CM रघुवर के आगे आत्मसमर्पण करनेवाले संघ के नीति-निर्धारकों को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए

झारखण्ड के CM रघुवर दास के आगे आत्मसमर्पण करनेवाले संघ के नीति-निर्धारकों व पदाधिकारियों को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए, क्योंकि इन सब ने संघ के निष्ठावान व संघ के लिए मर-मिटनेवाले स्वयंसेवकों से ज्यादा दूसरे दलों से आयातित दलबदलूओं, यौन-शोषकों, हत्या व दवा घोटालों के आरोपियों पर ज्यादा भरोसा किया। भरोसा उन पर किया, जिनकी कई चुनावों में जमानत तक जब्त हो चुकी हैं,

झारखण्ड के CM रघुवर दास के आगे आत्मसमर्पण करनेवाले संघ के नीति-निर्धारकों व पदाधिकारियों को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए, क्योंकि इन सब ने संघ के निष्ठावान व संघ के लिए मर-मिटनेवाले स्वयंसेवकों से ज्यादा दूसरे दलों से आयातित दलबदलूओं, यौन-शोषकों, हत्या व दवा घोटालों के आरोपियों पर ज्यादा भरोसा किया। भरोसा उन पर किया, जिनकी कई चुनावों में जमानत तक जब्त हो चुकी हैं, और अपमानित उसे किया जो उनसे अधिक वोट लाकर भाजपा को उस स्तर तक पहुंचाया, जिसकी चर्चा आम जगहों पर सामान्य हैं।

यहीं नहीं जिन भाजपा और संघ से जुड़े लोगों ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा व संघ का मान बढ़ाया, उसे एक अदना सा टिकट के लिए नाक रगड़वा दिया गया हैं, सरयू राय इसके जीते जागते प्रमाण है। यही नहीं, जिन्होंने कभी भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष रहकर भाजपा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उन पूर्व प्रदेश अध्यक्षों को चून-चून कर टिकट कटवाया और वहां से ऐसे लोगों को टिकट दिया, जो दूसरे दलों से आयातित थे अथवा जो सीएम रघुवर दास के आंखों में खटका करते थे, या जिन्होंने कोई ऐसा मौका नहीं छोड़ा, जिन मौकों पर उन्होंने भाजपा को गरियाया न हो।

जरा देखिये, 2019 में क्या हो रहा हैं, इस बार निरसा से भाजपा के प्रदेश प्रशिक्षण प्रमुख गणेश मिश्र को टिकट न देकर, यहां से दो बार अपना जमानत गवां चुकी तथा फारवर्ड ब्लॉक से आई अपर्णा सेन गुप्ता को सीएम रघुवर दास के इशारे पर भाजपा का उम्मीदवार बनाया गया हैं, तथा यहां से गणेश मिश्र का टिकट काट दिया गया, क्योंकि ये वहीं गणेश मिश्र थे, जो 2014 का चुनाव जीतते, तो कम से कम हरियाणा के खट्टर की तरह ये भी झारखण्ड के मुख्यमंत्री बनते, पर वो कहां जाता हैं न, अल्लाह मेहरबां तो गधा पहलवान, इधर गणेश मिश्र हार गये और उधर खरसावां से अर्जुन मुंडा हार गये, ऐसे में कोई विकल्प ही न था, और बन गये सीएम रघुवर दास।

जब सीएम रघुवर दास ने देखा कि 2019 का चुनावी मैदान उसके सामने हैं तो वह चून-चूनकर अपने प्रतिद्वदियों को ठिकाने लगाने लगा, ठीक उसी प्रकार जैसे औरंगजेब ने सत्ता के लिए अपने भाइयों के साथ किया था, रघुवर दास ने एक-एक कर भाजपा के टॉप के नेताओं, पूर्व प्रदेश अध्यक्षों, और सरयू राय जैसे लोगों को ठिकाने लगाना शुरु किया और इसके लिए उसने अपने जातीय प्रभाव का जमकर इस्तेमाल किया, जिसमें रघुवर दास का भरपूर सहयोग किया, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने।

जरा देखिये कभी संघ निष्ठ रहे, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दुखा भगत, अभयकांत प्रसाद, डा. यदुनाथ पांडेय, डा. दिनेशानन्द गोस्वामी, रवीन्द्र राय आदि नेता कहां हैं, यहीं नहीं जब लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक प्रभाव रहता था, तब भी बरकट्टा से भाजपा का झंडा लहरानेवाले चितरंजन यादव जो आज दुनिया में नहीं हैं, उनके बेटे अमित यादव का टिकट काट दिया गया और टिकट किसे दिया जा रहा हैं, तो जो दलबदलू हैं, टिकट किसे दिया जा रहा हैं, जिनके अश्लील विडियो बड़े पैमाने पर जारी हैं।

टिकट किसे दिया जा रहा है, जिन पर भाजपा के ही जिला मंत्री कमला कुमारी ने यौन शोषण का आरोप लगाया हैं। टिकट किसे दिया जा रहा हैं जिन पर करोड़ों रुपये के दवा घोटाले का आरोप है। टिकट किसे दिया जा रहा हैं, जिन पर एक महिला के हत्या कराने का आरोप हैं, और आश्चर्य है कि ऐसे गंदे-गंदे लोगों को टिकट देने के बावजूद संघ के नीति-निर्धारक तथा अन्य पदाधिकारी धृतराष्ट्र की तरह मौन व्रत धारण किये हुए हैं।

कमाल हैं, हर हाल में राजनीतिक शुचिता एवं शुद्धता की बात करनेवाली संघ की एक राजनीतिक इकाई भाजपा ने जैसे 2019 के चुनाव में संकल्प कर रखा हैं कि वह उन सारे कुकृत्य करनेवालों को इस बार टिकट देगी/दिलायेगी। जिनके कुकृत्यों से पूरा झारखण्ड शर्मसार हैं और उन सारे लोगों को राजनीति से बाहर का रास्ता दिखायेगी, जिन्होंने सीएम रघुवर से ज्यादा संघ के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई हैं।

सूत्र बताते है कि इन दिनों भाजपा को सदा के लिए बर्बाद करने के लिए भाजपा के ही अंदर एक गोपणीय षडयंत्र चल रहा है, इस षडयंत्र में कौन लोग सक्रिय हैं, ये बताने के लिए अब जरुरत भी नहीं, अब यह खुलकर सामने आ गया हैं, हो सकता है कि झारखण्ड के अंतिम भाजपाई मुख्यमंत्री रघुवर दास ही हो, क्योंकि इन दिनों भाजपा और संघ के कई आनुषांगिक संगठनों में अंदर ही अंदर रघुवर दास के कृत्यों की काली छाया फैलती जा रही हैं।

जिसके कारण लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा हैं, सभी एक स्वर से यह कह रहे है कि अब भाजपा, भाजपा नहीं रही, रघुवर की पार्टी हो गई हैं, ऐसे में अगर यही होता रहा, तो भाजपा इस चुनाव में कहां फेकायेगी, कुछ कहा नहीं जा सकता, क्योंकि रही-सही कसर मांडर से भाजपा का टिकट प्राप्त करनेवाले संघ, वनवासी कल्याण केन्द्र तथा भाजपा विरोधी देव कुमार धान को रघुवर दास द्वारा मिले आशीर्वाद ने कर दिखाया है।

इधर संघ के आनुषांगिक संगठनों और भाजपा से जुड़े लोगों ने ऐसे लोगों को सबक सिखाने के लिए एक कैंपेन चलाया हैं, जिसे व्हाट्सएप पर खुब फैलाया जा रहा हैं तथा ऐसे भाजपाइयों को जो संघ और भाजपा को गर्त में ले जा रहे हैं, उन्हें सबक सिखाने की अपील की जा रही हैं, जरा देखिये उस संदेश में क्या हैं?

“कोई बुरा प्रत्याशी केवल इसलिए आपका मत पाने का दावा नहीं कर सकता कि वह किसी अच्छे दल की ओर से खड़ा है। दल के ’हाईकमान’ ने ऐसे व्यक्ति को टिकट देते समय पक्षपात किया होगा। अतः ऐसी गलती को सुधारना मतदाता का कर्तव्य है।” –पं दीन दयाल उपाध्याय/पॉलिटिकल डायरी पृष्ठ – 151, 11 दिसम्बर 1961।

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि भाजपा के खिलाफ, भाजपा में ही चल रहे व्हाट्सएप्प अभियान सफल रहा तो कही झारखण्ड में भूख से होनेवाली मौत की खबर की तरह, रघुवर दास सरकार एक-एक वोट के लिए न तरस जाये और इसके लिए अगर कोई दोषी होगा तो वह मुख्यमंत्री रघुवर दास होंगे, उनकी जातीय नीति तथा उसे सहयोग देनेवाले संघ और भाजपा के शीर्षस्थ नेता ही जिम्मेवार होंगे।

Krishna Bihari Mishra

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भगवान कृष्ण की तरह अंतिम-अंतिम तक युद्ध को टालने के प्रयास के बावजूद जैसे महाभारत का युद्ध हुआ, ठीक उसी प्रकार राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा अपहृत भाजपा से बार-बार मिल रहे अपमान के बावजूद जमशेदपुर पश्चिम के विधायक एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने अंतिम-अंतिम तक कोशिश की, कि वे भाजपा और रघुवर के खिलाफ युद्ध न लड़ें।

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