गांधी-शास्त्री जयंती पर जमशेदपुर में जदयू का सट्टेबाजी व ड्रग्स के दुष्प्रभाव पर विचार क्रांति सम्मेलन, वक्ताओं ने कहा नगर पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम चाहें तो रुक सकता है ड्रग-सट्टा का कारोबार
जदयू विधायक सरयू राय ने नगर पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों का आह्वान किया है कि वे ड्रग्स और सट्टेबाजी के अवैध धंधे को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने यह भी कहा कि समाज को ड्रग्स और सट्टेबाजी के चंगुल से बचाने के लिए यह जरूरी है कि परिवार में सख्ती हो। सरयू राय ने कहा कि शासन के शीर्ष पर बैठे लोग ही ड्रग्स और सट्टा जैसी कुरीतियों के लिए जिम्मेदार हैं।
यहां साकची स्थित धालभूम क्लब में गांधी-शास्त्री जयंती के मौके पर जदयू (युवा मोर्चा) के तत्वावधान में आयोजित सट्टेबाजी और ड्रग्स के दुष्प्रभाव पर विचार क्रांति सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि सरयू राय ने कहा कि जमशेदपुर जैसे आधुनिक शहर में सट्टेबाजी और ड्रग्स का धंधा बहुत बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि इस धंधे की जानकारी सभी को है। पुलिस का एक अदना सिपाही से लेकर पुलिस महानिदेशक तक को पता है कि कहां क्या चल रहा है लेकिन हो कुछ नहीं रहा। कुछ दिनों पूर्व उन्होंने जब ऐलान कर दिया था कि सट्टा एवं ड्रग्स के खिलाफ सम्मेलन करेंगे, तो उसके फौरन बाद कार्रवाई की गई और कई लोग पकड़े गए। उन्हें लगा कि यह कार्रवाई और आगे बढ़ेगी लेकिन कार्रवाई रुक गई। इसने संदेह को जन्म दिया। जब लिंक्स मिले थे, तब कार्रवाई और तेज होनी चाहिए थी। लेकिन कार्रवाई रोक दी गई इसका बहुत बड़ा अर्थ है।
सरयू राय ने कहा कि नगर पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों को यह भ्रम है कि वो सत्ता का केंद्र हैं। यह गलत है। सच तो यह है कि वो सत्ता के केंद्र हैं। सत्ता के केंद्र में सिर्फ देश की संसद और राज्यों की विधानसभाएं ही हैं। सदनों में नियम-कानून बनते हैं, बजट पास होता है। सेवा का काम नगर पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों में होता है। ऐसे में, अगर सट्टा और ड्रग्स के धंधे को रोकना है, तो शासन के इस तीसरे चरण (नगर पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों) को आगे आना होगा। ये आगे आएंगे तो इन कुरीतियों पर प्रभावी तरीके से नियंत्रण किया जा सकता है।
श्री राय ने कहा कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग नगर पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों को तवज्जो नहीं देते। जिस दिन इन्हें तवज्जो दिया जाना शुरु कर दिया जाएगा, उस दिन से सट्टा और ड्रग्स पर प्रभावी नियंत्रण देखने को मिलने लगेगा। उन्होंने कहा कि एक दौर में सियासी रुप से शक्तिशाली रहे एक सज्जन ने उन्हें फोन पर बताया कि कदमा और जुगसलाई क्षेत्रों में सट्टा और ड्रग्स का बहुत बड़ा कारोबार होता है। उन्होंने नाम भी बताए। उनका कहना था कि इन्हें थानों से संरक्षण मिलता है। इतना ही नहीं, शासन-प्रशासन के लोग भी इन्हें संरक्षण देते हैं।
सरयू राय ने सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक संजय रंजन सिंह के वाक्य को उद्धृत करते हुए कहा कि अब तो डार्क मोड नामक एक वेबसाइट आ गई है जो सट्टा कैसे चलाएं, इसके बारे में जानकारी देती है। यह नौजवानों के सामने एक ऐसा विकल्प पेश करती है, जिसमें ज्यादा मेहनत किये बगैर धन प्राप्ति की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इस तरह के वेबसाइट्स लोगों की जिंदगी को नरक बना रहे हैं।
श्री राय ने कहा कि एक घर का कोई भी सदस्य नशेड़ी हो जाए, सट्टाबाज हो जाए तो उसका दुष्प्रभाव पूरे घर पर पड़ता है। सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। अगर बच्चा भी कुसंस्कृति का शिकार हो जाए तो वह इस गंदी प्रवृति को आगे बढ़ा सकता है। इसलिए, यह जरूरी है कि घर में माता-पिता अपना खान-पान, आचरण-व्यवहार ठीक रखें और बच्चों को भी संस्कारयुक्त लालन-पालन दें।
सरयू राय ने कहा कि इस समस्या का समाधान हमें अपने परिवार में ही खोजने का प्रयास करना चाहिए। परिवार में जरूरत पड़ने पर सख्ती करने में भी कोई बुराई नहीं है। यह सख्ती सिर्फ एक घर में करने से काम नहीं चलेगा। यह सख्ती हमें अपने पड़ोसी के घर में, मोहल्लों में और पूरे समाज में करने की आवश्यकता है। गलत लोगों की संगत से हमें खुद भी दूर रहना होगा, बच्चों को भी दूर रखना होगा। तभी जाकर सट्टाबाजी और ड्रग्स के चंगुल से परिवार बच सकेगा।
जदयू विधायक ने कहा कि सट्टा और ड्रग्स का कारोबार छुपाये नहीं छुपता। चूंकि ग्राहक के रुप में आम लोग ही ड्रग्स खरीदते हैं, सट्टा खेलते हैं, इसलिए गोपनीयता न के बराबर रहती है। ऐसे में, हमें यह देखना होगा कि जिन थाना क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियां बढ़ रही हैं, वहां हमें ज्यादा फोकस करना होगा। लोगों में जागरुकता फैलाने की जरूरत होगी। सूचनाओं का आदान-प्रदान प्राथमिकता के आधार पर करना होगा। श्री राय ने कहा कि सट्टा और ड्रग्स के धंधे में पुलिस-प्रशासन को ही हर समय जिम्मेदार न ठहराएं। उन्होंने हर प्रशासनिक अफसर के खिलाफ एक तरह की ही राय बनाने की प्रवृति को नकारात्मक माना।
कार्यक्रम में रांची से आए सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक संजय रंजन सिंह ने कहा कि नशा करना बुरी बात नहीं, लेकिन यह देश के प्रति हो। नशा करना है तो भारतवर्ष के लिए करो, जैसा चंद्रशेखर आजाद और शहीद भगत सिंह ने किया था। इस तरह के नशा के लिए हमें आत्मिक बल की जरूरत होती है। जब तक हमारे आत्मिक बल को हम मजबूत करने का काम नहीं करेंगे, तब तक मजा नहीं आएगा। उन्होंने हाल ही में एक विमान के को-पायलट स्मित मच्छार की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्हें भी नशा था और उस नशे में ही उन्होंने फ्लाइट उड़ाई। लेकिन यह नशा देशभक्ति का था, जनसेवा का था। तभी तो आज विश्व भर में उन्हें रीयल हीरो कहा जा रहा है। आप भी ऐसा नशा क्यों नहीं करते?
इस सम्मेलन के संयोजक मनोज सिंह ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि नशे की लत शरीर को बर्बाद करती है। सट्टा हमारे विवेक को मारने का काम करता है। हमारे भीतर मेहनत करने वाली भावना की हत्या कर देता है। उन्होंने गांधी जी के भाषण का एक अंश सुनाया। जुए से इंसान चोर और बेईमान बनता है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के भाषण का एक अंश उद्धृत करते हुए कहा कि गरीबों की गाढ़ी कमाई नशे पर नहीं, बच्चों की पढ़ाई पर खर्च होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि ड्रग्स के कारण परिवार टूट रहे हैं। उन्होंने ड्रग्स और सट्टा के खिलाफ सरकार से जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का आग्रह किया।
मनोज सिंह ने कहा कि ड्रग्स और सट्टेबाजी को हराना होगा क्योंकि यह जिंदगी को, इंसानियत को हराने का काम कर रही है। हमें जन-जागरुकता अभियान चलाना होगा। प्रशासन से मदद लेनी होगी। उन क्षेत्रों को फोकस करना होगा, जहां ड्रग्स का कारोबार ज्यादा हो रहा है। इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि जिस ड्रग्स से परिवार के परिवार उजड़ रहे हैं, उसके समाधान के लिए हमें एड़ी चोटी का जोर लगाना होगा।
रांची से पधारे जदयू नेता धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि सट्टा और ड्रग्स, दोनों बुरी लतें हैं। इनका समाधान की शुरुआत सबसे पहले हमें अपने घर से ही करना होगा। बच्चों का ध्यान रखना होगा। अपना ध्यान रखना होगा। पहले हमें खुद सुधरना होगा। जदयू के पूर्वी सिंहभूम के जिलाध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव ने कहा कि सट्टेबाजी के धंधे में ही 50 साल पहले सोढ़ी सिंह की हत्या हुई थी। यह धंधा जानलेवा है। इस लड़ाई को लड़ने के लिए पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाना होगा।
जाने-माने अधिवक्ता अनिल तिवारी ने कहा कि सट्टा और ड्रग्स के कारोबार को खत्म करने के लिए हमें पहले खुद संकल्पित होना होगा। अदालतें अनेक फैसले सुनाती हैं। वह महत्वपूर्ण है। उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि अदालती आदेश को अमली जामा कौन पहनाए। यहां अमली जामा पहनाने वालों की घोर कमी है। उन्होंने चेहरा देख कर काम करने की प्रवृति को खराब बताया।
स्वागत भाषण जदयू (युवा मोर्चा) के पूर्वी सिंहभूम के अध्यक्ष नीरज सिंह ने दिया। उन्होंने कहा कि ड्रग्स एक आदमी भर को नहीं बल्कि उसके पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सट्टेबाजी ने पूरे समाज को तनाव दिया है। कार्यक्रम का मंच संचालन विवेक पांडेय जबकि धन्यवाद ज्ञापन जदयू महानगर अध्यक्ष अजय कुमार ने किया।
