मानसून सत्र के चौथे दिन विपक्ष के साथ-साथ सत्तापक्ष के विधायकों और मंत्रियों ने भी काटे बवाल, विधानसभा एक दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, इधर CM हेमन्त सोरेन ने कहा छात्र जिस मकड़जाल में उलझे हैं, वो भाजपा का किया कराया, हम तो …
झारखण्ड विधानसभा का मानसून सत्र आखिरकार हंगामे की भेंट चढ़ ही गया। एक दिन पहले ही स्पीकर रवीन्द्र नाथ महतो ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। इसके पहले आज सदन जैसे ही साढ़े छह मिनट विलम्ब से प्रारंभ हुआ। विपक्ष ने छात्रों के चल रहे आंदोलन का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया, जिसका विरोध सत्तापक्ष के लोगों ने भी किया।
हद तो तब हो गई कि सारा विपक्ष जब वेल में आया तो सत्तापक्ष के विधायक तो विधायक, बहुत सारे मंत्री भी वेल में आ गये। आज की इस घटना को देखकर एक प्रकार से अनुमान हो गया था कि सदन अब नहीं चलेगा, क्योंकि जब सत्तापक्ष के लोग भी हंगामे करने में जुट जाये, तो यह अंदाजा लगाने में किसी को भी देर नहीं लगाना चाहिए कि सदन अब चलेगा।
जैसे ही सत्तापक्ष और विपक्ष का हंगामा जब स्पीकर ने देखा, तो उन्होंने सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद जैसे ही 12 बजकर तीन मिनट पर स्पीकर सदन में उपस्थित हुए। इस बार सत्तापक्ष ने हंगामे की शुरुआत कर दी, जिसके बाद विपक्ष भी हंगामा करने के साथ-साथ वेल में आ गया। जिसके बाद सदन दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। जब दो बजकर छह मिनट पर जैसे ही सदन प्रांरभ हुआ। हंगामा फिर शुरु हो गया।
सीपी सिंह ने सदन में दिखाई नोटों की गड्डियां

भाजपा के सीपी सिंह आज गुस्से में थे। उन्होंने सदन में कहा कि राहुल गांधी उर्फ पप्पू ने झारखण्ड सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। फिर क्या था, हंगामा और तेज हो गया। सीपी सिंह आज गुस्से में ज्यादा दिखे। उन्होंने सरकार पर जमकर निशाना साधा। सदन में नोटों की गड्डियां तक दिखा दी। वे इसके माध्यम से राज्य में सरकारी नौकरियों और चल रही परीक्षाओं में कैसे नोटों का आदान-प्रदान हो रहा है, कैसे लेन-देन हो रहे हैं, ये सवाल वे इसके माध्यम से उठाना चाह रहे थे, जो सत्तापक्ष के विधायकों/मंत्रियों यहां तक की स्पीकर को भी अच्छा नहीं लगा। स्थिति ऐसी हो गई कि सदन में तल्खी और बढ़ गई। विधानसभा हंगामें में डूब गया।
इसी बीच सदन के नेता मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन अपनी बात रखने को खड़े हुए, भाषण की शुरुआत में उनका मूड प्रसन्नता से भरा था, लेकिन जैसे-जैसे उनका भाषण आगे की ओर बढ़ता गया उनका भाजपा के प्रति आक्रोश बढ़ता चला गया। लेकिन अंत में हूब नाथ पांडेय की कविता -गिरो के माध्यम से उन्होंने भाजपा पर जोरदार हमला कर डाला।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अपने भाषण में कहा कि वे राज्य की जनता और छात्रों को आश्वस्त करने में सक्षम है, इसके लिए उन्हें विपक्ष की आवश्यकता नहीं। उन्होंने कहा कि अब विपक्ष में रस ही नहीं बचा है। ये छात्रों की आड़ में अपनी ताकत का इजहार कर रहे हैं। यानी इनके पास जो भी कुछ थोड़ा रस बचा है, वो जल्द ही खत्म होनेवाला है। हेमन्त सोरेन ने कहा कि हमारी क्या मंशा है, वो जनता को पता है, साथ ही सदन के माध्यम से भी हमने अपनी राय जनता के बीच रखी है।
14वीं जेपीएससी परीक्षा को रद्द करने की घोषणा सीएम हेमन्त सोरेन ने सदन में कर दी
उन्होंने सदन में कहा कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा को वे रद्द करने जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने दो बैकलॉग जेपीएससी परीक्षाओं को भी रद्द करने की बात कह दी। उन्होंने कहा कि जो भी छात्र आज भुगत रहे हैं, वो मकड़जाल इन्हीं भाजपाइयों का दिया हुआ है। ये टीडीपीएल एंजेंसी उत्तरप्रदेश की है, लखनऊ की है। जिसने यूपी-बिहार के लोगों के लिए काम किया। यहां के युवाओं को दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया। सरकार ने निर्णय लिया है कि वो रिफॉर्म करेगी। सरकार की मंशा स्पष्ट है, निरन्तर हम इसमें आगे बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि चूंकि हम अंजाम तक इसे नहीं पहुंचा सके, जिसका लाभ इन भाजपाइयों ने उठाने की कोशिश की। फिर भी हमें इसकी कोई चिन्ता नहीं, हम अपना राह चलते रहेंगे। क्योंकि भैंस के आगे बीन बजाने से कोई फायदा नहीं। हम अपना काम करेंगे। उन्होंने कहा कि कल जिस तरह से छात्रों का आंदोलन हुआ और प्रशासन ने जिस प्रकार से इसे संभाला, वह अभूतपूर्व है। जहां बारहों महीने 144 लगा रहता है, जैसे लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा या विधान परिषद् वाली सीमित दायरों पर तो कोई आ ही नहीं सकता। यहां भी हमारे विपक्ष के गेरुआ पहनकर ढोंग रचनेवाले लोग, छात्रों का चोला पहनकर उन्हें गुमराह कर रहे हैं।
भाजपा व्यापारियों की जमात, इनके जेबों की जांच के साथ, इनके घरों पर भी छापेमारी हो- सीएम
हेमन्त सोरेन ने कहा कि ये सदन की गरिमा को तार-तार कर रहे हैं। ये लोकतंत्र बचाने की बात करनेवाले लोग, जिन्होंने आजादी के 75 वर्षों तक कभी तिरंगा नहीं ढोया, आज तिरंगा ढोने की बात कर रहे हैं। ये व्यापारियों के जमात से आनेवाले लोगों के जेब में नोटों के बंडल भरे पड़े हैं। ये इन्हीं नोटों के बंडल से लोकतंत्र को खरीदना चाहते हैं। सभी के जेबों की जांच होनी चाहिए। इनके घरों पर भी छापेमारी होनी चाहिए। ये वहीं लोग हैं, जिन्होंने मंदिरों तक को नहीं छोड़ा। हम विश्वास दिलाते है कि हमने रिफॉर्म की बात की है और इसके लिए बड़े-बड़े संस्थानों से हमने बातचीत शुरु कर दी है। जल्द ही यह दिखेगा। टीडीपीएल ने जो भी परीक्षा ली है, उसकी जांच कराने की तैयारी की जा रही है।
अंत में, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने हूब नाथ पांडेय की गिरो नामक कविता से अपने भाषण का समापन किया, साथ ही यह भी कह दिया कि यह कविता भाजपाइयों पर फिट बैठती है… कविता थी…
अभी और गिरने की संभावनाएं भरपूर हैं
इतना गिरो कि गुरुत्वाकर्षण बल भी शर्म के मारे गिर पड़े।
अभी तो गिरने की शुरुआत है
गिरने के अपने सामर्थ्य पर
भरोसा गिरने मत दो
सारा विश्व तुम्हारा गिरना देख रहा है
और ख़ुद न गिर पाने पर अफ़सोस कर रहा है
गिरो !
पर अकेले मत गिरो
रुपए के साथ गिरो, चरित्र के साथ गिरो
गर्व के साथ गिरो कि एक तुम्हीं हो
जिसमें गिरने का इतना साहस है।
साहस के साथ गिरो, बेशर्मी के साथ गिरो
बेदर्दी के साथ गिरो, कि दुनिया तुमसे गिरना सीख रही है
किसी एक ही मामले में सही
तुम्हें विश्वगुरु होने से कोई रोक नहीं सकता
आनेवाली पीढ़ियां, तुम्हारे गिरने में
अपने गिरने की संभावनाएं तलाशेंगी
वे तुमसे भी ज़्यादा गिरने का पराक्रम करेंगी
उनके पराक्रम पर, यकीन करते हुए
ज़रा और ज़ोर से गिरो, थोड़े शोर से गिरो
चारों ओर से गिरो, निपट भोर से गिरो
और गिरते रहो।
