झारखण्ड की जनता अपने होनहार CM रघुवर को भाव क्यों नहीं देती, उनके नाम से ही क्यों भड़कती हैं

ऐसे तो जब भी आप राज्य के होनहार CM रघुवर दास के सोशल साइट फेसबुक को देखिये, तो उसमें आप पायेंगे कि राज्य की जनता उन्हें भाव नहीं देती और उनके नाम लेने से ही भड़क जाती है, जो लोग मुख्यमंत्री रघुवर दास के सोशल साइट को देखते या चला रहे होते हैं, वे भी अपना माथा पीट लेते है कि इतना करने के बाद भी राज्य की जनता व युवाओं के बीच खुद को सर्वाधिक होनहार माननेवाले मुख्यमंत्री रघुवर दास अलोकप्रिय क्यों है?

ऐसे तो जब भी आप राज्य के होनहार CM रघुवर दास के सोशल साइट फेसबुक को देखिये, तो उसमें आप पायेंगे कि राज्य की जनता उन्हें भाव नहीं देती और उनके नाम लेने से ही भड़क जाती है, जो लोग मुख्यमंत्री रघुवर दास के सोशल साइट को देखते या चला रहे होते हैं, वे भी अपना माथा पीट लेते है कि इतना करने के बाद भी राज्य की जनता व युवाओं के बीच खुद को सर्वाधिक होनहार माननेवाले मुख्यमंत्री रघुवर दास अलोकप्रिय क्यों है?

जरा देखिये, कल की ही बात है, मुख्यमंत्री रघुवर दास के सोशल साइट पर सुगनू गांव से संबंधित एक पोस्ट पर राज्य की जनता और युवाओं ने इस प्रकार से अपना आक्रोश व्यक्त किया है कि कोई भी व्यक्ति जिसको थोड़ी भी राजनीति की जानकारी है, वे समझ जायेंगे कि राज्य में रघुवर सरकार का क्या हाल है, अथवा जब भी कभी विधानसभा के चुनाव होंगे तो राज्य में भाजपा को कितने सीटें आयेंगी या वर्तमान में हो रहे लोकसभा चुनाव में भाजपा की यहां क्या स्थिति है?

मुख्यमंत्री रघुवर दास के सोशल साइट पर लिखा है – “बिजली-पानी जैसी मूलभूत जरुरतें हमें आजादी के बाद ही मिल जानी चाहिए थी। लेकिन कांग्रेस बार-बार देश को धोखा देती रही। जब मोदी जी की सरकार आई तो घर-घर बिजली पहुंची, घर-घर शौचालय बना शुद्ध पेयजल घर-घर पहुंचाया जा रहा है।” और लीजिये इधर सीएम रघुवर दास का पोस्ट आया और एक-दो को छोड़कर (जो भाजपा कार्यकर्ता या समर्थक है), राज्य की जनता और युवाओं ने सीएम रघुवर के इस पोस्ट के धूएं छुड़ा दिये।

जरा देखिये, राज्य की जनता और युवा क्या कह रहे हैं। चंदन कुशवाहा लिखते हैं – “अगर आपको पानी नहीं मिली थी आजादी के बाद से तो आप जिन्दा कैसे हैं अब तक।” अब्दुल हकीम का कहना है – “सिर्फ मोदी-मोदी करने में लगे हैं सीएम जी, बाकी आप से कुछ भी नहीं हुआ हैं।” कैलाश महतो लिखते हैं – “ बगोदर और गांव में पानी और बिजली की बहुत दिक्कत है।” हिमांशु का कहना है – “फेसबुक में डायलॉगबाजी के सिवा आपने कुछ किया ही नहीं, पूरे राज्य में बिजली नहीं है, जनता को मूर्ख न बनाएं, बिजली नहीं, वोट नहीं।”

बिजली और पानी नहीं मिलने से दुखी कई जनता ने मुख्यमंत्री रघुवर दास का नाम ही बदल रखा है, कुछ तो उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग भी कर रहे हैं, जिसका हम यहां उल्लेख नहीं कर सकते हैं, हम उन्हीं नामों और उनके टिप्पणियों को समावेश कर रहे हैं, जो स्तरीय है, लेकिन इतना तय हैं कि जनता मुख्यमंत्री रघुवर दास के व्यवहार और काम-काज से बहुत ही दुखी है।

शंभू नाथ तिवारी कहते हैं कि “कितना  कांग्रेस-कांग्रेस करोगे, रघुवर दास आपसे कुछ नहीं होनेवाला, जरा भी नैतिकता बची है, तो अपना इस्तीफा दे दीजिये। 2018 में ही 24 घंटे बिजली देने का वादा किया था आपने, लेकिन आप नाकाम रहे, आपका तो वह हाल होगा।” सुचित राय व्यंग्य करते हुए लिखते है कि “और आपके आने से झारखण्ड के युवाओं को 35 लाख नौकरी पहली बार मिला।”

वरुण यादव कहते है कि “चास नगर निगम में बिजली का हाल गांव से भी बदतर है। आपने बोला था कि 2018 दिसम्बर तक 24 घंटे बिजली नहीं दे पाया तो वोट नहीं मांगुंगा।” आशुतोष कुमार की भाषा देखिये – “पांच साल तक राज किये न चचा, अब दूसरे को भी मौका देना चाहिए, इसलिए आप धीरे-धीरे बोरिया-बिस्तर झारखण्ड से समेटने में लग जाइये। पांच साल में बिजली 24 नहीं, 25 घंटे मिली, ओ भी फ्री में, रोड भी टाइल्स जैसा। अब आपकी जरुरत नहीं। अब आप संन्यास ले लीजिये, चल जाइये, सतपुड़ा के पहाड़ी में क्योंकि …..”

मनोज ठाकुर कहते हैं कि “ रघुवर दास जी आप ने झारखण्ड को बर्बाद कर दिया हैं, जो कुछ भी आप में इन्सानियत बची है, वो भी बर्बाद मत कीजिये, आप अपने काम से इस्तीफा दे देते तो ठीक होता।” मनोज शर्मा लिखते हैं कि “ बिजली पहुंचाना बड़ी बात नहीं होती है, बिजली का सप्लाई देना बहुत बड़ी बात है, इस मामले में आप पूरी तरह फ्लॉप हो चुके हैं। चास में दस घंटे भी अच्छे से बिजली नहीं मिलता है और आपको प्रत्येक महीने बिल चाहिए, झारखण्ड की जो बेसिस नीड है – बिजली, पानी और रोजगार इन सभी मामलों में सरकार सबसे फ्लॉप सरकार है और हम एमएलए के इलेक्शन में रघुवर सरकार को पूर्ण रुपेण विरोध करते हैं।

मनमोहन शाह कहते हैं कि ”सरकार अपने पांच साल का हिसाब बताने को छोड़ कर, विरोधी पार्टियों की बुराई करें तो समझ लेना चाहिए कि उस सरकार ने कुछ भी नहीं किया।” अमर दीप सिंह गुस्से में लिखते हैं कि “यानी आपके हिसाब से बिजली-पानी की समस्या खत्म कर दी आपने। अब आप आराम करें काफी थक गये है, बिजली-पानी पहुंचाते-पहुंचाते। अब आपकी सरकार की हमें कोई जरुरत नहीं।”

Krishna Bihari Mishra

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