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विवेकानंद विद्या मंदिर : जहां CBSE के डिजिटल भुगतान संबंधी निर्देशों की हो रही है अनदेखी!

सर्वप्रथम पूर्व में भेजे गये सीबीएसई के सर्कुलर क्या कहते हैं… 28.08.2017 के सर्कुलर में CBSE ने अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों/इकाइयों को निर्देश दिया कि सभी वित्तीय लेन-देन यथासंभव डिजिटल माध्यम से किए जाएं तथा जहां नकद लेन-देन हो रहा है, उसे डिजिटल माध्यम में परिवर्तित करने का प्रयास किया जाए।

04.12.2017 के सर्कुलर में यह कहा गया कि प्रशिक्षण शुल्क, डुप्लीकेट मार्कशीट, माइग्रेशन, प्रमाणपत्र आदि की फीस अभी भी कई स्थानों पर नकद या चेक/डीडी से ली जा रही है। इसलिए पुनः निर्देश दिया गया कि भुगतान/प्राप्ति को डिजिटल माध्यम (NEFT/RTGS, Swipe Machine आदि) में लाया जाए। अर्थात् इन सर्कुलरों के माध्यम से सीबीएसई ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने तथा गैर-डिजिटल भुगतान को यथासंभव समाप्त करने के लिए प्रयास करने का निर्देश दिया है।

इधर सीबीएसई के डिजिटल भुगतान संबंधी निर्देशों का उल्लंघन होता देख अभय कुमार मिश्र ने अपने फेसबुक के माध्यम से इस मुद्दे को उठाया है कि विवेकानन्द विद्या मंदिर जैसे विद्यालय CBSE के डिजिटल भुगतान संबंधी निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं या CBSE द्वारा डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के निर्देशों के विपरीत अधिकांश लेन-देन नकद में कर रहे हैं।

अभय कुमार मिश्र ने फेसबुक पर लिखा है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 28 अगस्त 2017 तथा 4 दिसंबर 2017 को जारी अपने सर्कुलरों के माध्यम से संबद्ध संस्थानों को वित्तीय लेन-देन को डिजिटल माध्यम से करने तथा गैर-डिजिटल भुगतान को न्यूनतम करने के निर्देश दिए थे।

इसके बावजूद विवेकानंद विद्या मंदिर में अधिकांश वित्तीय लेन-देन आज भी नकद किए जाने की जानकारी मिल रही है। यहां तक कि नकद राशि की गणना के लिए नोट गिनने की मशीन भी खरीद ली गई है। ऐसे में प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या विद्यालय CBSE के डिजिटल भुगतान संबंधी निर्देशों का समुचित पालन कर रहा है? यदि नहीं, तो संबंधित प्रबंधन एवं प्रशासकीय अधिकारियों को इस विषय पर स्पष्ट स्पष्टीकरण देना चाहिए।

अभय कुमार मिश्र कहते हैं कि उनकी चिंता किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि विद्यालय, विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और कर्मचारियों के भविष्य से है। यदि नियमों की लगातार अनदेखी होती रही और भविष्य में CBSE द्वारा कोई कार्रवाई की गई, तो उसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव इन सभी हितधारकों पर पड़ेगा, न कि उन अधिकारियों पर जो पहले से सेवानिवृत्त हैं या अस्थायी रूप से प्रशासनिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

अभय कुमार मिश्र कहते है कि उनका उद्देश्य केवल इतना है कि विद्यालय समय रहते CBSE के निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक या मान्यता संबंधी समस्या उत्पन्न न हो। नहीं तो दिक्कत/नुकसान इस विद्यालय में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को होगा, न कि इस विद्यालय का अनुचित लाभ रहे लोगों को।

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