जब 16 महीने में 12 करोड़ की कोयले की लूट हो जाती है तो दस वर्षों में अरबों की लूट करनेवालों पर धनबाद के प्रशासनिक अधिकारी मौन क्योंः विजय झा
धनबाद के कतरास स्थित अपने आवास पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए वरिष्ठ समाजसेवी विजय झा ने कहा कि कुछ दिन पहले उन्होंने बीसीसीएल व डीजीएमएस से सूचना के अधिकार के तहत कुछ सूचनाएं मांगी थी। जो सूचनाएं उन्हें मिली, वो हतप्रभ करनेवाला है। सूचना के अधिकार से पता चला कि मात्र 16 महीनों में विभाग ने 856 जगह यानी एरिया एक से लेकर बारह तक छापामारी की। जिस छापामारी से केवल 16 महीनों में करीब 15 हजार मीट्रिक टन कोयले की चोरी पकड़ी गई, जिसकी लागत करीब साढ़े बारह करोड़ थी।
विजय झा ने कहा कि ये तो मात्र सोलह महीने का आकड़ा है, अगर दस साल पर नजर डाले तो ये अरबों रुपये की कोयला चोरी है। ये हम नहीं कह रहे, ये सरकारी दस्तावेज बता रहे हैं। विजय झा ने कहा कि ये सब अवैध उत्खनन से हैं। अगर ये अवैध उत्खनन नहीं रुका तो जैसे तीन दिन पहले छाताबाद में देखने को मिला, केसरगढ़ा, बहइयार, केसरपुर व कांटा पहाड़ी जैसे इलाकों में अवैध उत्खनन से भू धंसान जैसी घटना देखने को मिली, वैसी घटना अन्यत्र जगहों पर देखने को मिलेगी।
उन्होंने साफ कहा कि अवैध खनन रोकने के बाद ही यहां की तालाबों, कतरी नदी व जमुनिया नदी को बचाया जा सकता है। नहीं, तो ये कब यहां के तालाब, कतरी नदी, जमुनिया नदीं गोफ में समा जायेंगे, कहा नहीं जा सकता। हाल ही में तीन दिन पहले लोगों ने देखा कि छाताबाद में कैसे एक तालाब गोफ में समा गया। विजय झा ने कहा कि जिस प्रकार से इन इलाकों में भू-धंसान की घटना घट रही है। खेत-खलिहान बर्बाद हो रहे हैं। अवैध उत्खनन के कारण धन-संपदा की चोरी हो रही है। प्राकृतिक संरचना को बर्बाद किया जा रहा है। इस पर तत्काल ध्यान देकर, इसे रोकने की जरुरत हैं, क्योंकि कोई उद्योगपति आपको नदी बनाकर नहीं दे सकता। नदी को संरक्षित करने के लिए अवैध उत्खनन को रोकना ही एक उपाय है। नहीं तो यहां के लोग पानी के बिना मरेंगे।
विजय झा ने कहा कि इन सारी घटित घटनाओं को लेकर उन्होंने कुछ माह पहले डीजीएमएस जाकर वहां अधिकारियों को एक ज्ञापन दिया था और कहा था कि आप पूरे क्षेत्र का भू-गर्भ सर्वे करिये। कहां बालू भराई नहीं हुई है। कहां अभी भी अवैध माइनिंग हो रहा है। अगर कही सही से भी माइनिंग हो रही है, तो वो आपके प्रोटोकॉल के अनुसार हो रहा है या नहीं। इसकी भी जांच कराइये और इसके बाद पूरी जांच के बाद इस पर श्वेत पत्र जारी करें। कहां गैस और कहां भू-अग्नि की संभावनाएं हैं। कहां भू-धंसान की संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि भू-गर्भ सर्वेक्षण होने के बाद डीजीएमएस को बताना चाहिए कि हमें कहां रहना चाहिए और कहां नहीं रहना चाहिए। कहां बालू भराई हुई है और कहां बालू भराई नहीं हुई है। दो-तीन दिन पहले उपायुक्त ने एक एडवाइजरी जारी की थी कि अवैध उत्खनन के कारण जिन इलाकों में नदी व तालाब अवरुद्ध हो रहे हैं। वहां के सीओ और थाना प्रभारी उसके जिम्मेवार होंगे। विजय झा ने कहा कि वे अब ऐसे लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवायेंगे।
विजय झा ने कहा कि आज लगातार तीन दिनों तक बारिश पूरे कोयलाचंल में हो जाये तो यकीन मानिये पूरे धनबाद में कई ऐसे पचास इलाके हैं, जहां भू-धंसान की घटना घट जायेगी, कोई ठीक नहीं है कि यह भू धसान रानी बाजार जैसे घनी आबादी वाले इलाके में भी घट सकती है। ऐसे कोई घटना घटती है तो क्या प्रशासन यह कह सकता है कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी।
विजय झा ने कहा कि दुर्भाग्य देखिये डीजीएमएस का मुख्यालय धनबाद में है और वे ये नहीं देख पा रहा कि इस कोयलांचल क्षेत्र में कहां-कहां उचित तरीके से कोयला निकाला जा रहा है। जब वो धनबाद में नहीं देख पा रहा तो अन्य इलाकों में वो क्या देखता होगा? आश्चर्य है 12 करोड़ केवल 16 महीने में कोयले की लूट करनेवाले, दस सालों में तो अरबों लूट करा चुके होंगे, इसका जिम्मेवार कौन है, कोई न कोई तो होगा, पर यहां कोई जिम्मेवारी लेने को तैयार नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि आखिर सीआईएसएफ एक टोल फ्री नंबर क्यों नहीं जारी करती ताकि आम जनता को जब पता चले कि कहीं अवैध रूप से कोयला उत्खनन हो रहा है, तो वो उसे बता सकें और सीआईएसएफ तुरंत वहां कार्रवाई कर, ऐसे लोगों से इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगवा सकें। उन्होंने कहा कि शुभम यादव की हत्या क्यों हुई, इसीलिए न क्योंकि उसने डीजीपी को कम्पलेन किया था।
विजय झा ने कहा कि इस अवैध उत्खनन के खिलाफ लोगों को जागना होगा। आंदोलन करना होगा। नहीं तो उनके जीवन पर संकट आना तय है। लड़ाई भी उस प्रकार से लड़नी होगी, जैसे हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों से लड़ा। आज यहां लड़ाई कोयला चोरों से हैं। जो उनकी जिंदगी को तबाह करने पर तूले हैं। कोयलांचल को बचाना है, तो सभी को जागरुक होकर ये लड़ाई लड़नी ही होगी।
