पंजाब के CM अमरिन्दर और सभी कांग्रेसियों को ओड़िशा के CM नवीन पटनायक से कुछ सीखना चाहिए – ज्ञानेन्द्र नाथ

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक में जमीन -आसमान का फ़र्क़ होगा ये मुझे आज से पहले तक पता नहीं था। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला टीम ने तीन बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराकर जो इतिहास रचा, पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में पंहुची, उसे अमरिंदर सिंह पंजाबियों की जीत बताने की नीचता दिखा रहे हैं।

जबकि टीम की तैयारी से लेकर उसकी स्पॉन्सरशिप में निर्णायक भूमिका निभाने वाले नवीन बाबू ने टीम की जीत पर उसे ढेरों बधाई, आशीर्वाद और शुभकामनाएं दी। उन्होंने करोड़ों भारतीयों को ये तक पता नहीं चलने दिया कि वही इस टीम के प्रायोजक हैं, इसकी तैयारी में हर संभव मदद की है। माना कि पंजाब में चुनाव होने वाले हैं लेकिन एक कांग्रेसी मुख्यमंत्री का इतना नीचे गिर जाना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

लेकिन हर सफलता का श्रेय एक परिवार, धर्म या जाति ( समय के हिसाब से )को देने वाली कांग्रेस की यही संस्कृति है यही चरित्र है। 1928 से आज तक सफलता या विफलता के लिए कभी भी न तो किसी प्रान्त, न किसी जाति और न ही किसी धर्म की बात सुनी गई। कैप्टन अमरिंदर सिंह तुम तो सेना में रहे हो।

जैसे सैनिकों की पहचान सिर्फ़ ‘भारतीय सैनिक’ के रूप में है, वैसे ही खिलाड़ी या टीम सिर्फ भारतीय है। इसमें पंजाबी, बंगाली, गुजराती, मराठी या हिन्दू – मुस्लिम करने की नीचता मत दिखलाओ। सैनिकों और खिलाड़ियों से सेक्युलरिज्म और देशभक्ति सीख लोगे तो शायद तुम्हारा परलोक सुधर जाएगा। तुम इतनी छोटी और नीच बात सोच सकते हो ये तो किसी सिख खिलाड़ी ने भी सपने में भी नहीं सोचा होगा।

तीन बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराकर भारतीय महिला हॉकी टीम का सेमीफाइनल में पंहुचना किसी सपने के सच होने जैसा है। भारतीय टीम की इस जीत की जितनी तारीफ की जाय कम होगी। भारत की तीनों पंक्ति का तालमेल लाजवाब था और यही वजह थी कि ऑस्ट्रेलिया की बेहद सशक्त टीम भी लाख कोशिशों के बावजूद बराबरी तक नहीं ले सकी।

भारत की 1-0 की आज की जीत विश्व हॉकी में हमेशा याद रखी जायेगी। भारतीय टीम के हर खिलाड़ी को असंख्य बधाई एवं शुभकामनाएं। यह आलेख  हमारे गुरु व बिहार-झारखण्ड के वरिष्ठतम खेल पत्रकार श्री ज्ञानेन्द्र नाथ जी के फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है। श्री ज्ञानेन्द्र नाथ जी, हालांकि किसी परिचय के मोहताज नहीं, पर क्या करुं, मेरी अंगूलियां ने दो शब्द उनके बारे में लिख ही डाला।

Krishna Bihari Mishra

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