अब आप कुछ भी कर लीजिये CM हेमन्त जी, जनता के समक्ष आपकी इमेज को, जो आपके लोगों ने भद्द पीटवाई हैं, उसकी भरपाई अब संभव नहीं  

झारखण्ड की हेमन्त सरकार ने राज्य की नई विधानसभा एवं उच्च न्यायालय भवन निर्माण में हुई सभी अनियमितताओं की जांच न्यायिक कमीशन से कराने का आदेश दिया है, पर इस आदेश को लेकर राज्य की जनता में एक भ्रम भी है, वो भ्रम यह है कि क्या इसे लेकर राज्य सरकार सचमुच गंभीर है या उनके उपर लग रहे भ्रष्टाचारों के आरोपों को लेकर अपने विरोधियों को सबक सिखाने की यह तैयारी है।

अगर सही मायनों में न्यायिक जांच का आदेश दिया गया है, तो इसका स्वागत होना चाहिए, पर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को सबक सिखाने या राजनीतिक मुकदमों में फंसाने की तैयारी को लेकर अगर यह कारर्वाई हैं तो यह निःसंदेह इसकी कड़ी आलोचना होनी चाहिए, क्योंकि नई विधानसभा एवं उच्च न्यायालय भवन के निर्माण की जांच की मांग तो किसी दल ने अभी की ही नहीं, न तो सत्तापक्ष में शामिल दलों ने और न ही किसी विपक्षी दल के नेताओं ने, ऐसे में ये अचानक न्यायिक जांच का आदेश बताता है कि सरकार के अंदर सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा, उन्हें भय है कि भाजपा ने जिस प्रकार उन्हें राजनीतिक घेरे में लिया हैं, उसका कुप्रभाव आज नहीं तो कल पड़ना ही पड़ना है।

दरअसल जब से हेमन्त सरकार राज्य में आई हैं, तब से लेकर आज तक इनका एक भी राजनीतिक निर्णय सही नहीं रहा हैं, उसका मूल कारण उनके आस-पास रहनेवाले लोगों का राजनीतिक अपरिपक्वता। इन्हीं के राजनीतिक अपरिपक्वता का परिणाम है कि राज्य सरकार बिना किसी मोल भाव के ऐसी संकट अपने उपर ले ली हैं कि इसका लक्षण ठीक नहीं दिख रहे।

आम तौर पर जो कुशल राजनीतिज्ञ होते हैं, वे अपने पास ऐसे लोगों की टीम रखते हैं, जो हर विषयों में पारंगत हो, साथ ही राजनीतिक रुप से निर्णय लेने व सुझाव देने में सक्षम हो, पर यहां बात ही दूसरी हैं, यहां जो भी है सभी ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को एक तरह से किडनैप कर लिया हैं, और अच्छे लोगों को उन तक पहुंचने ही नहीं देते।

इसका मूल कारण है कि इन कनफूंकवों को लगता है कि कही अगर दूसरा कोई मुख्यमंत्री के पास जायेगा तो इनकी असलियत बता देगा और इनकी चल रही रोजी-रोटी खत्म हो जायेगी, जबकि जो लोग चाहते है कि ये सरकार चलें, उनके दिमाग में ऐसी बातें नहीं होती, पर आसन्न भय से छटपटाने वाले इन लोगों ने तो अपना कबाड़ा किया ही, सरकार का भी कबाड़ा कर दिया हैं, साथ ही अपनी ओछी हरकतों से और भी कबाड़ा करते जा रहे हैं।

इन्हें लगता है कि वे अंततः जीत जायेंगे, पर इन्हें नहीं पता कि राजनीति में दो और दो चार ही नहीं, कभी पांच भी हो जाते हैं, पता भी नहीं चलता, मतलब अच्छी भली सरकार, कब उलट जाती हैं, सत्ता में रहनेवाले लोगों को पता भी नहीं चलता। दुनिया में जो भी राजनीतिज्ञ है या सत्ता में हैं, वो मध्यम मार्ग अपनाते हैं, और जो मध्यम मार्ग नहीं अपनाता, हमेशा अपने प्रतिद्वंद्वियों को सबक सिखाने में लगा रहता हैं तो वो अंततः रघुवर दास बन जाता हैं।

मतलब खुद तो जाता ही हैं, पार्टी को भी रसातल में ले जाता है। अब ये राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को सोचना है कि वे दरअसल चाहते क्या है? अगर वे चाहते है कि उनकी सरकार चलती रहे तो उन्हें कुछ ठोस निर्णय लेने होंगे और सबसे पहले अपने आस-पास जो चंगु-मंगू रखे हैं, उनसे दूरियां बनानी होगी।आश्चर्य इस बात की है कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को अब तक किसने रोक रखा था और आज का ही सुदिन किसने बताया कि विधानसभा भवन और उच्च न्यायालय के नये भवन निर्माण में हुई अनियमितता की जांच का न्यायिक आदेश देने की घोषणा करें।

क्या सीएम हेमन्त सोरेन को यह भी नहीं पता कि कभी-कभी अच्छा निर्णय भी गलत समय पर लेने पर गलत सिद्ध हो जाता हैं। जब जनता इसकी डिमांड कर रही थी या सरयू राय रघुवर सरकार के कृत्यों को लेकर आपसे ठोस निर्णय लेने को कह रहे हैं तब तो आप उनकी बातें मान नहीं रहे, और अब चले न्यायिक जांच का आदेश देने। न्यायिक जांच हो भी जायेगा तो इसकी क्या गारंटी की आपकी सरकार बच ही जायेगी, पहले आप सरकार बचाने की कोशिश करिये, आपको पता ही नहीं कि कहां तक सरकार नीचे जा चुकी है।

वक्त किसी का नहीं होता, इस वक्त ने आपको मुख्यमंत्री बनाया पर आपने वक्त को नही पहचाना, लेकिन आपके आस-पास के लोगों ने इस वक्त को अपने हित में खुब पहचाना, अपने हित में खुब काम किये, भाजपाइयों का समूह रोज इन मुद्दों को उठा रहा हैं, अखबार-चैनल-पोर्टल जो शुरु से आपके विरोधी रहे हैं, पूरे प्रदेश में आपकी सरकार की भद्द पीटवा का रख दी हैं, ऐसे में भी आप संभलेंगे, हमें तो कहीं से नहीं दिखता…