सीता सोरेन फिर नाराज, विनोद पांडे पर लगाया आरोप, झामुमो सुप्रीमो को पत्र लिख इस मुद्दे पर संज्ञान लेने को कहा

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सीता सोरेन आजकल अपनी ही पार्टी झारखण्ड मुक्ति मोर्चा से नाराज चल रही है। ऐसे भी उनकी यह नाराजगी कोई नई नहीं है। वे समय-समय पर विभिन्न कारणों से कभी न कभी नाराज रही हैं और इसे लेकर पार्टी थोड़ा असहज भी हुई है। अब चूंकि पार्टी राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभरी है, सत्ता में है। कांग्रेस और राजद के सहयोग से झारखण्ड में एक अच्छी पकड़ बना ली है।

ऐसे में सीता सोरेन का फिर नाराज होना और झामुमो सुप्रीमो को पत्र लिखना, बताता है कि पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है और यही छोटी सी भूल झामुमो विरोधी दल के लिए च्यवनप्राश का काम कर जाता है, जैसा कि आज भाजपा के एक प्रवक्ता ने इस प्रकरण पर छीटाकशीं कर दी। बात भी सही है कि जब आप मौका देंगे तो लोग बोलेंगे ही, इसलिए किसी को बोलने का मौका ही नहीं दी जाये।

सीता सोरेन ने पत्र में लिखा है कि पार्टी महासचिव विनोद पांडे उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। जब भी वो कही जाती है और पार्टी कार्यकर्ता उनसे मिलते हैं तो उन पार्टी कार्यकर्ताओं को विनोद पांडे, पार्टी से ही निकाल देते हैं। सीता सोरेन ने अपने पत्र में लिखा है कि झामुमो को शिबू सोरेन और उनके पति स्व. दुर्गा सोरेन ने अपने खून से सींचा हैं, पर पार्टी के कुछ लोग अपनी जेबी संस्था बनाने से बाज नहीं आ रहे।

सीता सोरेन ने आगे लिखा है कि कुछ दिन पहले पार्टी के महासचिव एवं विधायक होने के नाते चतरा स्थित आम्रपाली परियोजना के विस्थापित आंदोलनकारियों के निमंत्रण पर वो सीसीएल के खिलाफ बैठक में शामिल होने के लिए चतरा गई थी। जहां विनोद पांडे के उकसावे पर पंकज कुमार प्रजापति के द्वारा फरमान सुनाया गया कि कोई पार्टी कार्यकर्ता उनके कार्यक्रम में भाग नहीं लें।

यही नहीं जो कार्यकर्ता हमसे मिलने आये, उन्हें पार्टी से बाहर निकाल दिया गया, जो कि बेहद अनुचित है। सीता सोरेन ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ विनोद पांडे ने केन्द्रीय कार्यालय के नाम कुछ लिखवाकर रखा है। सीता सोरेन ने इस पूरे मामले को संज्ञान में लेने का कहा है।

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