लोक कल्याण मार्ग पर छात्रों के आंदोलन को लेकर कांग्रेसियों द्वारा किये जा रहे धरना-प्रदर्शन के समय प्रियंका गांधी द्वारा आंख मारने की घटना, कांग्रेसियों व कुख्यात कांग्रेसी पत्रकार रवीश की कलई खोल दे रही है
ऊपर जो आप फोटो देख रहे हैं। वो भारत के महान व कट्टर कांग्रेसी व वामपंथी समर्थक पत्रकार, राहुल भक्त, वामियों और कांग्रेसियों में ईश्वर को देखनेवाले कई पत्रकारों में से एक मूर्धन्य रवीश कुमार के यू ट्यूब चैनल ‘रवीश कुमार ऑफिसयल’ से लिया गया है। जिस फोटो में कांग्रेस पार्टी की महान नेत्री प्रियंका गांधी वाड्रा अपने समर्थकों के बीच बैठी हैं और किसी को आंख मार रही है।
महान कांग्रेस भक्त व कट्टर वामी-कांग्रेसी समर्थक रवीश कुमार इस वीडियो को बड़ी प्रेम से चलाते हुए कहते हैं कि “कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर वहां से मार्च करते हुए लोक कल्याण मार्ग की तरफ पहुंचने लगे और धरना शुरु कर दिया। राहुल गांधी ने वहीं से ऐलान किया कि जब तक गृह मंत्री और प्रधानमंत्री का इस्तीफा नहीं होगा, यहां से नहीं हटेंगे। राहुल गांधी के इस ऐलान ने होश उड़ा दिये होंगे। क्योंकि उन्होंने ये अपील भी कर दी कि जो भी छात्रों के साथ हुई हिंसा को गलत मानता है। लोक कल्याण मार्ग पहुंचना शुरु कर दें।”
अब सवाल उठता है कि कांग्रेस भक्त व वामी के बैनरों में अपने ईश्वर को ढूंढनेवाला रवीश को ये कैसे पता लग गया कि राहुल गांधी के इन हरकतों से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के होश उड़ जायेंगे। दरअसल यही बयान स्पष्ट करता है कि रवीश कुमार की पत्रकारिता कांग्रेसी चाशनी से सराबोर रही है। नहीं तो किसी भी राजनीतिक दल का धरना प्रदर्शन किसका होश उड़ायेगा और किस का होश नहीं उड़ायेगा। इससे एक पत्रकार को क्या मतलब?
लेकिन जब पत्रकार किसी दल से जुड़ जाता है अथवा जिसका नमक खाया होता है। उसके जुबां से इस प्रकार की भाषा निकलती ही रहती है। इसमें कोई इफ-बट नहीं हैं। योगेन्द्र यादव, प्रणव रॉय, रवीश कुमार तथा एनडीटीवी में पूर्व में काम कर के निकले लोग, अजीत अंजुम तथा वायर को चलानेवाले लोगों की भाषा वहीं हैं, जो कांग्रेसियों और वामपंथियों की है। इसलिए इन लोगों को कोई अधिकार नहीं कि ये दूसरे को गोदी मीडिया कहकर गाली दे।
क्योंकि ये सभी राजीववाणी और राजीव दर्शन के प्रोडक्ट हैं। इंदिरा या संजयवाणी या इंदिरा या संजयदर्शन तो कह नहीं सकता, क्योंकि उस वक्त इन सब की पत्रकारिता में पैदाइश भी नहीं हुई होगी। उस वक्त इनके जैसे घटियास्तर के पत्रकार होंगे भी तो इक्के-दूक्के होंगे या उस वक्त जन्म ले रहे होंगे।
अब जरा देखिये। आंदोलन कहां हो रहा है। लोक कल्याण मार्ग पर। मुद्दा क्या है। छात्रों के साथ हुई हिंसा। ऐसे में तो सारे नेताओं का चेहरा आक्रोश से भरा होना चाहिए। उस जगह पर कोई हंसी-मजाक करता नजर आये, किसी को आंख मारता या आंख मारती नजर आये तो ऐसे आंदोलन पर तो सवाल उठेंगे ही। लेकिन इस रवीश ने इस पर सवाल नहीं उठाया कि प्रियंका इस महत्वपूर्ण घटने पर हो रहे आंदोलन में सीरियस न होकर, वो आम लोगों की तरह आचरण क्यों कर रही हैं। ये आंख क्यों मार रही हैं और अगर आंख मार रही हैं तो किसको आंख मार रही है? क्या ये सवाल नहीं उठना चाहिए?
ऐसे तो आजकल कांग्रेसियों में आंख मारने की चलन तो आम बात है। कभी राहुल गांधी भी संसद में आंख मार चुके हैं। जिसको लेकर काफी बवाल हुआ था और कुछ दिन पहले उनकी बहन प्रियंका ने छात्रों को लेकर हो रहे आंदोलन के समय आंख मारना शुरु कर दिया। तो ऐसे में छात्रों पर हुई हिंसक घटना को लेकर कांग्रेस कितना गंभीर है। कांग्रेस व वामी समर्थक पत्रकार कितने गंभीर है। कोई भी समझ सकता है। दरअसल इस पूरे प्रकरण पर सभी राजनीति कर रहे हैं। क्योंकि 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं और इसी को लेकर सभी राजनीतिक रोटी सेंक रहे हैं। लेकिन इसका ये कितना लाभ उठा पायेंगे। भगवान ही मालिक है।
