सुप्रियो ने कहा देश को तीसरी अर्थव्यवस्था बतानेवाले, हैदराबाद में अपना पोल खुद ही खोल दिये, झामुमो की मांग देश त्याग करने को तैयार, पीएम और उनकी भाजपा मंडली भी त्याग करें और झामुमो की नौ मांगों को माने
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव व प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने आज संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश की आर्थिक स्थिति बद से बदतर है। जो लोग देश को तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था कह रहे थे। उन्होंने खुद ही इसका पोल हैदराबाद में खोल दिया। याद करिये, 2014 में जब देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे और जनाब गुजरात के मुख्यमंत्री तथा देश के प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार थे, तब देश का रुपया 60 डॉलर के बराबर था, उसी दौरान इन्होंने ही कहा था कि देश का करेंसी गिरता है तो वह राष्ट्र का अपमान होता है, देश की दुर्बलता को दिखाता है और आज स्थिति यह है कि एक रुपये की कीमत 95 डॉलर तक पहुंच गया।
सुप्रियो ने कहा कि सबसे ज्यादा देश भक्ति की बात मोदी जी करते हैं। चाहे नोटबंदी हो, चाहे कोरोनाकाल हो, जब संपूर्ण विपक्ष जिन बातों की ओर इशारा कर रहा था, उस समय बड़े-बड़े दावे किये जा रहे थे। पहले एक-एक हजार रुपये को बंद किया गया। बाद में उसकी जगह दो-दो हजार के नोट लाये गये। बाद में उसे भी अघोषित रुप से बंद कर दिया गया। उनकी सारी जो डींगे हैं, खासकर जो भाजपा का बड़बोलापन है, जैसे – अपने कारपोरेट मित्रों का सारा ऋण माफ कर देना, उन्हें देश से बाहर भेज देना, पीएसयू को समाप्त कर देने का चरित्र।
सुप्रियो ने कहा कि इसी पर जब हमलोग ये चीजें बार-बार कहते थे, तब धर्म के नाम पर, जाति के नाम पर बड़ी-बड़ी डींगे हांककर ये चुनाव जीतते थे। 2024 में उन्होंने कहा था कि इंडिया गठबंधन का सरकार आयेगा तो घर से सोना निकाल दिया जायेगा और अब खुद कह रहे है कि एक साल तक सोना मत खरीदो। हैदराबाद में जब वो ये बातें कह रहे थे कि डीजल-पेट्रोल का खपत कम करो, सोना मत खरीदो, खाने में तेल का उपयोग कम करो, देश में रासायनिक खाद नहीं है।
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार इस मुद्दे पर बुरी तरह से फेल है। ऐसे नेशन फर्स्ट मतलब राष्ट्र प्रथम, तो हमलोग भी तो कहते हैं कि राष्ट्र प्रथम। वे बोलते हैं, राष्ट्र के लिए त्याग करना, जैसे लगता है कि इस राष्ट्र से उनका कोई रिश्ता नहीं, उनका कोई दायित्व नहीं और सात प्वाइंट गिना देते हैं। हम भी इस राष्ट्र के नागरिक होने के नाते, उनके समक्ष नौ प्वाइंट रखना चाहते हैं तथा उनसे अपेक्षा रखते हैं कि वे हमारी इन बातों पर गौर करेंगे।
पहला – आप अपनी विदेश यात्राएं एक वर्ष तक स्थगित रखें, विशेष परिस्थितियों को छोड़कर। दूसरा – आप अपना रोड शो तथा भाजपा की रैलियां एक वर्ष तक स्थगित रखें। तीसरा – आप अपने कारपोरेट मित्रों का ऋण माफ करना बंद कीजिये। चौथा – आप अपने मंत्री परिषद् के सदस्यों तथा 22 भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के काफिले पर एक वर्ष तक रोक लगाएं। पांचवां – आप राष्ट्र के प्राकृतिक संसाधन जैसे जल, जंगल एवं जमीनों को अपने करीबी कारपोरेट मित्रों को उपहार स्वरूप देना बंद करें। छठां – भारत के मध्यम एवं लघु उद्योगों को समवर्द्धित करते हुए देश के उत्पादित वस्तुओं को बढ़ावा दें।
सातवां – आप विदेशी खाद्य भंडारण को समाप्त कर देशी कृषि उत्पाद और खाद्य वस्तुओं पर एमएसपी लागू करें। आठवां – आप सोना न खरीदने की बात कर स्त्रीधन को स्थगित करने की बात कर रहे हैं, क्योंकि हमारे समाज में किसी भी मांगलिक कार्य में सोना विशुद्ध रूप से स्त्रीधन होता है। स्त्रीधन पर डाका न डालें। नौवां – आप अप्रत्यक्ष रूप से देश में पुनः लॉकडाउन जैसी आपातकाल थोपना चाहते हैं, ताकि लोगों को रोजगार छीनें और विद्यार्थियों की विद्या बाधित हो। ऐसा करना बंद करिये।
सुप्रियो ने कहा कि देश आर्थिक रूप से कंगाल हो चुका, हम छठी अर्थव्यवस्था पर आकर ठहर गये हैं। हम से ऊपर छोटा सा देश साउथ अफ्रीका, जापान चला गया, जर्मनी पहले से ऊपर था, हमारे ऊपर फ्रांस है। कहां से आपके पास आता है, संसाधन तेल व गैस। बंगाल में जब चुनाव हो रहा था तो लाखों लोगों के लिए गैस पर बिरयानी और मछली तक पक रहे थे। ये सभी ने देखा। वो गैस कहां से आ गया और कंज्यूमर को गैस क्यों नहीं मिलता। आप सदन में कुछ और बाहर कुछ और बोलते हैं।
सुप्रियो ने कहा कि आपने तो आपातकाल का घंटी बजा दिया। देश आप से नहीं संभल रहा। बहुत हुई महंगाई की मार, गद्दी छोड़ो मोदी सरकार। केन्द्र सरकार की नीतियों के कारण देश में हाहाकार और भूखमरी की स्थिति आ गई। ये सोची-समझी साजिश है। आप अपना कटौती करिये। आपके लिए अलग नियम और जनता के लिए अलग नियम। आपकी विलासिता अब जनता के पैसे से नहीं चलेगी। भाजपा को भी हिसाब देना पड़ेगा।
