बुद्धिजीवियों ने जननायक का. महेन्द्र सिंह के शहादत दिवस को संकल्प दिवस के रुप में मनाया

भाकपा माले, रांची मुख्यालय में, का. महेन्द्र सिंह के शहादत दिवस पर आयोजित संकल्प दिवस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मानवाधिकार व नागरिक-सामाजिक आंदोलन के प्रतिनिधियों व सामाजिक जन कार्यकर्त्ताओं तथा वाम दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत का. महेंद्र सिंह की तस्वीर पर माल्यार्पण व एक मिनट की मौन संकल्प – श्रद्धांजलि से की गयी।

भाकपा माले, रांची मुख्यालय में, का. महेन्द्र सिंह के शहादत दिवस पर आयोजित संकल्प दिवस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मानवाधिकार व नागरिक-सामाजिक आंदोलन के प्रतिनिधियों व सामाजिक जन कार्यकर्त्ताओं तथा वाम दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत का. महेंद्र सिंह की तस्वीर पर माल्यार्पण व एक मिनट की मौन संकल्प श्रद्धांजलि से की गयी।

विषय प्रवेश करते हुए अनिल अंशुमन ने महेंद्र सिंह की संघर्षशील जन राजनीतिक प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र के तहत की गयी उनकी हत्या के असली दोषियों को पकड़ने की बजाय केस को रफादफा किया जाना, सत्ता की संलिप्तता को साफ दर्शाता है । आज से पूरे प्रदेश में भाजपा हटाओ, देश व झारखंड बचाओ अभियान के नए चरण की शुरुआत की जाएगी । 

वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्त्ता फादर स्टेन स्वामी ने कहा कि जब देश व प्रदेश की वर्तमान सरकारों द्वारा संविधान व लोकतन्त्र पर जिस प्रकार से हमले किए जा रहें हैं, ऐसे हालात में महेंद्र सिंह जी बहुत याद आ रहें हैं। वे होते तो इसके खिलाफ होनेवाले जन प्रतिरोध का आज नज़ारा ही कुछ और होता।

महेंद्र सिंह के जन अभियानों के अंतरंग साथी वरिष्ठ पत्रकार फैसल अनुराग ने उनके विभिन्न जन आंदोलनों की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि महेंद्र जी ने जिस ज़िंदगी के ज़रूरी सवालों को लेकर संयुक्त मोर्चेका आह्वान किया था, उसकी ज़रूरत सबसे अधिक हो गयी है, क्योंकि जिस तरह से आज पूरे देश के साथ-साथ आदिवासियों पर संकट बढ़ा है, महेंद्र जी द्वारा खड़े किए जानेवाले सक्रिय जन दबाव ही कारगर जवाब बन सकता है।

महेंद्र जी के साथ विभिन्न आंदोलनों में साथ रहीं जन आंदोलनकारी द्यामानी बारला ने महेंद्र सिंह के अरमानों के झारखंड नवनिर्माण के संघर्षों को मजबूत करने के लिए संसद और विधान सभाओं में जनता की मजबूत आवाज़ भेजने की तैयारी पर ज़ोर देने का आह्वान किया, साथ ही महेंद्र जी के आदर्शों को ज़मीन पर लागू करने की आवश्यकता बताई।

सरकार द्वारा सामाजिक कार्यकर्त्ताओं पर थोपे गए राजद्रोह के मुकदमे का सामना कर रहे वरिष्ठ लेखक कुमार विनोद ने देश के संविधान और लोकतान्त्रिक व्यवस्था को बचाने के लिए महेंद्र सिंह की संघर्ष परंपरा को आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया।

सीपीआई के राज्य नेता का. केडी सिंह ने महेंद्र सिंह के कम्युनिस्ट चरित्र और एक विधायक के रूप में उनकी जनप्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि वे विरोधियों तक के सर्वमान्य नेता रहे। जिन फासीवादी ताकतों ने उनकी हत्या कराई, आज उन्हें देश व प्रदेश की सत्ता से हटाना ही, उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

युवा जन आंदोलनकारी जेरोम जेराल्ड ने उन्हें राज्य के आदिवासियों के अधिकारो और जल जंगल ज़मीन बचाने के आंदोलनों का सक्रिय प्रवक्ता बताया। माले राज्य कमेटी सदस्य युवा नेता नदीम खान ने नए और वाम विकल्प की तैयारी की आवश्यकता बताते हुए कहा कि पता नहीं जनता पर संकट के समय बाकी सभी पार्टियां गायब क्यों हो जाती हैं ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ झारखंड आंदोलनकारी व एआईपीएफ़ के राज्य नेता बशीर अहमद ने वर्तमान फासीवादी राज के खिलाफ महेंद्र सिंह के रास्ते, नए विकल्प बनाने के साथ साथ महेंद्र सिंह के विचारों से नयी पीढ़ी को अवगत कराने व राजधानी में उनकी मूर्ति स्थापना का प्रस्ताव दिया।

संकल्प दिवस कार्यक्रम को आंदोलनकारी जुगल पाल, सीपीएम नेता प्रफुल्ल लिंडा, सामाजिक कार्यकर्त्ता राकेश रोशन कीड़ो, झारखंड जन संस्कृति मंच के राज्य संयोजक ज़ेवियर कुजूर, ऐपवा नेता सिंगी खलखो, अधिवक्ता अजब लाल सिंह, मजदूर नेता जगरन्नाथ उरांव, आलोका, भोजन के अधिकार से जुड़े आकाश,  व झामस के सुदामा खलखो समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया । कार्यक्रम में कामगार महिलाओं की विशेष उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में सर्वसम्मति से लिए गए प्रस्तावों में, राजनीतिक षड्यंत्र के तहत की गयी का. महेंद्र सिंह की हत्या की अविलंब उच्चस्तरीय जांच कराने, राज्य में जन आंदोलनकारियों पर राज्य दमन रोकने, सामाजिक कार्यकर्त्ताओं पर लगाए गए राजद्रोह के मुकदमे की अविलंब वापसी, गोड्डा में अदानी कंपनी द्वारा आदिवासियों को उजाड़े जाने व पलामू मंगल डैम का पानी झारखंड को अधिक नहीं दिये जाने पर प्रोजेक्ट बंद करने तथा राज्य में भूख से हो रही मौतों को रोकने के कारगर कदम उठाने इत्यादि की मांग की गयी।

Krishna Bihari Mishra

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