झारखण्ड में कनफूंकवों की बल्ले-बल्ले…

झारखण्ड में कनफूंकवों की हर जगह बल्ले-बल्ले है। कनफूंकवों का यहां दो ग्रुप है – एक बड़ा कनफूंकवा और दूसरा छोटा कनफूंकवा। बड़ा कनफूंकवा सीधे सीएम के टच में होता है और छोटा कनफूंकवा, बड़े कनफूंकवों के टच में होता है। इन दिनों छोटा कनफूंकवा मस्त है,

झारखण्ड में कनफूंकवों की हर जगह बल्ले-बल्ले है। कनफूंकवों का यहां दो ग्रुप है – एक बड़ा कनफूंकवा और दूसरा छोटा कनफूंकवा। बड़ा कनफूंकवा सीधे सीएम के टच में होता है और छोटा कनफूंकवा, बड़े कनफूंकवों के टच में होता है। इन दिनों छोटा कनफूंकवा मस्त है, क्योंकि छोटा कनफूंकवा जो कह रहा है, वो बड़ा कनफूंकवा सीएम तक बात पहुंचाकर, काम करा दे रहा हैं। ये छोटे-बड़े कनफूंकवे इतने बुद्धिमान है कि पूछिये मत। एक से एक राय-मशविरा राज्य के मुख्यमंत्री और उनसे जुड़े टॉप के कनफूंकवों को देते रहते है। ये कनफूंकवे अब यत्र-तत्र-सर्वत्र दीख रहे है। इन दिनों इनके मनोबल और उत्साह इतने बढ़ गये है, कि वे अपने आगे किसी को समझ ही नहीं रहे। सीएम भी इन दिनों प्रसन्न है, और अपने कनफूंकवों का समय-समय पर उत्साहवर्द्धन कर रहे है, उन्हें लग रहा है कि उनका इमेज बहुत तेजी से बढ़ रहा है, पर उनका इमेज कितना बन रहा है? वह तो राज्य की जनता बहुत अच्छी तरह समझ चुकी है, वो तो बस बटन दबाने का इंतजार कर रही है…

जरा कनफूंकवों से जुड़ा नया मामला देखिये

एक बड़े कनफूंकवे का बहुत ही प्रिय छोटा कनफूंकवा, बड़े प्यार से बड़े कनफूंकवे को कुछ दिन पहले कहा कि आइपीआरडी मीडिया के नाम से जो व्हाट्सअप ग्रुप बना है, उसमें झारखण्ड के सीएम रघुवर दास का दैनिक कार्यक्रम न दी जाय, क्योंकि सीएम रघुवर दास के दैनिक कार्यक्रम इसमें दे दिये जाने से मीडिया के द्वारा उन तक बातें पहुंच जाती है, जो सीएम के घुर विरोधी है और फिर वे सीएम का विरोध करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाने लग जाते है। लीजिये इतना ही कहना था कि फिर क्या था? बड़े कनफूंकवे ने तुरंत आदेश दिया कि चार जुलाई से सीएम के दैनिक कार्यक्रम आइपीआरडी मीडिया के नाम से बने व्हाट्सअप ग्रुप पर नहीं दिये जाये और फिर उस दिन से यानी 4 जुलाई से सीएम का दैनिक कार्यक्रम आइपीआरडी मीडिया व्हाटसअप ग्रुप में आना बंद हो गया।

बुद्धिहीन हैं कनफूंकवे

अब आप ही बताये कि इन मूर्खों को कौन बताएं कि जिन्हें विरोध करना है या जिन्हें समर्थन करना है, उन्हें आइपीआरडी मीडिया ग्रुप से ही पता चलेगा, कि और भी संसाधन है, संचार के, जिसके द्वारा विरोधियों और समर्थकों को पता चलना ही है, चाहे जो हो जाये, पर करना क्या है?  कनफूंकवे जो ठहरे, उससे ज्यादा उनकी औकात नहीं, उन्होंने अपना काम कर दिया। इधर एक नयी कंपनी आयी है, वही लखटकिया कंपनी, जिसे करोड़ों का आर्डर दिया गया है, सीएम का ब्रांडिंग करने, सीएम का वह ब्रांडिंग कितना अच्छा से कर रही है, वह तो अब तक उसके द्वारा निकाली गयी तीन विज्ञापन ही बता रही है कि सीएम की लोकप्रियता कितनी जल्दी, वह भी धड़ाम से नीचे आयेगी? पर हमें क्या है? हम तो पत्रकार है, आइना दिखायेंगे, देखिये आप अपना चेहरा इस आइने में कैसा दीख रहा है? वह भी बिना किसी स्वार्थ के।

Krishna Bihari Mishra

Next Post

रस्सी जल गई पर बल नहीं गया

Sat Jul 8 , 2017
बड़ी ही लोकप्रिय लोकोक्ति है -  रस्सी जल गया, पर बल नहीं गया। यह लोकोक्ति बिहार के एक नेता लालू प्रसाद यादव पर खूब फीट बैठती है। इनके संवाद ऐसे होते है, कि इनके आगे फिल्मी दुनिया के सुप्रसिद्ध संवाद लेखक सलीम-जावेद की जोड़ी भी फेल हो जाये।

You May Like

Breaking News