भाजपा कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता ने भाजपा के झारखण्ड बंद की हवा निकाली, पूरे प्रदेश में झारखण्ड बंद का कही कोई असर नहीं दिखा
कल छात्रों पर हुए लाठी चार्ज के विरोध में भाजपा ने आज झारखण्ड बंद का ऐलान किया था। लेकिन पूरे झारखण्ड में भाजपा के इस बंद का कोई खास असर नहीं दिखा है। झारखण्ड के प्रमुख शहरों में कुछ जगहों पर हालांकि भाजपा के कुछ स्थानीय नेता व कार्यकर्ता दिखे, लेकिन इस बंद का आम जनता की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला। कई लोगों को तो पता भी नहीं था कि आज भाजपा ने झारखण्ड बंद का आह्वान किया है।
इधर राजधानी रांची में भाजपा के बंद का आंशिक असर दिखा। सड़कों पर आम दिनों की तुलना में कम गाड़ियां चली। चूंकि प्राइवेट स्कूलों ने भाजपा के बंद को लेकर पहले से ही स्कूल बंद करने का ऐलान कर दिया था, तो प्राइवेट स्कूल और उनके द्वारा चलाई जा रही बसें आज कहीं नहीं दिखी, जिसके कारण आज सड़कों पर वाहनों की लगनेवाली जाम कहीं देखने को नहीं मिला। सरकारी स्कूलों-कॉलेजों में आम दिनों की तरह चहल-पहले देखने को मिली।
सरकारी व निजी कार्यालयों में आम दिनों की तरह काम हुए। व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले रहे। रांची के एक दो जगहों पर भाजपा के बड़े नेताओं को बंद कराते देखा गया। एक दो स्थानों पर कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर टायर जलाये। आज के बंद को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने बेहतर प्रबंध किया था। आम नागरिकों को आज के बंद से कही भी दिक्कत महसूस नहीं हुई।
इसी प्रकार से जमशेदपुर, धनबाद, डालटनंगज आदि शहरों में भी झारखण्ड बंद का कोई खास असर नहीं दिखा। व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले रहे। स्कूल-कॉलेज भी खुले रहे। सरकारी व निजी कार्यालयों में इन शहरों में भी उपस्थिति सामान्य दिखी। सड़कों पर वाहन आम दिनों की तरह दिखे। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि भाजपा द्वारा आज बुलाया गया झारखण्ड बंद कोई खास असर नहीं दिखा सका। उसका मूल कारण भाजपा कार्यकर्ताओं का निष्क्रिय रहना रहा।
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि केवल रांची में भाजपा के कई मंडल है। जहां इनके कार्यकर्ताओं की संख्या सैकड़ों में हैं। अगर ये कार्यकर्ता सही मायनों में अपने-अपने मंडल में निकल जाते, तो बंद का असर दिखना तय था। चूंकि भाजपा के कार्यकर्ता आज पूरी तरह से निष्क्रिय थे। ऐसे में भाजपा के आज के झारखण्ड बंद का हवा निकलना तय था। विद्रोही24 ने जब पूरे रांची का जायजा लिया तो उसने देखा कि सारे व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले थे। कही भी भाजपा कार्यकर्ताओं का समूह नहीं दिखा। जो भी दिखे, वे अहले सुबह दिखे, वो भी छिटपुट स्थानों पर।

स्वयं प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू रातू रोड के पास दिखे जरुर, लेकिन वहां कार्यकर्ताओं से ज्यादा मीडियाकर्मी उनकी बाइट लेने में ज्यादा मशगूल दिखे। पूर्व राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश अलबर्ट एक्का चौक पर दिखे जरुर, पर उनके साथ कार्यकर्ताओं का हुजूम नहीं था, बल्कि दो-चार भोटिया मजदूर थे, जो ललित ओझा के साथ वहां पहुंचे थे। मतलब साफ है कि आज के भाजपा के झारखण्ड बंद का हवा किसी ओर ने नहीं निकाला, बल्कि उनके कार्यकर्ताओं ने ही निकाल दी। क्योंकि वे अपने मंडलों से निकले ही नहीं।
