झारखंड में सरकारी कर्मियों के वेतन विसंगतियों पर उठ रहे सवाल! उच्चस्तरीय समिति गठित होने के बाद भी कल्याण, गव्य विकास और मत्स्य विभाग के कर्मियों को एमएसीपी का लाभ नहीं: अशोक कुमार सिन्हा
झारखंड के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मियों के वेतन विसंगतियों और सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन (एमएसीपी) का लाभ नहीं मिलने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। कल्याण विभाग, गव्य विकास विभाग, मत्स्य विभाग सहित कई अन्य विभागों के कर्मियों को अब तक एमएसीपी का लाभ नहीं मिल पाया है। इससे उनके बीच निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।
उक्त बातें झारखंड सरकार के गव्य विकास विभाग से सेवानिवृत जिला गव्य विकास पदाधिकारी अशोक कुमार सिन्हा ने कही। उन्होंने कहा कि कर्मियों का सवाल है कि जब वे वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं और वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए सरकार ने उच्चस्तरीय समिति का गठन भी कर दिया है, तो फिर उनके मामलों का समाधान कब होगा?
वित्त विभाग ने गठित की उच्चस्तरीय समिति
झारखंड सरकार के वित्त विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, विभिन्न सेवा संवर्गों की वेतन विसंगतियों, सेवा शर्तों में एकरूपता तथा एमएसीपी से संबंधित मामलों के निराकरण के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। अधिसूचना में उल्लेख है कि समिति समय-समय पर विभिन्न सेवा संघों द्वारा उठाई गई समस्याओं का अध्ययन कर राज्य सरकार को सुझाव एवं अनुशंसाएं सौंपेगी।
अधिसूचना में समिति के अध्यक्ष के रूप में राजस्व पर्षद के सदस्य का उल्लेख है। इसके अलावा भारतीय प्रशासनिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य शिक्षा सेवा तथा राज्य अभियंत्रण सेवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारियों को समिति में शामिल किया गया है। समिति में अविनाश कुमार सिंह, ओम प्रकाश साह, राज नारायण सिंह, जयंत कुमार मिश्रा और उमेश मेहता के नाम सदस्य के रूप में दर्ज हैं। समिति को विभिन्न सेवा संवर्गों की समस्याओं का अध्ययन कर सरकार को आवश्यक सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
समिति के गठन के बाद भी कर्मियों को राहत का इंतजार
समिति गठन का उद्देश्य कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना और विभिन्न विभागों की सेवा शर्तों में एकरूपता लाना है। लेकिन कर्मचारियों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि समिति की अब तक की कार्यवाही क्या है और उसकी अनुशंसाओं पर सरकार ने क्या निर्णय लिया है?
कल्याण विभाग, गव्य विकास विभाग, मत्स्य विभाग सहित अन्य विभागों के कर्मचारियों को एमएसीपी का लाभ नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कर्मियों का कहना है कि सेवा अवधि पूरी करने के बावजूद उन्हें नियमानुसार वित्तीय उन्नयन का लाभ पाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। यदि पात्र कर्मियों के मामले लंबित हैं, तो उनका समयबद्ध निष्पादन होना चाहिए।
दस वर्षों की सेवा के बाद भी लाभ को लेकर चिंता
कर्मियों के बीच यह भी चिंता है कि निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने के बाद भी वित्तीय उन्नयन का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है। हालांकि एमएसीपी का लाभ संबंधित नियमों, पात्रता और सेवा शर्तों के अनुसार दिया जाता है, लेकिन पात्रता पूरी करने वाले कर्मचारियों के मामलों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
कर्मचारियों का मानना है कि वेतन विसंगतियों और एमएसीपी से जुड़े मामलों का समय पर समाधान नहीं होने से उनका मनोबल प्रभावित होता है। लंबे समय तक मामले लंबित रहने से कर्मिर्यों को आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अधिकारियों की कार्यशैली पर भी उठ रहे सवाल
यह सवाल भी उठ रहा है कि जब राज्य सरकार सभी पात्र कर्मियों को नियमानुसार लाभ देने की मंशा रखती है, तो विभागीय स्तर पर मामलों के निष्पादन में देरी क्यों हो रही है? कर्मियों की शिकायत है कि फाइलों के लंबित रहने और विभागीय प्रक्रिया में देरी के कारण उन्हें अपने अधिकारों के लिए बार-बार कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता है।
ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित विभागों के अधिकारी लंबित मामलों की समीक्षा करें और नियमों के अनुरूप निर्णय लें। साथ ही, उच्चस्तरीय समिति की बैठकों, अब तक की प्रगति तथा अनुशंसाओं की स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि कर्मचारियों के बीच व्याप्त असमंजस दूर हो सके।
सरकार से कर्मचारियों को ठोस कार्रवाई की उम्मीद
सरकारी कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों और एमएसीपी से जुड़े मामलों का समाधान केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्मियों के मनोबल, कार्यक्षमता और प्रशासनिक व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए राज्य सरकार को चाहिए कि वह समिति की कार्यवाही की समीक्षा करे और पात्र कर्मचारियों को नियमानुसार लाभ दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए।
अब बड़ा सवाल यही है कि जब वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित हो चुकी है, तो कर्मचारियों को राहत देने के लिए ठोस निर्णय कब लिए जाएंगे? कल्याण, गव्य विकास, मत्स्य विभाग सहित अन्य विभागों के कर्मचारियों को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं के समयबद्ध समाधान का इंतजार है।
