मानसून सत्र को लेकर स्पीकर ने बुलाई बैठक, नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन मौजूद और CM रघुवर गायब, बाकी दलों ने भी बैठक से दूरिया बनाई

22 जूलाई से झारखण्ड का मानसून सत्र सरकार ने बुलाया है, विधानसभा का मानसून सत्र सुंदर ढंग से चले, व्यवधान न उपस्थित हो, सारे माननीय सदस्य विधानसभा की गरिमा बनाये रखे, इसके लिए आज झारखण्ड विधानसभाध्यक्ष दिनेश उरांव ने अपने विधानसभा कक्ष में एक विशेष बैठक बुलाई, जो हर विधानसभाध्यक्ष किसी भी सत्र के शुरु होने के पहले आहूत करता है।

22 जूलाई से झारखण्ड का मानसून सत्र सरकार ने बुलाया है, विधानसभा का मानसून सत्र सुंदर ढंग से चले, व्यवधान न उपस्थित हो, सारे माननीय सदस्य विधानसभा की गरिमा बनाये रखे, इसके लिए आज झारखण्ड विधानसभाध्यक्ष दिनेश उरांव ने अपने विधानसभा कक्ष में एक विशेष बैठक बुलाई, जो हर विधानसभाध्यक्ष किसी भी सत्र के शुरु होने के पहले आहूत करता है।

पर इस झारखण्ड विधानसभा का दुर्भाग्य देखिये, इस बैठक से सदन का नेता यानी राज्य का मुख्यमंत्री रघुवर दास गायब है, गायब है वे सारी पार्टियों के विधायक दल के नेता, जिन पर दारोमदार है, जनता के सवालों को लेकर, सरकार के नाक में नकेल कसने का, पर किसी ने इस विशेष बैठक में आने की रुचि नहीं दिखाई, मात्र संसदीय कार्य मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा और  नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने ही अपनी जिम्मेदारी निभाई और बाकी सोये रहे।

अब सवाल उठता है कि जिस राज्य का सीएम ही विधानसभा के सत्रों के महत्व को नहीं समझता हो, स्पीकर द्वारा बुलाई गई बैठक में नहीं उपस्थित होता हो, वहां का विधानसभा सत्र कैसा होगा? समझने की जरुरत हैं। नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन आज की बैठक में सीएम के उपस्थित नहीं रहने, अन्य दलों के विधायक दल के नेता के उपस्थित नहीं रहने के लिए संसदीय कार्य मंत्री, विधानसभा के सचिव तथा विधानसभा के अधिकारियों को जिम्मेवार ठहराया है, जिसके कारण स्पीकर द्वारा बुलाई गई बैठक पर सवालिया निशान उठ गये।

स्पीकर द्वारा आज की बैठक में राज्य के सीएम की अनुपस्थिति पर सवालिया निशान उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि दरअसल इस राज्य की सरकार ही नहीं चाहती कि विधानसभा सत्र चले,  तभी तो वह इस प्रकार की बैठक में भाग नहीं लेता, तभी तो वह सदन में उठनेवाले सवालों के जवाब देने के बजाय, ऐसी-ऐसी हरकतें करती है, ताकि विधानसभा का सत्र हंगामें की भेंट चढ़ जाये।

उन्होंने कहा कि विधानसभा का सत्र चले, इसकी पहली प्राथमिकता सरकार की होती है, पर क्या कभी झारखण्ड में किसी ने देखा कि सरकार ने अपने दायित्व को समझा है। यहां की सरकार तो हमेशा सदन न चले, इसके लिए ज्यादा दिमाग लगाती है, उसका तो ध्यान रहता है कि कैसे सदन बाधित हो ताकि जनता के सवालों पर कोई विपक्ष उसे घेर न सकें। रही बात ये मानसून सत्र ठीक से चल पायेगा या नहीं, ये भी सरकार के उपर है, अगर सरकार सवालों के जवाबों से भागेगी और गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनायेगी तो उसमें विपक्ष कर ही क्या सकता है।

नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने कहा कि अगर राज्य सरकार ईमानदारी पूर्वक अपने पांच साल के किये गये जूर्म को स्वीकार कर लें तो फिर कोई दिक्कत नहीं, और अगर झूठ बोलेगी तो फिर विधानसभा कैसे चलेगा? उन्होंने मीडिया पर आरोप लगाया कि मीडिया तो विपक्ष की बातों को उतनी जगह देता नहीं, वो तो केवल सत्तापक्ष की ही बात करता है, जबकि उन्होंने समय-समय पर कई बार ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि जूर्म का मतलब केवल हत्या ही नहीं होता, वो सारे अपराध होते है, जो सरकार करती है, जिसके कारण आम जनता भूख से मर जाती है, लड़किया सामूहिक दुष्कर्म की शिकार हो जाती है, सामान्य जनता चाकूबाजी, छिनतई और सांप्रदायिकता की शिकार हो जाती है और विकास की योजनाएं सरकार के भ्रष्ट मंत्रियों-अधिकारियों की भेंट चढ़ जाती है। जब आज की बैठक में सीएम रघुवर दास तथा अन्य दलों के नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर विद्रोही24.कॉम ने विधानसभाध्यक्ष से संपर्क करना चाहा, तब उन्होंने बातचीत नहीं की।

Krishna Bihari Mishra

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