कार्यकर्ताओं में आयी निराशा ने नगर निकाय चुनाव में भाजपा की जीत पर लगाया प्रश्न चिह्न

रांची भाजपा प्रदेश कार्यालय में भाजपा के वरीय पदाधिकारियों की विशेष बैठक आज संपन्न हो गई। बैठक में मुख्यमंत्री रघुवर दास विशेष रुप से शामिल हुए। चूंकि राज्य में पहली बार दलीय आधार पर नगर निकायों के मेयर-डिप्टी मेयर, अध्यक्ष-उपाध्यक्ष  के चुनाव हो रहे हैं, उसमें भाजपा के उम्मीदवारों की जीत कैसे सुनिश्चित हो? इसको लेकर माथापच्ची हुई। भाजपाइयों के इस माथापच्ची में यह बात खुलकर सामने आया।

रांची भाजपा प्रदेश कार्यालय में भाजपा के वरीय पदाधिकारियों की विशेष बैठक आज संपन्न हो गई। बैठक में मुख्यमंत्री रघुवर दास विशेष रुप से शामिल हुए। चूंकि राज्य में पहली बार दलीय आधार पर नगर निकायों के मेयर-डिप्टी मेयर, अध्यक्ष-उपाध्यक्ष  के चुनाव हो रहे हैं, उसमें भाजपा के उम्मीदवारों की जीत कैसे सुनिश्चित हो? इसको लेकर माथापच्ची हुई। भाजपाइयों के इस माथापच्ची में यह बात खुलकर सामने आया कि इस चुनाव को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश-उमंग-उत्साह का अभाव हैं, जबकि अन्य दल इस चुनाव को प्रतिष्ठा का विषय बनाकर, जीत की रणनीति बनाने में जुट गये हैं।

भाजपा नेताओं ने स्वीकार किया कि पूरे प्रदेश में हालांकि उम्मीदवारों की घोषणा कर दी गई हैं, पर उनकी जीत को लेकर शंकाएं बरकरार हैं, आश्चर्य इस बात की है कि संगठन मजबूत होने के बावजूद कोई नेता यह कहने सकने की स्थिति में भी नहीं कि रांची के मेयर और डिप्टी मेयर पद की सीट वे जीत ही लेंगे। पिछले कई सालों तक मेयर और डिप्टी मेयर का आपस में भिड़ना तथा स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा कई स्थानों पर इनका क्लास लेना स्वयं ही बता देता है कि आनेवाले समय में आम जनता जब वोट देने जायेगी तो उनका भाजपा के मेयर और डिप्टी मेयर के उम्मीदवारों की तरफ सोच क्या होगा?

भाजपा में कई ऐसे भी कार्यकर्ता है, जो विभिन्न वार्डों में पार्षद उम्मीदवार के रुप में किस्मत आजमा रहे हैं, या वे अपनी पत्नी या परिवार के सदस्य को पार्षद का चुनाव लड़वा रहे हैं या अपने चाहनेवालों को खड़ाकर, उनका मनोबल बढ़ाने में लगे हैं, ऐसे में उनके पास समय ही नहीं कि मेयर या डिप्टी मेयर के लिए कुछ कर सकें, इस  हालात में भाजपा के लिए विभिन्न नगरों के मेयर-डिप्टी मेयर तथा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पद पर खड़े अपने उम्मीदवारों की जीत दिलाना आसां नहीं। कई जगहों पर तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा का टिकट ही ठुकरा दिया, जबकि कई जगहों पर प्रत्याशी बाहर से थोप दिये जाने के कारण भाजपा की जीत पर ही प्रश्न चिह्न लग गये हैं। नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं को मनाना इतना आसान भी नहीं। कई जगहों पर तो नारा भी लगे, कि मोदी जी से वैर नहीं और प्रदेश के नेताओं की खैर नहीं।

हालांकि भाजपा नेताओं ने आज प्रदेश कार्यालय में खुलकर चर्चाएं की, अपने उम्मीदवारों को जीताने के लिए अनेकानेक टिप्स लिये और दिये, पर उन्हें भी इतना जरुर विश्वास हो गया कि सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा, भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस चुनाव में अपनी सहभागिता एक तरह से सीमित कर ली है, अगर ऐसा चुनाव तक रह गया तो भाजपा के लिए एक-एक सीट निकालना मुश्किल हो जायेगा, जो संकेत होगा, भाजपा के 2019 लोकसभा-विधानसभा चुनाव में झारखण्ड से विदाई का…

Krishna Bihari Mishra

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सावधान! इस रास्ते में मस्जिद हैं, आप इस रास्ते से कलश यात्रा नहीं निकाल सकते...

Wed Mar 28 , 2018
मुख्यमंत्री रघुवर दास को यह बताना चाहिए और उन्हें बताना ही होगा कि क्या भारत एक इस्लामिक देश बन गया है या धर्मनिरपेक्ष देश है? क्या भारत के संविधान में यह लिखा है कि जिस गली या सड़क पर मस्जिद होगा, उस रास्ते से कोई अन्य धर्म (इस्लाम छोड़कर) के लोग धार्मिक जुलूस लेकर, उधर से नहीं निकल सकते? क्या सिर्फ इस्लाम धर्म के माननेवाले जिधर से चाहे, उधर से अपनी धार्मिक जुलूस को ले जा सकते हैं, पर उनका कोई विरोध नहीं कर सकता?

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