राजनीति

पाकिस्तान की 70 साल की उपलब्धि, बना आंतकवादियों को पनाह देनेवाला देश

पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देनेवाला देश है, यह उसकी 70 साल की सबसे बड़ी उपलब्धि है। इस बात को अमरीका ने स्वीकार कर लिया है। अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान अपनी धरती पर केवल आतंकवादियों को पनाह ही नहीं देता, बल्कि उसे वह अपने यहां प्रशिक्षण भी देता है। यह भारत के लिए बहुत बड़ी सफलता है, क्योंकि भारत कई मंचों पर, कई बार इस बात को रखा कि पाकिस्तान आंतकियों का पनाहगार है, वहां से आतंक का निर्यात किया जाता है, जिस पर रोक लगनी चाहिए, पर उसकी बात बार-बार अनसुनी कर दी जाती थी। आश्चर्य इस बात की है कि जिस आतंकवाद का शिकार अमरीका भी हुआ है, जहां वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को आतंकियों ने नेस्तनाबूद कर दिया, जिस पाकिस्तान के एबटाबाद में अल कायदा चीफ ओसामा बिन लादेन पकड़ा गया। उस अमेरिका को भी पाकिस्तान को आतंकवादियों को पनाह देनेवाला देश घोषित करने में बरसो लग गये। अब इसे अमेरिका में ट्रम्प का उदय कहे या नरेन्द्र मोदी की रणनीति, जिसमें उन्होंने सफलता प्राप्त कर ली।

भारत की उदारता का गलत फायदा उठाता था पाकिस्तान

याद करिये, कभी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि हम सब कुछ बदल सकते हैं, पर पड़ोसी नहीं, ये उनकी उदारता को परिलक्षित करती है, साथ ही भारत की उदारता को भी प्रदर्शित करती है, पर पाकिस्तान तो पाकिस्तान है, उसकी बुनियाद ही भारत से नफरत पर टिकी है। वहां कोई भी सरकार आये पर वह भारत के साथ मधुर संबंध नहीं बना सकती, क्योंकि उसकी सेना और आईएसआई इस बात की इजाजत नहीं देती। भारत में ऐसे सिरफिरे लोग जो कश्मीर मुद्दे पर भारत सरकार की नीति से इत्तेफाक नहीं रखते और वे कश्मीर को भारत का अंग नहीं मानते, उन्हें भी मालूम होना चाहिए कि कश्मीर समस्या का समाधान होने के बावजूद भी पाकिस्तान आपको कभी मित्र नहीं मानेगा, क्योंकि जो पाकिस्तान के बच्चों को इतिहास पढ़ाई जाती है, वह भारतीय बच्चों को पढ़ाये जानेवाले इतिहास से काफी भिन्न है।

भारत से नफरत करना पाकिस्तान के रग-रग में शामिल

पाकिस्तान भारत से कितना नफरत करता है, वहां की मीडिया कितना भारत से नफरत करती है, उसका नया वाकया सुनिये। दो दिन पहले पाकिस्तान के एक चैनल ने झूठी खबर प्रसारित कर दी कि चीन ने भारत पर हमला कर दिया और इस हमले में 158 भारतीय सैनिक मारे गये। यहीं नहीं उसने अपने संवाददाता का इस पर फोनो भी ले लिया और अपनी झूठी खबर को सही करने की भ्रामक कोशिश की।  जिसे चीन के ही सरकारी मीडिया ने नकार दिया, यह कहकर की इस प्रकार की फर्जी खबर को गंभीरता से लेने की जरुरत नहीं। पाकिस्तान की गुंडागर्दी देखिये, दो दिन पहले भारतीय सीमा पर स्थित स्कूलों पर गोले दागे, जिसके कारण 217 स्कूली बच्चे बुरी तरह फंसे रहे, जिन्हें बुलेट प्रुफ वाहनों से निकाला गया। ऐसी घटना जम्मू-कश्मीर में आम बात हो गयी हैं और ये सब हो रहा है चीन के इशारे पर, उसकी मदद से, क्योंकि पाकिस्तान की इतनी ताकत नहीं की वह सीधा मुकाबला कर सके। चीन हमेशा से पाकिस्तान के कुकर्मों और वहां के आंतकियों की मदद करता रहा है, यहां तक की संयुक्त राष्ट्र संघ में भी चीन ने पाकिस्तानी आंतकवादियों की खुलकर मदद की।

विश्व के कई देशों  में पाकिस्तान की गिरी साख

भारत पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान प्रायोजित आतंक का शिकार रहा है। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों को वहां हर प्रकार की सुविधा दी जा रही है तथा भारत विरोधी कार्य करने की उन्हें पाकिस्तान में खुली छूट है। आश्चर्य इस बात की भी है कि अमरीका ने जिन 60 संगठनों को ग्लोबल आतंकी माना है, उनमें से अकेले 13 पाकिस्तान में ही है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने जिस हाफिज सईद को आतंकी घोषित किया है, वह पाकिस्तान में खूलेआम रैलियां करता है और भारत को धमकी दिया करता है। अमेरिका के इस निर्णय ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है। निश्चय है कि इस प्रकार की घोषणा से अन्य देश भी पाकिस्तान पर दबाव बनायेंगे और उससे आतंक का मार्ग छोड़, शांति की ओर कदम बढ़ाने का पाठ पढ़ायेंगे, पर चीन की मदद से आतंकियों को मदद करनेवाला पाकिस्तान संभलेगा, वह अपनी हरकतें छोड़ेगा, कहना मुश्किल है, पर इतना जरुर तय है, कि जो मदद अमरीका द्वारा पाकिस्तान को दिया जाता था, अब उसमें कमी आयेगी। पाकिस्तान को पूरे विश्व स्तर पर परास्त करने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस नीति की तारीफ करनी होगी, कि उन्होंने पाकिस्तान को पूरे विश्व के सामने नंगा करने में सफलता हासिल की। पाकिस्तान को अब भी वक्त है, उसे स्वयं को संभालना चाहिए, वह जो समझ रहा है कि चीन की मदद से भारत में आतंक को बढ़ावा देकर, वह कश्मीर को पाने में सफलता प्राप्त कर लेगा, तो बस ये मुंगेरी लाल के हसीन सपने के अलावा कुछ भी नहीं। कहीं ऐसा नहीं कि 1971 के बांगलादेश की उदय की तरह बलूचिस्तान और सिंध उसकी हाथ से निकल जाये।

पाकिस्तान का दुर्भाग्य है कि जब से उसका निर्माण हुआ, वह नफरत के रास्ते में ही अपना वजूद ढूंढता रहा, जबकि भारत उससे अलग धर्मनिरपेक्षता के मार्ग पर उस जगह पहुंच गया, जहां आज लोग भारत की ओर देख रहे हैं, जहां हर मुददे पर भारत की पुछ हो रही है, विश्व के हर देशों में भारतीयों का अपना सम्मान है, जबकि पाकिस्तानी पूरे विश्व में शक की नजरों से देखे जा रहे हैं।