कांग्रेस की राजनीति का चीरहरण अब बर्दाश्त नहीं, सरकार को विधायकों से खतरा होता तो सरकार कब की गिर जाती, राज्य में पुलिस प्रशासन बेलगाम – दीपिका

पहली बार कांग्रेस की एक महिला विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने राज्य की पुलिस और सरकार दोनों के खिलाफ सिंह गर्जना की है। राज्य की पुलिस के खिलाफ उनका गुस्सा ट्विट पर झलक रहा हैं तो सरकार पर गुस्सा एक चैनल के माध्यम से दिख रहा है। पहले ट्विट को देखिये, जिसमें उन्होंने राज्य की पुलिस के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली है।

ऐसा पहली बार हुआ है कि सरकार में शामिल एक पार्टी की महिला विधायक ने अपनी ही पुलिस को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है, जबकि आम तौर पर ऐसा नहीं देखा जाता, ज्यादातर ऐसा काम विपक्ष ही करता है, लेकिन दीपिका पांडेय ने ऐसा करके बता दिया कि वो सत्य का साथ किसी भी हालत में नहीं छोड़ेंगी, दीपिका ने साफ कह दिया कि सरकार को विधायकों से नहीं पुलिस की बेलगाम हो जाने के कारण खतरा जरुर उत्पन्न हो गया है –

“जज उत्तम आनन्द जी की हत्या हमारे कमजोर पड़ रहे पुलिसिया तंत्र को उजागर कर रही है। अपराधी लगातार पुलिस की कमियों का फायदा उठाकर संगठित तौर पर अपराध को अंजाम दे रहे हैं। वक्त आ गया है कि बेलगाम हो चुके लोगों पर नकेल कसा जाये और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।” इधर ऐसे देखने में भी आ रहा है कि कांग्रेस और झामुमो के बीच कहने को तो एकता है, लेकिन वो एकता दिख नहीं रही।

सत्ता में शामिल प्रमुख झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के लोगों ने एक-एक कर कांग्रेस के ही विधायकों को जनता के समक्ष नीचा दिखाने की कोशिश की है और इसमें मदद करनेवाले भी कांग्रेसी है, जो झामुमो की इस चाल को समझ नहीं सकें और आज स्थिति ऐसी हो गई, कि कांग्रेस को न तो उगलते बन रहा हैं और निगलते बन रहा है।

कांग्रेस के दो विधायकों को सरकार गिराने की प्लानिंग में फंसा दिया गया तो कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम होटल इमराल्ड वाले मामले में फंस गये, हालांकि कांग्रेस को फंसाने की तैयारी झामुमो की पहले से ही रही है,खुद कांग्रेस की विधायक दीपिका पांडेय पर ही एक मुकदमा लाद दिया गया है। वो डंके की चोट पर कहती है कि जनहित में अगर मुकदमा लगे तो ये गौरव की बात हैं, पर फँसाने को लेकर किया जाये तो उससे दुख होता है।

दीपिका पांडेय ने स्पष्ट रुप से कहा कि यहां कांग्रेस की राजनीति का चीरहरण हो रहा है। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ा जा रहा हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि देखों तुम्हारे विधायक क्या कर रहे हैं? कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का सर झुकाने की कोशिश की जा रही है, ऐसे में तो अच्छा रहता कि वो (दीपिका) इस्तीफा दे दें।

सरकार को समर्थन देना या चलाने का मतलब ये थोड़े ही हैं कि हम अपना अस्तित्व दांव पर लगा दें। भाजपा को रोकना के मतलब ये थोड़े ही है कि हम सरकार का हिस्सा बना रहे, हम बाहर से भी समर्थन दे सकते हैं। यहां तो कांग्रेस को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। दीपिका पांडेय के आज के ट्विट पर भाजपा विधायक दल के नेता बाबू लाल मरांडी के मीडिया सलाहकार सुनील तिवारी ने भी अपनी बाते रखी, उन्होंने ट्विट किया –

“चलिये मैडम दीपिका जी और किसी ने न सही आपने यह कहने का हिम्मत तो किया कि आपकी सरकार में पुलिस तंत्र कमजोर और बेलगाम हो गया है। लगे हाथ यह भी कहने का साहस जुटाइये कि ऐसे पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण जगहों पर तैनाती किसने और किस मकसद से की है। झारखण्ड का अवाम यह जानना चाहता है।”

Krishna Bihari Mishra

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