नीट इग्जाम को लेकर झामुमो ने भारतीय वायुसेना को दी बधाई और केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को धिक्कार किया संप्रेषित
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव व प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने आज प्रेस कांफ्रेस कर भारतीय वायु सेना को बधाई दी, आभार प्रकट किया। सुप्रियो ने कहा कि यह बधाई व आभार इसलिए कि वायु सेना ने कल नीट की परीक्षा कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश के इतिहास में पहली बार भारतीय वायु सेना को नीट की परीक्षा सफल कराने के लिए इस्तेमाल किया गया। सुप्रियो ने भारतीय रक्षा मंत्रालय को भी धन्यवाद दिया। लेकिन लगे हाथों भारत के मानव संसाधन मंत्रालय को अपनी और अपनी पार्टी की ओर से धिक्कार भी संप्रेषित कर दिया।
सुप्रियो ने कहा कि एक अदद परीक्षा के लिए जो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी करती है, जिसका चयन खुद एचआरडी ने किया था, वो यदि एक इग्जाम नहीं करवा पाती, तो लानत है, ऐसे मंत्री और मंत्रालय पर। लगातार शिक्षा का बजट कम करनेवाली मोदी सरकार ने बता दिया कि अब देश में शिक्षा अब सरकार की चीज नहीं। अब कारपोरेट के पास है। क्योंकि चिकित्सा शिक्षा में बहुत सारा धन लगता है और इसमें ज्यादा प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हो गये। अब बगैर नीट के केवल पैसे के बल पर लोग डाक्टर बनेंगे। इलाज क्या होगा, नहीं होगा, वो राम भरोसे।
सुप्रियो ने कहा कि अब लगता है कि भारत सरकार को तैयार कर लेना चाहिये कि जब कैट का इग्जाम हो तो उसमें एनआईए को, यूपीएससी में ईडी और ज्वाइन्ट इंजीनियरिंग की परीक्षा संचालित करने के लिए सीबीआई को जिम्मा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा कभी किसी देश में नहीं हुआ। जहां केवल ट्रांसपोर्टेशन के लिए सेना का उपयोग किया गया हो। सेना का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ इमरजेंसी या आपदा में होता है। चाहे वो सामरिक आपदा हो, सांस्कृतिक आपदा हो या कोई किसी भी प्रकार का आपदा हो, सेना हमारी स्वाभिमान और शौर्य का प्रतीक है।
सुप्रियो ने कहा कि आप उनको यदि इस तरह से इस्तेमाल करेंगे, तो लगता है कि भारत सरकार का यह निर्णय बताता है कि पूरी सरकारी तंत्र अब ध्वस्त हो चुका है। सरकार चलती है इकबाल पर, भरोसे पर। अभी तो परीक्षा संपन्न हुआ है। पिछली बार परीक्षा हुई थी मई में, तो उसके एक दो दिन बाद सारा खेल समझ में आया था। यदि मान लीजिये कि फिर दो-तीन दिन बाद फिर वहीं स्थिति आ गई तो क्या हम ऐसे हालात में वायु सेना को दोषी ठहरा सकते हैं।
सुप्रियो ने कहा कि हमने अपनी प्रतिष्ठा को दांव पर लगा दिया। कल ये गंभीर बात हो गई। ये उतना आसान सब्जेक्ट नहीं हैं कि अब कोई सवाल नहीं कर पाये। अब तुरंत भाजपा बोलेगी कि अब देखो। ये बहुत बड़ा चक्र है। उसका उद्भेदन नहीं हो पा रहा। हर स्तर पर देश को धीरे-धीरे न बेचा जा रहा, बल्कि खत्म किया जा रहा। लोगों के आस्था के साथ चाहे वो लोकतांत्रिक, आध्यात्मिक या संस्थागत आस्था हो, सब पर लगातार प्रहार हो रहा है। इसलिए ये गंभीर मुद्दे को आज हमलोगों ने उठाया है।
सुप्रियो ने कहा कि 17 नीट के छात्र मई से जुलाई तक आत्महत्या कर चुके है। 22 लाख छात्र परीक्षा दे रहे हैं। क्यों मानव संसाधन अपने कुर्सी पर विद्यमान है। कल के बाद तक आज सुबह जाकर त्यागपत्र दे देना चाहिए था। जहां मंत्री रहते हैं, वहां कम से कम 50 बसें जो आईटीबीपी और सीआरपीएफ की थी, उनके द्वारा उस क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। आखिर किस जमाने में हमलोग जी रहे हैं और ये एआई की बात कर रहे हैं। लेकिन बेसिक एक पेपर की हिफाजत ये नहीं कर पा रहे हैं। धिक्कार है ऐसे मंत्रालय पर।
