हनुमान अंश अर्थात् मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डारे दई…
अगर आप आध्यात्मिक है। अगर आप ईश्वर में आस्था रखते हैं। आपको लगता है कि आपके जीवन की नैया के खेवनहार ईश्वर है। आपको लगता है कि भारत संतों की भूमि है। संतों ने इस देश को अपने तपोबल से सिंचिंत किया है। तो बहुत वर्षों के बाद भारत के विभिन्न छविगृहों/मल्टीप्लेक्सों में आपके लिए एक फिल्म आई है। फिल्म का नाम है – हनुमान अंश।
यह फिल्म आपके हृदय को ईश्वरीय बोध से सिंचित कर देगी। फिर आप जब छविगृहों या मल्टीप्लेक्स से निकलेंगे, तो आप घंटों आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत रहेंगे। यह फिल्म अकेले देखने की नहीं हैं। यह फिल्म या तो अपने मित्रों या अपने पूरे परिवार के साथ देखिये। तब इस फिल्म की महत्ता और आध्यात्मिक पुटों का आनन्द ले पायेंगे।
इस फिल्म में कमाल ही कमाल है। यह फिल्म भगवान राम के अनन्य भक्त और हनुमान जी के अंश कहे जानेवाले नीम करोली बाबा पर बनाई गई है। नीम करोली बाबा जिनका वास्तविक नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था, कुछ लोग उन्हें लक्ष्मण दास के नाम से भी जानते हैं। लेकिन वे प्रसिद्ध नीम करोली बाबा के नाम से हैं। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर में जन्मे नीम करोली बाबा, बचपन से ही आध्यात्म की ओर प्रवृत्त थे। आध्यात्मिक शक्तियों के कारण ही उन्होंने अपने जीवन काल में ऐसी-ऐसी चमत्कारी घटनाएं की। जिसकी कहानियां उनके चाहनेवाले आज भी एक-दूसरे कहा करते हैं।
उन्हीं कुछ चमत्कारी घटनाओं को लेकर यह फिल्म बनाई गई है। जो आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है। जो भी व्यक्ति इस फिल्म को एक बार देख रहा है। उसे मन कर रहा है कि वो इसे दुबारा देखे। क्योंकि फिल्म है ही ऐसी। आश्चर्य यह भी है कि इस फिल्म में कोई ऐसा कलाकार नहीं, जिसे लोग पूर्व में जानते हो। लेकिन सभी कलाकारों ने इस प्रकार का अभिनय किया है, कि आपकी आंखों से अश्रुधारा बह निकलेगी।
धर्म व अध्यात्म की गंगा को बहा रही ये फिल्म आजकल पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल साइट पर तो ये छा गई है। आश्चर्य है कि बड़े-बड़े बजट की फिल्मों के बीच मात्र दो करोड़ में बनी यह फिल्म जब प्रदर्शित हुई तो शुरूआती दो सप्ताहों में दम तोड़ने लगी। लेकिन अचानक तीसरे सप्ताह से इस फिल्म ने ऐसी गति पकड़ी है कि रांची के कई मल्टीप्लेक्स में हाउसफुल की बोर्ड तक लग रही है। लोगों को टिकट खरीदने में मशक्कत करनी पड़ रही है।
लोग अपने पूरे परिवार के साथ इस फिल्म को देखने पहुंच रहे हैं। इसे देखने के लिए हर वर्ग के लोग पहुंच रहे हैं। यहीं नहीं जो नीम करोली बाबा को जानते भी नहीं, वे भी इसे देखकर आनन्द की सागर में डूब रहे हैं और फिल्म देखने के बाद और अन्य लोगों से भी इसे देखने को कह रहे हैं। मतलब इस फिल्म का प्रचार-प्रसार का जिम्मा आम जनता ने ही उठा लिया है। लोग इसे नीम करोरी बाबा का चमत्कार बता रहे हैं।
