धनबाद में तीन-तीन एसपी, फिर भी एक ‘मच्छड़’ नहीं पकड़ा जा रहा, डाक्टरों ने काला बिल्ला लगा जताया विरोध

17 अगस्त को धनबाद के कतरास में दिन-दहाड़े संजीवनी नर्सिंग होम में एक अपराधी कट्टा का भय दिखाकर डाक्टरों को अपने साथ इलाज के लिए ले जाना चाहता है, फिर वहीं अपराधी देर रात आकर संजीवनी नर्सिंग होम में फायरिंग करता हैं। उक्त अपराधी संजय राय के खिलाफ नेम्ड एफआइआर दर्ज है, उसके बाद भी उक्त अपराधी को पांच दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाती है, वह भी तब जबकि धनबाद में तीन-तीन एसपी मौजूद हैं।

17 अगस्त को धनबाद के कतरास में दिन-दहाड़े संजीवनी नर्सिंग होम में एक अपराधी कट्टा का भय दिखाकर डाक्टरों को अपने साथ इलाज के लिए ले जाना चाहता है, फिर वहीं अपराधी देर रात आकर संजीवनी नर्सिंग होम में फायरिंग करता हैं। उक्त अपराधी संजय राय के खिलाफ नेम्ड एफआइआर दर्ज है, उसके बाद भी उक्त अपराधी को पांच दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाती है, वह भी तब जबकि धनबाद में तीन-तीन एसपी मौजूद हैं। दो एसपी और एक एसएसपी।

स्थानीय लोग बताते है कि एक समय था कि धनबाद में एक ही एसपी हुआ करते थे, और उसी से धनबाद का अपराध कंट्रोल हो जाया करता था, पर आज तीन-तीन एसपी  होने के बाद भी अपराधियों का मनोबल ऊंचा हैं, क्योंकि वर्तमान में जो तीन-तीन एसपी हैं, वे अपराध को नियंत्रण करने को छोड़ और बाकी सारे कामों में व्यस्त है। हाल ही में धनबाद में एक पत्रकार की बेटी पर अपराधियों ने जानलेवा हमला किया, उक्त अपराधियों को भी पुलिस पकड़ नहीं पाई है, यानी राजनीतिक संरक्षण प्राप्त अपराधियों को पकड़ने में स्थानीय पुलिस को सारी हेकड़ी निकल जाती है, और साधारण कांड भी कोई कर लें तो लीजिये, उक्त व्यक्ति की कितनी भी बड़ी समाज में सम्मान क्यों न हो, उसके सम्मान से खेलने में स्थानीय पुलिस को परम आनन्द की प्राप्ति हो जाती है।

स्थानीय नागरिक बताते है कि एक समय था, जब धनबाद में एक ही एसपी सुमन गुप्ता थी, जिससे सारे अपराधी कांपते थे, क्या मजाल कि सुमन गुप्ता के समय अपराधी, अपराध कर आराम से बैठ जाये, उनका स्थान जेल में होता था, पर आज क्या है? अपराधी मस्त और जनता पस्त, स्थानीय पुलिस को धनबाद की जनता से कोई मतलब नहीं और न ही मतलब है अपराध को कंट्रोल करने से, ऐसे में ये तीन-तीन एसपी धनबाद की जनता के छाती पर मूंग दलने के लिए रखे गये हैं क्या?

ये वहीं धनबाद पुलिस है, जो आज तक भाजपा की जिला मंत्री कमला कुमारी की प्राथमिकी दर्ज तक नहीं होने दी, और न ही उसे न्याय दिलवा पाई, आश्चर्य इस बात की भी है कि ऐसी धनबाद पुलिस के एसपी पद पर तैनात लोगों को कुछ लोग महिमामंडित करने से भी नहीं चूकते, जब इन महिमामंडित करनेवालों से यह पूछा जाता है कि भाई इनकी किन महानता के कारण आपने इन्हें सम्मानित किया तो सम्मानित करनेवाले लोग इधर-उधर बगलें झांकने लगते हैं।

आश्चर्य यह है कि धनबाद के सभी डाक्टर फिलहाल उक्त घटना से भयभीत हैं, और पुलिस तथा राजनीतिक संरक्षण मिल रहे उक्त मच्छड़ जैसे अपराधी को अब तक गिरफ्तार नहीं किये जाने के खिलाफ आज धनबाद के सभी डाक्टरों ने काला बिल्ला लगाकर अपना प्रतिरोध जताया, फिर भी धनबाद पुलिस को शर्म महसूस नहीं हो रही।

इसी बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन धनबाद के महासचिव डा. सुशील कुमार ने विद्रोही24.कॉम से बातचीत में कहा कि पांच दिन बीत जाने के बावजूद नेम्ड अपराधी का नहीं पकड़ा जाना, धनबाद के पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दे रहा है। उन्होंने कहा कि अपराधी दोपहर में रिवाल्वर दिखाता है, रात में फायरिंग करता है, पांच-छः घंटे बीत जाने के बाद भी वहां सुरक्षा नहीं बढ़ाई जाती है, उलटे उक्त अपराधी को राजनीतिक संरक्षण प्रदान कर दिया जाता है, अरे ये पुलिस क्यों नही समझती कि क्रिमिनल इज क्रिमिनल। वह उसे बचाने में क्यों लग जा रही हैं, उन्हें समझ नहीं आ रहा। डा. सुशील कुमार ने बताया कि उन्हें अफसोस है कि आज उक्त घटना के विरोध में धनबाद के सारे डाक्टर विरोधस्वरुप काला बिल्ला लगाकर काम कर रहे हैं।

इसी बीच राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कभी दिवंगत नेता ए के राय ने धनबाद के कतरास में ही पुलिसकर्मियों के इन्हीं हरकतों पर प्रकाश डालते हुए कहा था कि “जहां अपराध नहीं होता है, वहां आप थाना खोल दीजिये, अपराध शुरु हो जायेगा”, धनबाद में फिलहाल यहीं स्थिति हैं, आप किसी भी थाने में चले जाइये, अगर आप भुक्तभोगी है, तो पहली बात की प्राथमिकी ही नहीं दर्ज होगी, और जब प्राथमिकी दर्ज होगी तो आपको न्याय मिलेगा ही, इसकी कोई गारंटी नहीं, वह भी तब जबकि धनबाद में तीन-तीन एसपी विराजमान हैं। अरे भाई, ये तीन-तीन एसपी किस बात के लिए यहां विराजमान है, अपराधियों की सुरक्षा के लिए या सामान्य जन की छाती पर मूंग दलवाने के लिए?

Krishna Bihari Mishra

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