मध्यप्रदेश के बालाघाट में संक्रामक बीमारी से हुई 30 आदिवासी बच्चों की मौत पर झामुमो ने भाजपा सरकार को घेरा और उनके कार्यप्रणाली पर अंगुली उठाई
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में संक्रामक बीमारी से विगत तीन महीनों के अंदर हुई 30 आदिवासी बैगा बच्चों की मौत को लेकर झामुमो के तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया और जामा विधायक लुईस मरांडी ने आज प्रेस कांफ्रेस किया और मध्य प्रदेश में चल रही भाजपा सरकार और केन्द्र सरकार को कड़ी लताड़ लगाई। इन नेताद्वय का कहना था कि मध्यप्रदेश की इस घटना ने भाजपा सरकार के चाल, चेहरा और चरित्र को बेनकाब कर दिया है।
इन नेताओं ने कहा कि भाजपा नेता स्वयं को आदिवासी हितैषी होने का दंभ भरते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश की इस घटना ने बता दिया कि इनकी कथनी और करनी में कितना अंतर है। आदिवासियों के प्रति इनकी कितनी नफरत है, इस घटना ने उजागर कर दिया है। इन नेताओं का कहना था कि मध्य प्रदेश से जो इस संबंध में खबरें आ रही है। वो पीड़ादायक है और गंभीर चिन्ता का विषय है।
इन्होंने कहा कि ये सरकार आदिवासी बच्चों की हत्यारी है। इन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग जानते हैं कि ये आदिवासी बच्चे जिन्दा रहेंगे तो वे अपने हक और अधिकार की बातें करेंगे। जल, जंगल, जमीन की बातें करेंगे। बेतरतीब होते खनन के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। शोषण के खिलाफ आवाज उठायेंगे। इसीलिए भाजपा शासन ने इनके बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने पर ध्यान नहीं दिया।
इन नेताओं ने कहा कि मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले की यह घटना बताता है कि वहां की क्या स्थिति है। जब कोई इनके खिलाफ आवाज उठाता है तो वे उन पर मुकदमे लगाकर जेल में डाल देते हैं। सच्चाई यही है कि आदिवासी समाज वहां अपनी गरिमा और बुनियाद के लिए लड़ रहा है। एमएमडीआर में बदलाव लाये जा रहे हैं और यहां के आदिवासियों को गरीबी की दलदल में ढकेलने का काम किया जा रहा है। कारपोरेट जगत को मजबूत किया जा रहा है।
इन नेताओं ने कहा कि अब तो स्पष्ट हो चुका है कि देश में आदिवासियों का कोई सर्वमान्य नेता है तो वे हेमन्त सोरेन है। जिन्होंने आदिवासियों के संरक्षण और उनके विकास पर ध्यान दिया है। उनके नेतृत्व में अब आदिवासी समाज अपने हक और अधिकार के लिए एक होने का काम कर रहे हैं। नेताद्वय ने कहा कि मध्य प्रदेश की यह घटना मानवता को शर्मसार करनेवाली है।
