अपनी बात

परिमल नाथवानी भगवान की जीत से भाजपा, जदयू, लोजपा, आजसू, कांग्रेस ही नहीं, बल्कि झारखण्ड के प्रमुख समाचार पत्र व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार भी हो रहे लहालोट

झारखण्ड की राज्यसभा की एक सीट पर परिमल नाथवानी भगवान की जीत से भाजपा, जदयू, लोजपा, आजसू, कांग्रेस व अन्य दलों के विधायक ही नहीं, बल्कि राज्य के प्रमुख समाचार पत्रों व इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार भी लहालोट है। उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि उनके पांव जमीन पर न होकर आकाश में विचरण कर रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि परिमल नाथवानी भगवान की कृपा उन पर अवश्य बरसेगी और उनका जीवन इहलोक में सुख पाकर परिमल लोक में चला जायेगा। जहां ये मृत्योपरांत भी आनन्दित होकर विचरण करेंगे।

शायद यही भाव रहा होगा कि परिमल नाथवानी भगवान के श्रीमुख से उनकी जीत के बाद यह निकला कि मीडिया के साथ बातचीत करने में हमेशा उन्हें खुशी होती है! भारी प्रतिक्रिया, विचारशील सवालों और राज्यसभा में उनकी जीत के लिए शानदार कवरेज के लिए झारखंड मीडिया और सभी प्लेटफार्म पर राष्ट्रीय मीडिया के वे आभारी हैं। यहां की मीडिया के निरंतर समर्थन और उपस्थिति की गहराई से वे सराहना करता हैं – उनकी यात्रा का इतना अभिन्न हिस्सा होने के लिए मीडिया को धन्यवाद!

झारखण्ड के राजनीतिक पंडित तो साफ कहते हैं कि जिस दिन परिमल नाथवानी भगवान के मन में ये बातें हिलोरे मारने लगी थी कि उन्हें फिर से झारखण्ड को इस्तेमाल करना है। उनके मन में मार रही यही हिलोरे, यहां के उनके भक्त पत्रकारों के भी हृदय में उछाल मारने लगी। जैसे ही यहां के उनके भक्त पत्रकारों को पता चला, वे उनके एक झलक पाने को बेताब हो उठे। यह जानते हुए कि सत्ता पक्ष के पास दो सीटें निकालने के लिए पर्याप्त मत हैं। फिर भी कोई यह मानने को तैयार नहीं था कि परिमल नाथवानी भगवान नहीं जीतेंगे। सभी को लक्ष्मी पर अखंड विश्वास था कि लक्ष्मी कभी पराजित नहीं हो सकती। हुआ भी ऐसा ही।

इधर जैसे ही परिणाम निकला, एक मीडिया हाउस का मालिक उनका चरणरज छूने को बेताब हो उठा। वो भाजपा प्रदेश कार्यालय में जाकर परिमल नाथवानी भगवान के आगे नतमस्तक हुआ। उनके आशीर्वाद ग्रहण किये। परिमल नाथवानी भगवान ने भी उसे अभयदान दिया, भला शरणागत को कौन नहीं अभयदान देगा। इसी बीच कई चिलगोजों को इसकी जानकारी मिली। वे अपने कैमरामैन लेकर परिमल नाथवानी भगवान के रांची स्थित आश्रयस्थल पहुंच कर उनका आशीर्वाद लिया और स्वयं को धन्य किया।

कई पत्रकार से नेता बने लोग तो उछल गये। क्योंकि अब उन्हें विश्वास हो चला है कि परिमल नाथवानी भगवान उन्हें भूले नहीं होंगे। वे अपने भक्त को फिर से सेवा का मौका देंगे। कई भाजपा नेता तो इतने उछल रहे हैं कि उन्हें लगता है कि जब परिमल नाथवानी भगवान का यहां आश्रम खुलेगा, तो उनके लोग वहां जरुर लाभान्वित होंगे। इसलिए सभी परिमल नाथवानी भगवान की जय-जयकार कर रहे हैं। भजन गा रहे। भजन क्या है…

जय परिमल हरे, नाथवानी हरे

तू सबका कष्ट, क्षण में दूर करे

तेरे आगे, नेता-अधिकारी क्या

पत्रकार भी तेरे आगे शरण पड़े

जय परिमल हरे, नाथवानी हरे …

इधर भाजपा में ही कई ऐसे लोग है, जिनको इन सब से कोई मतलब नहीं। वे आज भी भाजपा को अपनी मां समझते हुए, उसके सम्मान के लिए वे सब कर रहे हैं। जिनके लिए वे जाने जाते हैं। भारतीय जनता पार्टी के शिखर पुरुष कड़िया मुंडा, जिन्हें पद्म भूषण तक प्राप्त है। लेकिन आज तक परिमल नाथवानी भगवान उनके घर तक नहीं पहुंचे हैं और न वहां पहुंचने की जरुरत समझी। कई लोग बताते है कि जो परिमल नाथवानी दो-दो बार झारखण्ड से राज्यसभा पहुंचने की बात करते हैं। वे आज तक भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू तक नहीं पहुंचे हैं।

राजनीतिक पंडितों के अनुसार, उन्हें कड़िया मुंडा के पास जाकर उनका आशीर्वाद लेने या उलिहातू में भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली जाकर दो फूल चढ़ाने से क्या मतलब? ऐसा करने से राज्यसभा की सीटों पर थोड़े ही जीत मिलती है। इन्हें जीत तो नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के कारण मिलती है।

यहीं कारण रहा कि परिमल नाथवानी भगवान के मुख से नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के नाम ही ज्यादा निकले। नितिन नवीन के नाम इसलिए निकले, क्योंकि वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, मजबूरी है, उनका नाम लेना। नहीं तो, परिमल नाथवानी भगवान ने झारखण्ड भाजपा के भी किसी नेता का नाम अपने मुंह से नहीं लिया। लेकिन फिर ये यहां के भाजपा विधायक उनके आगे-पीछे ऐसे उछल रहे हैं, जैसे लगता हो कि स्वर्ग से कोई देवता या देवदूत आ गया हो।

एक राजनीतिक पंडित का कहना है कि सभी का समय होता है। एक समय था – जिधर देखो कांग्रेस। यही कारण था कि रांची में जेपी का झोला ढोनेवाला नेता भी कांग्रेसी बन गया। कांग्रेसी बनते ही सांसद बन गया। सांसद बनते ही मंत्री बन गया और फिर भ्रष्टाचार का ऐसा दाग उस पर लगा कि अब वो चाहेगा भी कि कुछ बन जाये, तो नहीं बनेगा। अब वो अपनी बेटी को सांसद बनाने में जुटा है।

लेकिन उसमें कामयाब हो पायेगा। इसका मुझे शत प्रतिशत संदेह हैं। क्योंकि जो जैसा करता है, उसे ईश्वर वैसा ही कर्मफल के रूप में थमा देता है। इसलिए अभी भाजपा वाले जितना उछलना है, उछल ले। इनकी उछलनई पर यहां की जनता ने 2019 से ब्रेक लगाना शुरु कर दिया है। देखते ही देखते ये नीचे चलते जा रहे हैं और नीचे जायेंगे। बस चिंता मत करिये। क्योंकि मैं बोल रहा हूं। विद्रोही बोल रहा है – वृथा न होहिं देवरिषि बानी।

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