सुदेश महतो का दावा एमएमडीआर अधिनियम को लेकर झामुमो अपने कथित घोटाले को छिपाने, राजनीतिक लाभ उठाने, जनभावनाओं को उभार कर टकराव पैदा करने के लिए आंदोलन और नाकेबंदी की बात कर रही है
आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने पार्टी प्रधान कार्यालय, हरमू, रांची में आयोजित मीडिया संबोधन में एमएमडीआर अधिनियम, मिनरल बेयरिंग लैंड सेस, डीएमएफटी फंड तथा राज्य सरकार के बजट व्यय को लेकर पार्टी का पक्ष रखा। इस अवसर पर पार्टी के केंद्रीय प्रमुख प्रवक्ता श्री देवशरण भगत भी उपस्थित थे।
सुदेश कुमार महतो ने कहा कि झारखंड राज्य निर्माण का आंदोलन मूल रूप से जल, जंगल, जमीन और खनिज जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इस क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर में समृद्धि लाने के उद्देश्य से किया गया था। आज भी झारखंड के खनिज संसाधनों का सबसे पहला लाभ खनिज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एमएमडीआर अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों से ऐसा प्रतीत होता है कि सर्वोच्च न्यायालय से राज्य को मिले अधिकार के तहत झारखंड सरकार अब मिनरल बेयरिंग लैंड पर स्वतंत्र रूप से सेस नहीं लगा सकेगी। हालांकि, इसी अधिनियम की धारा 9D में प्रावधान है कि भारत सरकार कुछ शर्तों एवं प्रतिबंधों के अधीन राज्य सरकार को यह सेस लगाने की अनुमति दे सकती है। आजसू पार्टी ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि खनिज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष योजनाएं संचालित करने की शर्त के साथ राज्य सरकार को सेस लगाने की अनुमति प्रदान की जाए।
श्री महतो ने कहा कि ऐसा नहीं होने पर राज्य सरकार खनिज क्षेत्रों से अर्जित राजस्व का उपयोग अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कर सकती है। डीएमएफटी फंड के उपयोग के लिए स्पष्ट शर्तें निर्धारित हैं, इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा इन शर्तों का उल्लंघन किया गया। लगभग 10,000 करोड़ रुपये के डीएमएफटी फंड में घोटाले की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि सरकार का चाल, चरित्र और चेहरा झारखंडियों के हित में नहीं है। अवैध खनन, नौकरियों की बिक्री और शराब घोटाले जैसे आरोप सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं और इन पर अंकुश जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आजसू पार्टी की स्पष्ट मांग है कि राज्य सरकार को सेस लगाने का अधिकार दिया जाए, लेकिन यह शर्त भी निर्धारित हो कि इस राशि का उपयोग केवल खनिज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के कल्याण और विकास के लिए किया जाएगा। श्री महतो ने कहा कि खनिज क्षेत्रों के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पोशाक, किताबें और छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाए। कुपोषित बच्चों एवं महिलाओं के लिए पौष्टिक आहार, बेहतर अस्पताल तथा हर घर में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाए। इन योजनाओं के माध्यम से ही खनिज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन में समग्र सुधार लाया जा सकता है।
झामुमो सेस का विरोध क्यों कर रही है, यह भी स्पष्ट करे
आजसू केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा सेस का विरोध दूसरे कारणों से कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि झामुमो सरकार में पुलिस के संरक्षण में अवैध खनन का कार्य बिना रोक-टोक जारी है। सरकार वैध तरीके से उत्पादित होने वाले कोयले को महंगा करना चाहती है, ताकि काले बाजार में कोयले का दाम बढ़े और अवैध कोयला उत्पादन के माध्यम से अवैध कमाई का रास्ता तैयार हो।
उन्होंने कहा कि सेस लगाने से पहले कोयला उत्पादन में वार्षिक वृद्धि लगभग आठ प्रतिशत थी, लेकिन सेस लगाने के बाद कोयला उत्पादन की वृद्धि दर घटकर दो प्रतिशत रह गई। उन्होंने कहा कि यह स्थिति इस बात का संकेत है कि सरकारी तंत्र के संरक्षण में अवैध कोयला उत्पादन को बढ़ावा मिला। सेस लगाने के अधिकार को हटाए जाने के कारण ही झामुमो इस मुद्दे पर तिलमिलाई हुई है।
बजट खर्च के आंकड़े सरकार के दावे की पोल खोलते हैं
सुदेश कुमार महतो ने कहा कि झामुमो सरकार का यह दावा कि सेस नहीं लगाने से राज्य की विकास योजनाओं के लिए राशि की कमी हो जाएगी, पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में बजट राशि के उपयोग की स्थिति को देखें तो सरकार अपने कुल बजट की लगभग 25 प्रतिशत राशि खर्च ही नहीं कर पाई।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास, जहां राज्य की लगभग 80 प्रतिशत आबादी रहती है, अपने बजट की मात्र 40 प्रतिशत राशि खर्च कर पाया। आदिवासी कल्याण विभाग आदिवासियों के कल्याण के लिए बजट में निर्धारित राशि का मात्र 52 प्रतिशत खर्च कर पाया। पेयजल विभाग ने मात्र 56 प्रतिशत और स्वास्थ्य विभाग ने 78 प्रतिशत राशि खर्च की।
उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार के पास विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध बजट की राशि ही खर्च करने की क्षमता नहीं है, तो फिर राशि की कमी का बहाना क्यों बनाया जा रहा है? श्री महतो ने कहा, कभी धन की कमी नहीं होती, कमी नीयत की होती है। जिन विभागों में कमीशनखोरी का बोलबाला है और जहां से राज्य के मुखिया के लिए धन की उगाही हो रही है, वहां बजट का 90 प्रतिशत से अधिक खर्च हो रहा है। उन्होंने कहा कि झामुमो अपने कथित घोटालों को छिपाने के लिए आंदोलन और नाकेबंदी की बात कर रही है तथा राजनीतिक लाभ के लिए जनभावनाओं को उभारकर टकराव का वातावरण तैयार करना चाहती है।
आजसू संवाद और सहयोग के पक्ष में
आजसू केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा कि आजसू पार्टी खनिज क्षेत्र में रहने वाले लोगों की बेहतरी तथा झारखंड एवं झारखंडियों के हितों के लिए सहयोग और संवाद की बात कर रही है। उन्होंने कहा, अगर झामुमो की नीयत साफ है तो राज्य सरकार तथ्यों के साथ भारत सरकार से बात करे और अपना पक्ष रखे। आजसू डीएमएफटी के पैटर्न पर सेस लगाने के राज्य सरकार के अधिकार और उस राशि के उपयोग का पक्षधर है, बशर्ते उसका लाभ सीधे खनिज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिले।
