ आपको आध्यात्मिक उन्नति के रुप में मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमेशा स्वयं को शांत रखें। जितना कम बोलेंगे, उतना ही ध्यान में ज्यादा मन लगेगा।

उन्होंने कहा कि मन में सदैव ईश्वर और गुरु को स्थापित करें और उनसे बात करते रहे। उनसे कोई बात न छुपाएं, हर बातों को शेयर करें। जब ईश्वर से बात करें तो उस दौरान अपने गुरु को ज्यादा नजदीक लायें, क्योंकि ऐसे समय जब गुरु आपके पास होंगे तो सफलता सुनिश्चित हो जायेगी। हमेशा इसके लिए प्रयासरत रहे, क्योंकि लाहिड़ी महाशय हमेशा कहा करते थे कि बनत-बनत बन जाई।

उन्होंने इस दौरान 2018 में थाइलैंड के मायसोई टाउन के थामलौंग केव कॉम्पलेक्स में घटित घटना का एक सुंदर दृष्टांत दिया कि कैसे उस अंधेरी गुफा में, जहां ऑक्सीजन तक नही था, वहां नौ दिनों तक रहने के बावजूद लोग अपने जीवन को बचाने में सफल रहे। यह दृष्टांत काफी रोचक था। जो यह बताने के लिए काफी था कि ध्यान हमारे जीवन में कितना महत्वपूर्ण रोल निभाता है।

ब्रह्मचारी अतुलानन्द ने बताया कि उस घटना में जो भी लोग बचे, वो सामूहिक ध्यान के कारण ही बच गये। अगर वे सामूहिक ध्यान का सहारा नहीं लेते तो उनका बचना असंभव था। इस दृष्टांत के माध्यम से ब्रह्मचारी अतुलानन्द ने सामूहिक ध्यान की विशेषता योगदा भक्तों को बता दी। उन्होंने कहा कि ग्रूप मेडिटेशन करने से आध्यात्मिक उन्नति ज्यादा होती है। यह आपको कभी फेल होने नहीं देता। उन्होंने कहा कि जब भी आपको ग्रूप मेडिटेशन का मौका मिले तो इस मौके को हाथ से जाया होने मत दीजिये।

उन्होंने इस दौरान परमहंस योगानन्द व दया माता के बीच हुए संवाद का एक जिक्र किया। दया माता हमेशा ध्यान किया करती और जल्द ही गहरे ध्यान में चली जाती। एक बार वो जब ध्यान केन्द्र में ग्रूप मेडिटेशन के लिए गई तो जो ध्यान करानेवाले व्यक्ति थे। उनका लेक्चर दया माता को अच्छा नहीं लगा, वो उस लेक्चर से बोर हो गई। ऐसे में दया माता ध्यान केन्द्र में न जाकर, अकेली ही ध्यानस्थ होने लगी।

जब उन्होंने परमहंस योगानन्द जी से कहा कि वो ध्यान केन्द्र इसलिये नहीं जाती, क्योंकि जो ध्यान कराते हैं, उनकी बातें बोरिंग लगती है। तो परमहंस योगानन्द जी ने उनसे कहा था कि आप वहां उस व्यक्ति विशेष के लिए नहीं जाती, आप अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिए जाती है। इसलिए आप अपनी आध्यात्मिक उन्नति पर ध्यान दें, न कि व्यक्ति विशेष पर।

इस घटना के माध्यम से बड़ी ही सहजता से ब्रह्मचारी अतुलानन्द ने स्पष्ट कर दिया कि हो सकता है कि आप जहां ग्रूप मेडिटेशन के लिये जा रहे हो, वहां के किसी व्यक्ति का चेहरा आपको पसन्द नहीं आये या उसकी बातें अच्छी नहीं लगे। आपको इन सभी फिजूल बातों पर ध्यान नहीं देना है। आपको सिर्फ इस पर ध्यान देना है कि आपको ग्रूप मेडिटेशन करना है, जिसके अनेक फायदे हैं।

उन्होंने कहा कि हमारा लॉजिक किसी काम का नहीं, लेकिन गुरुजी का लॉजिक हमेशा सही होता है। हमेशा ध्यान मंडली में ग्रूप मेडिटेशन करें। आपका बहुत सारा प्राब्लम ऐसे ही हल हो जायेगा। उन्होंने कहा कि हमेशा याद रखें कि ग्रूप मेडिटेशन का कोई विकल्प नहीं।

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