महिला दिवस के दिन एक महिला को अपने पति के घर में प्रवेश करने से रोका गया, तीन-चार दिनों तक भूखी प्यासी रही महिला वापस लौटी

उस दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस था, जिस दिन साश्वती बनर्जी अपने पति रत्नाकर कुमार सिंह के बोकारो स्थित आवास पर अपने हक व अधिकार के लिए पहुंची थी, पर ये क्या न तो उसके पति रत्नाकर कुमार सिंह ने और न ही रत्नाकर के भाई और उसकी भाभी ने साश्वती बनर्जी को घर के अंदर प्रवेश करने दिया, यानी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन जब पूरा विश्व महिलाओं के सम्मान की रक्षा की बात कर रहा था, उसी दिन बोकारो में ये घटियास्तर की घटना घट रही थी, एक महिला को उसके घर में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा था।

लोग बताते है कि रत्नाकर के आवास में उसके भैया और भाभी ने साश्वती बनर्जी को आया देख दरवाजा बंद करने में लग गये। इधर साश्वती बनर्जी ने फोन कर कांग्रेस नेतृ एवं नेशनल सिक्योरिटी एंड एंटी करप्शन प्रीवेंटिंग ब्रिगेड की महासचिव संगीता तिवारी को मदद की गुहार लगाई। संगीता तिवारी ने शीघ्र ही बोकारो महिला थाना से संपर्क साधा और साश्वती बनर्जी की मदद के लिए बोकारो आवास संख्या 1133 4G पहुंच गई। जहां उसे घर में प्रवेश कराने के लिए हरसंभव प्रयास करने लगी। बार-बार साश्वती बनर्जी के पति रत्नाकर कुमार सिंह के मोबाइल पर वह संपर्क साधी, पर उसका मोबाइल स्वीच ऑफ मिला।

सूत्र बताते है कि जब पीसीआर इंचार्ज ने रत्नाकर से संपर्क साधा तब उसने लगातार तीन घंटे तक पांच मिनट में पहुंचने की बात की पर उस दिन वह पूरी रात बीत जाने के बाद भी नहीं आया। इधर साश्वती बनर्जी भी घर में प्रवेश करने के लिए बाहर जमी रही, आखिर उसका संघर्ष रंग लाया, वह अपने अधिकार पाने में सफल रही। फिलहाल उसका पति रत्नाकर कुमार सिंह फरार है, पुलिस लगातार उससे संपर्क साधने में लगी है, पर सफलता नहीं मिल रही। इधर रत्नाकर कुमार सिंह का पूरा परिवार घर से बाहर है, इधर चार दिनों के बाद साश्वती बनर्जी थाना में इसकी पूरी सूचना देने के बाद, घर के बाहर नोटिस चिपकाकर रांची के लिए प्रस्थान कर गई, क्योंकि साश्वती बनर्जी रांची में ही काम करती है।

इधर सेक्टर चार थाना, बोकारो के थाना प्रभारी को दिनांक 11 मार्च को लिखे आवेदन में साश्वती बनर्जी ने इस बात का जिक्र किया है कि वह 11 मार्च को अपने व्यवसाय के सिलसिले में रांची स्थित अपने आवास जा रही है, जिसकी वह लिखित सूचना दे रही है। उसने अपने आवेदन में यह भी लिखा है कि वह अपने पति के बोकारो स्थित आवास में वह लगातार तीन दिनों तक भूखे-प्यासे रहकर अपने पति का इंतजार करने के बाद लौटने को विवश हुई है।