ये भाजपा के नेता इडली, डोसा, सिंघाड़ा आदि दुकानों के उद्घाटन संबंधी फोटो सोशल साइट पर डाल अघाते नहीं थकते, तो ये पत्रकारों के लिए आयोजित स्नेह मिलन या मटनोत्सव को अपने सोशल साइट पर जगह क्यों नहीं दी?
एक बात समझ में नहीं आई, ये भाजपा के प्रदेशस्तरीय नेता इडली, डोसा, सिंघाड़ा आदि के उद्घाटन संबंधी फोटो सोशल साइट पर डालकर अघाते नहीं थकते हैं। इनके सोशल साइट पर जब भी जाये तो आपको एक दुकान का उद्घाटन करते हुए कोई न कोई नेता जरूर नजर आ जायेगा। लेकिन इन नेताओं ने भाजपा द्वारा यहां के पत्रकारों को दिये गये मटनोत्सव का एक भी फोटो तीन दिन बीत जाने के बावजूद भी अभी तक अपने सोशल साइट पर क्यों नहीं डाला?
क्यों भाई, आपने इतना बड़ा आयोजन किया। जिसमें 100-125 भाजपा भक्त पत्रकार और आपके नेता खुलकर भाग लिये। परमानन्द का आदान-प्रदान किया और आपके सोशल साइट से इससे संबंधित फोटो व संदेश गायब। ये बात कुछ हजम नहीं हुई। जबकि सभी को मालूम है कि भाजपा द्वारा आयोजित कथित स्नेह मिलन जिसे राजनीतिक पंडित मटनोत्सव भी कहते हैं। उस मटनोत्सव में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा के अति होनहार संगठन मंत्री कर्मवीर सिंह ने भी प्रमुख रूप से भाग लिया था।
जिसका वीडियो भी इनके भक्तों ने बड़ी प्रेम से बनाया और उसे अपने साइट पर लोड भी किया। पर प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और प्रदेश संगठन मंत्री कर्मवीर सिंह के सोशल साइट पर आप इस मटनोत्सव की फोटो खोजते रह जायेंगे, आपको नहीं मिलेगा।
आखिर, इन भाजपा भक्त पत्रकारों को मटनोत्सव में भाग लेने के बुलावे और उनका इतना सुंदर तरीके से अभिवादन, खिलाने-पिलाने के बाद भोजन दक्षिणा के रूप में डायरी और कलम देने के बाद भी, आपको इनके फोटो अपने सोशल साइट पर डालने से परहेज क्यों? क्या आपको इज्जत जाने का डर सता रहा है। अरे डरना क्या?
अरे अब डरना क्या? जब आप अच्छी तरह जानते है कि 2029 के भी विधानसभा चुनाव में झारखण्ड में आपको आना ही नहीं हैं। चाहे आप मीडिया पर कुछ भी लूटा दें। चाहे आप कितना भी मटनोत्सव कर लें। यहां की जनता ने आप सभी नेताओं को कब का ब्लैक लिस्ट में डाल दिया है। 2024 का विधानसभा चुनाव गवाह है कि बाबूलाल मरांडी को जीत कैसे नसीब हुई है? आपको लगता है कि भाजपा द्वारा अभिप्रमाणित, स्वीकृत, भाजपा नेताओं के हृदय से झंकृत पत्रकारों को आप मटनोत्सव में बुलायेंगे तो आप सत्ता में आ जायेंगे। असंभव। ये कभी नहीं होगा।
इतिहास साक्षी है। 2019 के चुनाव में झारखण्ड की सारी मीडिया, हेमन्त सोरेन के खिलाफ थी। आपके नेता रघुवर दास की हर अखबारों में जय-जयकार होती थी। चैनलों में तो केवल रघुवर दास ही दिखते थे। हेमन्त सोरेन का तो कहीं नामोनिशां तक नहीं था। लेकिन परिणाम क्या आया? मालूम ही होगा।
2024 के चुनाव में तो अपने को देश का नंबर वन अखबार बतानेवाला कह दिया था कि यहां भाजपा आ रही है। लेकिन परिणाम क्या निकला। परिणाम वहीं निकला, जो विद्रोही24 ने कहा। आज भी कह रहा हूं, खुद को सुधारिये। ये जो दूसरे को सुधारने का जिम्मा, औकात बताने का जिम्मा, देख लेने का जिम्मा आपने जो ले रखा है। यहीं आपके पतन का प्रमुख कारण है। ये जो आपके नेताओं में स्वयं में सर्वश्रेष्ठता का भाव जो पनप गया है। ये आपको कही का नहीं छोड़ेगा। आप अभी डबल डिजिट में है न। आनेवाले समय पर सिंगल डिजिट पर चले आइयेगा।
क्योंकि सामने में झामुमो का शेर हेमन्त सोरेन है। वो आपकी तरह प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को उतना महत्व नहीं देते। क्योंकि वे जानते है कि 2019 हो या 2024 वे किसी मीडिया की कृपा से सत्ता में नहीं आये। बल्कि झारखण्ड की जनता ने उन्हें अपना नेता चुना है। आज भी उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। आप जो हर महीने लाखों खर्च कर रहे हैं न सोशल मीडिया पर और एआई की मदद से जो नये-नये कार्टून अपने सोशल साइट पर हेमन्त सोरेन का बनाकर डाल रहे हैं। उससे हेमन्त सोरेन का बाल बांका भी नहीं होने जा रहा है। क्योंकि उन्हें पता है कि उनका वोटर कौन है?
वैसे तो आपको भी पता है कि आपका वोटर कौन है? लेकिन आप अपने वोटर को ही औकात बताने पर लगे हैं। यहीं हेमन्त सोरेन और आप सभी में अंतर है। दरअसल आप भाजपाइयों ने अपने ही समर्पित कार्यकर्ताओं और प्रतिष्ठित पत्रकारों को उठाकर पटकने का साहस किया है। जिसका परिणाम यह है कि आपके ही समर्पित कार्यकर्ता और प्रतिष्ठित पत्रकार आपसे इतने दूर हो गये कि आप कुछ भी कर लें। वे अब आपके साथ आ पायेंगे, इसकी संभावना दूर-दूर तक नहीं दिखती। क्योंकि आपने सारी मर्यादाएं लांघ दी है।
आपने निकृष्टतम लोगों को स्थान देने के चक्कर में समर्पित कार्यकर्ताओं व प्रतिष्ठित पत्रकारों को श्रद्धाजंलि दे दी। नतीजा यह हुआ कि आप प्रत्येक वर्ष लोकप्रियता की सीढ़ी चढ़ने के बजाय, नीचे चले जा रहे हैं और उधर हेमन्त बिना किसी मटनोत्सव के आयोजन के आगे की ओर बढ़ते जा रहे हैं।
अंत में, अगर आपको समझ में आये तो समझिये, नहीं तो मत समझिये। कभी भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी और प्रख्यात पत्रकार प्रभाष जोशी से संबंधित एक कहानी जो काफी प्रचलित है। उसे सुनने और गुनने का प्रयास करियेगा। शायद आपको बुद्धि मिले। अरे ये मैंने क्या कह दिया, आपको बुद्धि की क्या जरुरत, आपलोग तो खुद समझदार है, तभी तो आपकी पार्टी पिछले दो चुनावों से झारखण्ड में फिसड्डी होती जा रही है।
