एकता दिवस के बहाने, असल में सरदार पटेल के नाम पर इन्दिरा को मिटाने की कोशिश हो रही हैं

सच पूछिये तो सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती मनाने का कार्यक्रम तो सिर्फ एक बहाना है, असली मकसद तो इनके नाम पर इंदिरा गांधी के अस्तित्व को मिटा देना है। क्या भाजपा सरकार द्वारा किये जा रहे इस हथकंडे से इन्दिरा गांधी को लोग भूल जायेंगे। जनता भूल जायेंगी इन्दिरा गांधी के उस त्याग व बलिदान को जो उन्होंने देश की आजादी तथा आजादी के बाद भारत को सशक्त करने में लगाया।

सच पूछिये तो सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती मनाने का कार्यक्रम तो सिर्फ एक बहाना है, असली मकसद तो इनके नाम पर इंदिरा गांधी के अस्तित्व को मिटा देना है। क्या भाजपा सरकार द्वारा किये जा रहे इस हथकंडे से इन्दिरा गांधी को लोग भूल जायेंगे। जनता भूल जायेंगी इन्दिरा गांधी के उस त्याग व बलिदान को जो उन्होंने देश की आजादी तथा आजादी के बाद भारत को सशक्त करने में लगाया।

आजकल देख रहा हूं कि रांची शहर के चप्पे-चप्पे में अपने बयान से पलटी मारने के लिए पूरे भारत में मशहूर झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के फोटो समेत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं समस्त भारतीयों के हृदय में अपने पराक्रम के कारण विद्यमान सरदार पटेल जी के बैनर-होर्डिंग लगे हैं। 31 अक्टूबर को सरदार पटेल के नाम पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जा रहा है। एक भारत, श्रेष्ठ भारत के बाद अब नया नारा देखने को मिल रहा है। न्यू इंडिया, न्यू झारखण्ड। हमें समझ में नहीं आता कि न्यू इंडिया और ये न्यू झारखण्ड क्या है?

हो सकता है कि 11 वर्षीया संतोषी की भूख से हुई मौत को यहां की सरकार न्यू झारखण्ड के रुप में ले रही हो, या निवेश के नाम मोमेंटम झारखण्ड के द्वारा पूरे राज्य की जनता को उल्लू बनानेवाली यह रघुवर सरकार अब माइनिंग शो के नाम पर उल्लू बनाने की प्रक्रिया को ही न्यू झारखण्ड समझ रही हो, नहीं तो जरा सरकार बताये कि जो सरदार पटेल के नाम पर राष्ट्रीय एकता दिवस का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं सरदार पटेल की भव्य प्रतिमा गुजरात में स्थापित करने का ढिंढोरा पीटनेवाले नरेन्द्र मोदी, आखिर कब सरदार पटेल की वैसी भव्य प्रतिमा स्थापित करेंगे, कहीं ऐसा तो नहीं कि फिर लोकसभा चुनाव के दौरान पटेल की प्रतिमा को भव्य रुप देने का नाम जनता के बीच ले जाकर भंजायेंगे, जैसा कि उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान किया था।

हम सरदार पटेल को उनके द्वारा देश के लिए किये गये योगदान को भूल नहीं सकते, पर हम ये भी नहीं भूल सकते कि सरदार पटेल द्वारा कराये गये देसी रियासतों के विलयन के बाद, जब इंदिरा जी के शासनकाल में भारत पर संकट उपस्थित हुआ, तो यहीं श्रीमती इंदिरा गांधी ने 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर, बांगलादेश बनवाया। श्रीमती इंदिरा गांधी ने ही कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण कराया। श्रीमती इंदिरा गांधी ने ही बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। आधारभूत संरचनाओं तथा देश में हरित क्रांति, गरीबी हटाओ तथा अपनी 20 सूत्री कार्यक्रमों से देश को मजबूती प्रदान करने की सफल कोशिश की। महिलाओं व बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने नाना प्रकार की योजनाओं को जमीन पर उतारा। नवम एशियाई खेल कराकर भारत का शान बढ़ाया। अंतरिक्ष में भारत की पैठ बढ़ाई। 1974 में इन्दिरा जी के नेतृत्व में भारत ने पहला परमाणु परीक्षण किया।

ऐसे में जब हम सरदार पटेल की जयंती मना रहे हैं, तो हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जिस दिन सरदार पटेल की जंयती है, उसी दिन देश की पहली महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का बलिदान दिवस भी है। हम आपकी क्षुद्र राजनीति के चलते उन दिवंगत प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को नहीं भूल सकते। ऐसे भी इस देश में लोकतंत्र हैं, आपको सभी को सम्मान देना होगा, जिन्होंने देश की मजबूती के लिए काम किये। ऐसे भी जब आप कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सरदार पटेल की जयंती मना रहे हैं, तो फिर श्रीमती इंदिरा गांधी का बलिदान दिवस मनाने में आपको क्या परहेज हैं? सिर्फ इसलिए कि कहीं इससे कांग्रेस को कहीं माइलेज न मिल जाये।

इसी घटियास्तर की मनोवृत्ति के कारण भाजपा की लोकप्रियता का हाल ये है कि इसका ग्राफ तेजी से गिरता जा रहा है, जबकि याद करिये 1977 जब इंदिरा गांधी की पार्टी उत्तर भारत से साफ हो रही थी तो दक्षिण में मजबूती के साथ खड़ी भी थी। यहीं नहीं उस वक्त जनता पार्टी में इतनी आपसी खींचातानी हुई कि 1980 में इंदिरा गांधी को यहीं कि जनता ने सत्ता सौंप दिया और जब 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा जी को उन्हीं की सुरक्षाकर्मियों ने हत्या कर दी, तब उस वक्त सारा देश रो रहा था।

हाल ये हुआ कि 1985 में जब लोकसभा के चुनाव हुए तब आंध्रप्रदेश छोड़कर कोई ऐसा प्रांत नहीं था, जहां इन्दिरा जी के बेटे राजीव गांधी को लोगों ने सर आंखों पर नहीं बिठाया था और 400 से भी ज्यादा सीटों से कांग्रेस को सत्ता सौंपा, इसलिए वर्तमान में जो भाजपा सरकार, इन्दिरा जी के अस्तित्व को मिटाने तथा जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए सरदार पटेल का उपयोग कर रही हैं, जनता इतनी भी बेवकूफ नहीं है, सब समझ रही है, समय आने दीजिये, इनकी सारी हेकड़ी निकल जायेगी, जब लोकसभा व विधानसभा के चुनाव होंगे।

अंत में भाजपाइयों जान लों, जो कुकर्म आप आज करना शुरु किये हो, यहीं कुकर्म कभी कांग्रेस किया करती थी, वह भी सिर्फ नेहरु, इंदिरा और राजीव तक सिमटा करती थी, कांग्रेस में ही अन्य नेता जैसे सरदार पटेल और लाल बहादुर शास्त्री उसे याद नहीं रहा करते थे, आज देख लो उस कांग्रेस की क्या स्थिति है?  इसलिए इनसे सबक सीखो और अपनी दुर्दिन के दिन को आमंत्रण मत दो, सभी को सम्मान दो, जिन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया।

सरदार पटेल अमर रहे, इंदिरा गांधी अमर रहे।

Krishna Bihari Mishra

One thought on “एकता दिवस के बहाने, असल में सरदार पटेल के नाम पर इन्दिरा को मिटाने की कोशिश हो रही हैं

  1. Former PM, Indira Gandhi has been a sysmbol of nations’s unity. You have rightly pointed out that the great and commendable job of Imdiraji can never be forgotten in the Indian history. Thanks for such a nice piece of analysis.

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