स्थानान्तरण का आनन्द केवल तीरंदाज दीपिका की बहन विद्या को ही क्यों मिलें और को भी ऐसा आनन्द क्यों नहीं, मुख्यमंत्री जी?

मुख्यमंत्री सचिवालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। प्रेस विज्ञप्ति संख्या है – 400/2021, जिसे झारखण्ड मंत्रालय डेडलाइन से जारी किया गया है। जिसमें बताया गया है कि “मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से झारखंड मंत्रालय में आज अंतर्राष्ट्रीय तीरंदाजी खिलाड़ी दीपिका कुमारी की बहन विद्या कुमारी ने मुलाकात की। विद्या कुमारी ने मुख्यमंत्री के समक्ष कहा कि वे वर्तमान में असम राइफल मणिपुर में कार्यरत हैं।

विद्या कुमारी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि उनका सेवा झारखंड में स्थानांतरित करने को लेकर राज्य सरकार पहल करे। मुख्यमंत्री ने विद्या कुमारी को आश्वस्त किया कि असम राइफल मणिपुर से उनकी सेवा झारखंड की जाए इसके लिए राज्य सरकार भारत सरकार को पत्र लिखेगी तथा गृह मंत्रालय, भारत सरकार के साथ भी समन्वय स्थापित कर सेवा झारखंड में किए जाने की सिफारिश करेगी। मौके पर मुख्यमंत्री के सचिव श्री विनय कुमार चौबे एवं विद्या कुमारी के परिजन उपस्थित थे”।

अब सवाल उठता है कि क्या राज्य सरकार को ये अधिकार है कि किसी भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के पारिवारिक सदस्यों को उनकी लोकप्रियता या खेल के आधार पर अनुकम्पा प्रदान करती रहे? आखिर किसी भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के कितने पारिवारिक सदस्यों को सरकार ऐसी अनुकम्पा प्रदान करती रहेगी? क्या सरकार ने दीपिका की बहन विद्या को ये आश्वासन देते समय की वे उसका स्थानान्तरण झारखण्ड करवा देंगे, इन बातों पर ध्यान दिया?

आखिर ये सुविधा विद्या को ही सिर्फ क्यों मिले? बाकी लोगों ने सरकार का क्या बिगाड़ा है कि उनके बेटे/बेटियां सीमा पर देश के लिए जान गवाएं या सुरक्षा में लगी रहे, उन्हें भी तो विद्या की तरह सुरक्षा का प्रावधान होना ही चाहिए, उन्हें भी झारखण्ड लौटाने का ईमानदार प्रयास हेमन्त सोरेन को करना ही चाहिए और अगर नहीं करते, तो यही माना जायेगा कि उन्होंने अपने पद की गरिमा नहीं रखी।

हद हो गई,  पहली बार देख रहा हूं कि एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का परिवार खेल या खेल को और बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार से सहयोग नहीं मांग रहा और न राज्य सरकार ऐसा करने में सहयोग कर रही है, बल्कि उसकी मांग है कि चूंकि उसकी बहन अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज हैं, इसलिए इस आधार पर उसे भी कुछ न कुछ तो प्राप्त होना ही चाहिए और कुछ नहीं तो स्थानान्तरण ही सही।

राजनीतिक पंडितों की मानें तो सरकार का सहयोग करने का आश्वासन ही मुख्यमंत्री पद की गरिमा को प्रभावित करता है। भाई स्थानान्तरण और बेहतरी का मजा केवल दीपिका की बहन ही क्यों लें और लोग क्यों नहीं, जो झारखण्ड से ही हैं और बार्डर पर देश की सेवा/सुरक्षा में लगे हैं। आश्चर्य तो तब और होता है कि जहां ऐसी बात हो रही हैं, वहां मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे एक भारतीय प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारी भी बैठे हैं।

Krishna Bihari Mishra

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