ये मोदी फेस्ट क्या होता है?

आजकल मोदी फेस्ट की धूम है, पूरे देश में भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं का दौरा हो रहा है, वे मोदी फेस्ट मना रहे है, लोगों को और अपने कार्यकर्ताओं को बता रहे है कि इन तीन सालों में मोदी ने क्या-क्या किया है…

भाई, मैं भी स्वीकार करता हूं कि मोदी ने बहुत अच्छे काम किये है, पर सच्चाई यह भी है कि बहुत से वादे ऐसे भी मोदी ने जनता के बीच किये है, जो किसी जिंदगी में न तो पूरे किये जा सकते है और न ही ये संभव भी है। पर इन सारी बातों पर न ध्यान देकर मोदी फेस्ट मनाने की जो परंपरा शुरु हुई है, वो भाजपा के लिए कहीं घातक न हो जाये…

वो इसलिए कि भाजपा किसी व्यक्तिवाद में नहीं पड़ती और न ही यहां व्यक्ति प्रधान होता है, पर इन दिनों देख रहा हूं कि यहां व्यक्ति प्रधान हो रहा है। लोग भाजपा को भूलकर एकमेव नरेन्द्र मोदी का जप कर रहे है, ये भाजपा जैसी पार्टी के लिए खतरनाक है, क्योंकि व्यक्ति प्रधान होने पर पार्टी को उसके गुण का जहां फायदा मिलता है वहीं उसके गलत होने का नुकसान भी उठाना पड़ता है।

हम जानते है कि चाहे जितना भी प्रचार – प्रसार या भय दिखाकर लोग नरेन्द्र मोदी को सुपर हीरो घोषित कर दें, पर आनेवाले समय में इनकी लोकप्रियता प्रभावित हो रही है, स्वयं हमारे घर में ही चार मतदाता है, जिसमें चारों मतदाता ये दावे के साथ नहीं कह सकते कि हम भाजपा को अगली बार वोट दे ही देंगे।

इसका मतलब आप समझ लीजिये। जहां तक मेरा मानना है कि भाजपा, संघ की एक राजनीतिक ईकाई है, जहां शुचिता एवं शुद्धता की पहली प्राथमिकता है, पर संघ के लोग भी स्वीकार करने लगे है कि पूरे देश में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। जरा झारखण्ड को ही ले लीजिये, यहां तो स्थिति ऐसी है कि आज लोकसभा का चुनाव हो जाय या विधानसभा का, यहां भाजपा का नाम लेनेवाला कोई नहीं होगा।

भाजपा को सोचना चाहिए कि जब रांची में उसके नेता नितिन गडकरी मोदी फेस्ट का उद्घाटन कर रहे थे, ठीक उसकी दूसरी ओर कांग्रेस कार्यालय में सैकड़ों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ता शकील अहमद के समक्ष कांग्रेस का दामन पकड़ रहे थे। इसका मतलब क्या होता है? जरा भाजपा को समझ लेना चाहिए।

आज आप सत्ता में है, तो जो कर लीजिये, सत्ता समाप्त होते ही आपके संग ये चलनेवाली भीड़ कहां जायेगी? आपको स्वयं आत्ममंथन करना होगा।

झारखण्ड में रघुवर सरकार की जो स्थिति है, भाजपा कार्यकर्ता स्वयं कहते है कि लोकसभा में नरेन्द्र मोदी को और विधानसभा में पार्टी को बचाने के लिए वे काम करेंगे, यानी स्थिति स्पष्ट है कि यहां सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा।

इसी पार्टी में कभी अटल बिहारी वाजपेयी, तो कभी लाल कृष्ण आडवाणी जैसे नेता रह चुके है, जिनके जमाने में, न तो अटल फेस्ट मना और न ही कभी आडवाणी फेस्ट मना, ये जो नया मोदी फेस्ट जो शुरु हुआ है, वह कहीं भाजपा के लिए बत्ती बुझानेवाला फेस्ट न बन जाये।

भाजपा और मोदी समर्थकों को भी याद रखना चाहिए कि पूर्व में कांग्रेस पार्टी में कभी इंदिरा इज इंडिया और इंडिया इज इंदिरा कहा गया था और उसके बाद से जो कांग्रेस की दुर्गति शुरु हुई, वह कांग्रेस अच्छी तरह जान रही है और लोग देख भी रहे है, इसलिए भाजपा को सलाह कि वे व्यक्तिवादी न बने, मोदी फेस्ट की जगह भाजपा फेस्ट करते तो कुछ समझ में भी आता, ये व्यक्तिवादी प्रवृत्ति, पार्टी को बहुत नुकसान पहुंचायेगी, ये सभी को जान लेना चाहिए।

Krishna Bihari Mishra

One thought on “ये मोदी फेस्ट क्या होता है?

  1. Kuch Dino baad sirf Yogi Yogi dikhega…..
    Kaam bolta hai jo ab modiji nahi Yogiji kar rahe hai….Modijee ko Foreign Tour se fursat nahi hai ki janta ki nase tatole ki wai kitne pas aarahe hai aur kitna door jarahe hai. Janta se inka sarokar khatm aur Business Man se suru. Dekhiye logo ka ab moh kab bhang hota hai….Inse aur Kab Yogi aate hai.

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