राजनीति

नेता प्रतिपक्ष ने पाकुड़ के DC को पत्र लिख इलामी से बागानपाड़ा तक DMFT मद से निर्मित PCC सड़क एवं गार्डवाल निर्माण घोटाले में शामिल पदाधिकारियों व कर्मियों की भूमिका की जांच एवं कार्रवाई की मांग की

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पाकुड़ के उपायुक्त को पत्र लिखा है। पत्र में इलामी पंचायत अंतर्गत इलामी से बागानपाड़ा तक डीएमएफटी मद से निर्मित पीसीसी सड़क एवं गार्डवाल निर्माण में कथित घोटाले की शिकायत को जानबूझकर जांच के दायरे से बाहर रखने के मामले में जिम्मेदार पदाधिकारियों/कर्मियों की भूमिका की जांच एवं कार्रवाई तथा उक्त योजना को तत्काल जांच सूची में शामिल करने की मांग की है। बाबूलाल मरांडी का पत्र इस प्रकार है…

उपायुक्त,

पाकुड़।

विषय:- इलामी पंचायत अंतर्गत इलामी से बागानपाड़ा तक DMFT मद से निर्मित PCC सड़क एवं गार्डवाल निर्माण में कथित घोटाले की शिकायत को जानबूझकर जाँच के दायरे से बाहर रखने के मामले में जिम्मेदार पदाधिकारियों/कर्मियों की भूमिका की जाँच एवं कार्रवाई तथा उक्त योजना को तत्काल जाँच सूची में शामिल कराने के संबंध में।

अवगत कराना है कि दिनांक 16 अगस्त 2026 को मैंने ग्रामीणों की शिकायत के आलोक में माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड को पत्र लिखकर पाकुड़ जिले के इलामी पंचायत अंतर्गत इलामी से बागानपाड़ा तक DMFT मद से निर्मित PCC सड़क एवं सत्तार मौलवी के घर के पास निर्मित गार्डवाल के निर्माण में ग्रामीणों द्वारा लगाए गए गंभीर अनियमितता, घटिया निर्माण एवं गुणवत्ता संबंधी आरोपों की जाँच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित कार्यकारी एजेंसी एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की थी।

उक्त पत्र की प्रति आपको भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई थी। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दिए गए संयुक्त शिकायत-पत्र को भी संलग्न किया गया था, जिसमें संबंधित योजना एवं कथित अनियमितताओं का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है। उक्त शिकायत के आलोक में आपके कार्यालय द्वारा दिनांक 18 अगस्त 2026 को विभिन्न योजनाओं की स्थल-जाँच हेतु जाँच दल गठित किया गया।

किन्तु जाँच के लिए तैयार योजनाओं की सूची का अवलोकन करने पर एक अत्यंत गंभीर एवं संदेह उत्पन्न करने वाला तथ्य सामने आया है कि जिस इलामी-बागानपाड़ा PCC सड़क एवं गार्डवाल की जाँच के लिए ग्रामीणों द्वारा विशेष रूप से लिखित शिकायत की गई थी, उसी योजना का नाम जाँच हेतु चयनित योजनाओं की सूची से गायब है।

इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा कल पुनः दिए गए शिकायत-पत्र की प्रतिलिपि भी इसके साथ संलग्न की जा रही है। ऐसे में यह गंभीर प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि स्पष्ट लिखित शिकायत के बावजूद उक्त योजना को जाँच के दायरे से आखिर किसके निर्देश, दबाव अथवा प्रभाव में बाहर रखा गया? क्या यह महज प्रशासनिक चूक है, अथवा संबंधित योजना में कथित अनियमितताओं पर पर्दा डालने और जाँच को प्रभावित करने का सुनियोजित प्रयास?

यदि लिखित शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लिखित योजना ही जाँच सूची से बाहर कर दी जाए, तो पूरी जाँच प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा होना स्वाभाविक है। यह मामला केवल एक योजना तक सीमित नहीं माना जा सकता। इसकी भी जाँच आवश्यक है कि शिकायत प्राप्त होने से लेकर जाँच सूची तैयार होने तक फाइल किन-किन पदाधिकारियों/कर्मचारियों के पास गई, योजना का नाम किस स्तर पर सूची से हटाया अथवा शामिल नहीं किया गया और इसके पीछे क्या कारण था।

यह घटना इस आशंका को भी बल देती है कि कथित अनियमितताओं में संलिप्त लोगों का नेटवर्क इतना प्रभावशाली हो सकता है कि वे सरकारी तंत्र के भीतर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जाँच की दिशा एवं दायरा प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हों। यदि ऐसा पाया जाता है, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि सरकारी जाँच प्रक्रिया को प्रभावित करने और दोषियों को संरक्षण देने का अत्यंत गंभीर मामला होगा।

अतः आपसे आग्रह है कि इलामी से बागानपाड़ा तक DMFT मद से निर्मित PCC सड़क एवं सत्तार मौलवी के घर के पास निर्मित गार्डवाल को तत्काल वर्तमान जाँच समिति की जाँच के दायरे एवं योजनाओं की सूची में शामिल करते हुए इसकी निष्पक्ष एवं विस्तृत स्थल तथा तकनीकी जाँच कराई जाए।

जाँच में विशेष रूप से स्वीकृत DPR/प्राक्कलन के अनुरूप निर्माण, सड़क एवं गार्डवाल की लंबाई-चौड़ाई-मोटाई, प्रयुक्त सामग्री की मात्रा एवं गुणवत्ता, तकनीकी मानकों का अनुपालन, मापी-पुस्तिका (MB), कार्यादेश, बिल-वाउचर, भुगतान की पूरी प्रक्रिया, स्थल पर वास्तविक कार्य की मात्रा एवं गुणवत्ता तथा संबंधित पदाधिकारियों/अभियंताओं द्वारा किए गए सत्यापन की जाँच कराई जाए। आवश्यकता पड़ने पर निर्माण सामग्री के नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से उसकी गुणवत्ता की जांच भी कराई जाए।

साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि ग्रामीणों की लिखित शिकायत एवं मेरे दिनांक 16 अगस्त 2026 के पत्र में योजना का स्पष्ट उल्लेख होने के बावजूद आखिर किस पदाधिकारी/कर्मचारी ने, किस आधार पर और किन परिस्थितियों में उक्त योजना को जाँच सूची में शामिल नहीं होने दिया। इसके लिए संबंधित फाइल की नोटशीट, पत्राचार, सूची तैयार करने की प्रक्रिया एवं जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों की भूमिका की जाँच की जाए।

यदि जाँच में यह प्रमाणित होता है कि किसी पदाधिकारी, कर्मचारी, कार्यकारी एजेंसी अथवा अन्य व्यक्ति ने जानबूझकर उक्त योजना को जाँच से बाहर रखने, जाँच को प्रभावित करने, साक्ष्यों को छिपाने अथवा दोषियों को संरक्षण देने का प्रयास किया है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ उपलब्ध साक्ष्यों एवं लागू कानून के अनुसार प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

किसी घोटाले से भी अधिक गंभीर स्थिति तब होती है, जब उस घोटाले की जाँच को ही रोकने या प्रभावित करने की कोशिश की जाए। इसलिए इस मामले में केवल निर्माण कार्य की जाँच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि “जाँच से योजना को बाहर रखने के पीछे की पूरी प्रक्रिया और जिम्मेदारी” की भी अलग से जाँच आवश्यक है।

मुझे विश्वास है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए उक्त योजना को जाँच सूची में शामिल करेगा तथा यह भी सुनिश्चित करेगा कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति, ठेकेदार, एजेंसी अथवा पदाधिकारी के दबाव या प्रभाव से जाँच की निष्पक्षता प्रभावित न हो।

संलग्नक:-

  1. दिनांक 16 अगस्त 2026 को माननीय मुख्यमंत्री को प्रेषित शिकायत-पत्र की प्रति।
  2. ग्रामीणों द्वारा पूर्व में दिए गए संयुक्त शिकायत-पत्र की प्रति।
  3. ग्रामीणों द्वारा पुनः दिए गए शिकायत-पत्र की प्रति।
  4. दिनांक 18 अगस्त 2026 को गठित जाँच दल/जाँच हेतु चयनित योजनाओं की सूची की प्रति।

(बाबूलाल मरांडी)

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