कांटाटोली और कांके से हजारों सिमकार्ड बरामद मामला यानी खोदा पहाड़ निकली चुहिया

आखिर वही हुआ, जिसका अंदेशा था, यानी खोदा पहाड़ निकली चुहिया। जिस दिन इस मामले का पर्दाफाश हुआ था, उसके दूसरे दिन करीब-करीब सारे अखबारों व चैनलों तथा पोर्टलों ने इस मामले को सनसनीखेज बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी थी, ऐसा लगा जैसे रांची सांप्रदायिक दंगा फैलानेवालों का पूरे देश में केन्द्रबिन्दु बन गया हो।

आखिर वही हुआ, जिसका अंदेशा था, यानी खोदा पहाड़ निकली चुहिया। जिस दिन इस मामले का पर्दाफाश हुआ था, उसके दूसरे दिन करीब-करीब सारे अखबारों व चैनलों तथा पोर्टलों ने इस मामले को सनसनीखेज बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी थी, ऐसा लगा जैसे रांची सांप्रदायिक दंगा फैलानेवालों का पूरे देश में केन्द्रबिन्दु बन गया हो।

विभिन्न प्रकार की बेबुनियादी बातों को, खोजी पत्रकारिता के तहत परोसा जाने लगा, बताया जाने लगा कि कांटाटोली व कांके में छापेमारी हुई है, 10,000 से अधिक सिम कार्ड मिले हैं, दो युवकों को इसमें हिरासत में लिया गया है, मुख्य सूत्रधार जावेद अहमद फरार बताया जा रहा है, छापे में पुलिस को 350 मोबाइल नंबरों की सूची भी मिली है, फ्लैट के मालिक इंतेखाब से भी पूछताछ की जा रही है।

बताया गया कि एक मोबाइल कंपनी के पूर्व कर्मी अब्दुल जमीद ने सात लाख लेकर जावेद को सिम मुहैया कराये, ये भी कहा गया कि कंपनी क सीनियर मैनेजर पुरुषोत्तम की संलिप्तता भी हैं, और सोशल साइट में तो कुछ लोगों ने अपने स्वभावानुसार इस घटना को हिन्दू-मुसलमान से भी जोड़ दिया।

दूसरे दिन तो अखबारों-चैनलों और पोर्टलों ने हद कर दी, इस घटना को और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। बताया गया कि भारत में प्रतिबंधित गैजेट से भेजे जाते थे एसएमएस, इंटरनेशनल लिंक की जांच में आइबी की भी मदद ली जा सकती है। बताया गया कि इस छापेमारी में एटीएस और साइबर पुलिस को महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं, जिसमें चाइनीज मशीन के उपयोग की भी बात आई, नोएडा की एक कंपनी से सांठगांठ की बात आई। कहा गया कि बरामद सिम की कंपनी भी उपलब्ध नहीं करा सकी कागजात, एक व्यक्ति के नाम पर जारी किये गये थे सिम, इंटरनेशनल लिंक और कनेक्शन की जांच के लिए एटीएस ले सकती है आईबी की मदद।

और आज इस पूरे मामले की अद्यतन स्थिति क्या है?  इस दस हजार सिम और मॉडम मिलने के मामले में एटीएस को कोई साक्ष्य ही नहीं मिला। एटीएस को राजधानी से मिले इन सिमों और मॉडम के मामले में वन टेक्सटेल और सिम उपलब्ध करानेवाली कंपनी के खिलाफ कोई साक्ष्य ही नहीं। दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों ने एटीएस को अपने दस्तावेज सौंप दिये, वन टेक्सटेल कंपनी, स्वयं दूर संचार विभाग से निबंधित है। दस हजार पोस्टपैड सिम के वैध कागजात भी प्रस्तुत कर दिये गये। इधर शुक्रवार को जिन दो युवकों को हिरासत में लिया गया था, उन्हें छोड़ भी दिया गया। साथ ही एटीएस ने स्वीकार किया कि इन कंपनियों पर कोई आपराधिक मामला नहीं बनता।

अब सवाल उठता है कि जिस प्रकार से इस समाचार को आम जनता के बीच पत्रकारों द्वारा पेश किया गया, और इसे सनसनीखेज बनाकर प्रस्तुत करने की एक नहीं, बार-बार कोशिश की गई और उधर सोशल साइटों पर हिन्दू-मुसलमान बनाकर इस घटना को पेश किया गया, उससे क्या यह पता नहीं चलता कि हमारे समाज में समाज तोड़क शक्तियां अब पत्रकारिता जगत में भी प्रवेश कर गई, जो बिना किसी जांच पड़ताल के, बिना किसी सबूत के घटना को अतिरंजित कर, जनता के सामने परोस रही हैं, क्या इस प्रकार समाचार प्रस्तुत करने से समाज में वैमनस्यता नहीं फैलेंगी, इस पर हमें लगता है कि विचार करने की जरुरत हैं, नहीं तो हर बात हिन्दू-मुसलमान होने से, समाज को टूटने कोई नहीं बचा सकता।

Krishna Bihari Mishra

One thought on “कांटाटोली और कांके से हजारों सिमकार्ड बरामद मामला यानी खोदा पहाड़ निकली चुहिया

  1. संवाद निरपेक्ष होना कठीन है..

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बकोरिया हत्याकांड के बाद चतरा के सलमान एराकी हत्याकांड की जांच भी सीबीआई को

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