रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों द्वारा इस्तीफा देने-नामंजूर करने की नौटंकी शुरू, उधर पंकज सोनी को बचाने में लगे उससे लाभ लेनेवाले/NGO चलाने वाले पत्रकारों के समूह

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जैसे ही कल यानी 04 जून को रांची से प्रकाशित सांध्य दैनिक “बिरसा का गांडीव” ने रांची प्रेस क्लब और एक एनजीओ मिशन ब्लू फाउंडेशन के पंकज सोनी के करतूतों की बखिया उधेड़ी, पूरे सोशल मीडिया में बवाल मच गया, रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों में खलबली मच गई, क्योंकि उनका असली चेहरा लोगों के सामने आ चुका था, करीब-करीब सभी मीडियाकर्मियों ने इस कृत्य की घोर निन्दा की और जमकर अपने विचार सोशल साइट पर प्रकट कर दिये।

इनमें कुछ ऐसे भी पत्रकार थे, जो एनजीओ चलाकर अपना गुजारा करते हैं, तथा समय-समय पर भाजपा व अन्य गठबंधनों की सरकार की सेवा करते हैं और उसके एवज में माल भी बटोरते हैं, समय-समय पर ज्ञान भी बघारते हैं, हम आपको बता दें कि हाल ही में इन्हीं में से एक पत्रकार की जमकर लोगों ने फजीहत की थी, बाद में उसने चुपके से अपने लिखे पोस्ट को फेसबुक से हटा दिया था, तब तक उसका चेहरा लोगों ने पढ़ लिया था, उस पत्रकार ने इस प्रकरण पर भी अपना मुंह खोला है, तथा अपने जैसे लोगों को बचाने के लिए कूद पड़ा है।

एक और पत्रकार जो हाल ही में एक पूर्व सांसद का आइटी सेल संभाल रहा था, फिलहाल पोर्टल में अपनी सेवा दे रहा है, भ्रष्टों को बचाने में अपना ज्यादा समय दे रहा हैं, तथा भोकाली कर रहा है, लेकिन जो सत्य जानते हैं, उन्हें पता है कि सत्य, सत्य होता है, वो आज न कल, लोगों के बीच में प्रस्फुटित अवश्य होता है।

कल जैसे ही बिरसा का गांडीव में रांची प्रेस क्लब के प्रांगण में खुले कोविड अस्पताल की बखिया उधेड़ी गई तथा मिशन ब्लू फाउंडेशन चलानेवाला पंकज सोनी का बयान छपा कि रांची प्रेस क्लब के लोग उगाही में लगे हुए हैं, पकंज सोनी को बचाने में रांची प्रेस क्लब के अधिकारी लग गये, कुछ लोगों का कहना है कि पंकज सोनी को बचाना, रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों की मजबूरी है, अगर वे उसे बचाने की कोशिश नहीं करेंगे, तो जाहिर हैं, वो अपना और मुंह खोलेगा, बदनामी रांची प्रेस क्लब की ही होगी।

यही कारण रहा कि इ-मेल के माध्यम से रांची प्रेस क्लब के संयुक्त सचिव जावेद खान ने इस्तीफा देने का नाटक रचा, जो सुबह होते ही, उसके इस्तीफे को प्रेस क्लब के महासचिव अखिलेश ने नामंजूर कर उसका नाटक समाप्त कर दिया, इसके पूर्व उस जावेद ने सोशल साइट फेसबुक पर मिशन ब्लू फाउंडेशन के पंकज सोनी की तारीफ करते हुए लिखा था कि जिस पंकज सोनी ने प्रेस क्लब में अस्पताल खोलकर पत्रकारों को संबल प्रदान किया है, क्या उन्होंने प्रेस क्लब के खिलाफ स्टेटमेंट दिया है? ऐसे कई प्रश्न है, जो बताते हैं कि जावेद के दिलों में किस प्रकार से पंकज सोनी राज किया करता था/है।

इधर अखिलेश कुमार सिंह, महासचिव प्रेस क्लब ने बिरसा का गांडीव के संपादक को पत्र लिखकर 24 घंटे के अंदर सारे तथ्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, साथ ही उसने बिरसा का गांडीव में छपे सारी बातों का खंडन भी कर दिया, यह कहकर कि अखबार में छपी सारी बातें भ्रमित करनेवाली है, जबकि बिरसा का गांडीव के संपादक अमर कांत ने विद्रोही24 को बताया कि अखबार में छपी एक-एक बात सत्य है, और जो पंकज सोनी ने बाते कही है, उसका रिकार्ड भी उनके पास है।

आश्चर्य इस बात की भी है कि इस पूरे प्रकरण पर जावेद का इस्तीफा जहां नामजूंर कर दिया गया तथा बिरसा का गांडीव के संपादक को तथ्य प्रस्तुत करने के लिए 24 घंटे का समय दे दिया गया, उसके बावजूद इस पूरे प्रकरण पर रांची प्रेस क्लब की ओर से कोई अधिकारिक बयान नहीं दिया गया है, और न ही रांची प्रेस क्लब के सदस्यों को संतुष्ट करने का प्रयास किया गया है कि आखिर इन सभी मैटरों पर रांची प्रेस क्लब का दृष्टिकोण क्या है?

जानकार बताते है कि रांची प्रेस क्लब अब कुछ भी कर लें, इस प्रकरण ने रांची प्रेस क्लब ही नहीं, या इनसे जुड़े सदस्यों का ही नहीं, बल्कि पूरे समाचार जगत में अपना काम कर रहे पत्रकारों के चेहरे पर कालिख पुतने का काम किया है, जिसकी जितनी निन्दा की जाय कम है। कुछ का यह भी कहना है कि जब अस्पताल में कोई मरीज है ही नहीं, जैसा कि रांची प्रेस क्लब के अधिकारी या उसका समर्थन कर रहे पत्रकार कह रहे हैं, तो फिर अस्पताल को चलाने की आवश्यकता क्यों? इसे बंद क्यों नहीं कर दिया जाता, आवश्यकता ही क्यों हैं? जब सारे के सारे अस्पतालों में कोविड की बेडें खाली हैं, तो अलग से इसे अब भी चलाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही हैं, ये समझ से परे हैं और यही सारी संदेहों को जन्म दे रहा है, जिसका जवाब किसी के पास नहीं।

पंकज सोनी द्वारा यह कहा जाना कि उसने एक आध्यात्मिक संगठन से दो लाख रुपये लिये हैं, तो इस पर बुद्धिजीवियों का कहना है कि उक्त आध्यात्मिक संगठन के पैसे को गलत ढंग से हजम कर जाने की ताकत तो किसी में नहीं हैं, जिसने भी उक्त संगठन के साथ धोखा किया हैं, उसका परिणाम तो उसे ईश्वर अवश्य दे देगा, और इसके लिए उसे ज्यादा दिनों की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, क्योंकि उक्त आध्यात्मिक संस्थान के जनोपयोगी पैसों को हजम करने की ताकत आज तक किसी की नहीं हुई और न ही कोई ऐसा कर पायेगा।

इधर अभी-अभी सूचना मिली है कि प्रेस क्लब ने मिशन ब्लू फांउडेशन के पंकज सोनी को एक नोटिस थमाया है, जिसमें उन्हें कल यानी 6 जून को सायं पांच बजे तक अपनी बात रखने को कहा गया है? पंकज सोनी से पूछा गया है कि उसने जो प्रेस क्लब पर उगाही करने का आरोप लगाया है, ऐसे में क्यों नहीं, उसके हॉस्पिटल के एग्रीमेंट को कैंसिल करते हुए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाये।

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