ज्यादातर प्रमुख अखबारों से ‘नीतीश कुमार’ प्रथम पृष्ठ से गायब

एक समय था, जब नीतीश कुमार रांची आते तो एक अखबार जो स्वयं को अखबार नहीं आंदोलन कहता है, उसमें नीतीश कुमार की खबरें प्राथमिकता के आधार पर प्रथम पृष्ठ पर हुआ करती, पर आज आश्चर्य है कि उक्त अखबार में आज नीतीश कुमार अंदर के पेजों पर विद्यमान हैं।

एक समय था, जब नीतीश कुमार रांची आते तो एक अखबार जो स्वयं को अखबार नहीं आंदोलन कहता है, उसमें नीतीश कुमार की खबरें प्राथमिकता के आधार पर प्रथम पृष्ठ पर हुआ करती, पर आज आश्चर्य है कि उक्त अखबार में आज नीतीश कुमार अंदर के पेजों पर विद्यमान हैं, वह भी पेज नंबर छः पर, ऐसे अगर आप पेज गिनियेगा तो आपको ये आठ नंबर पर दीखेंगे।

यही नहीं, यही अखबार कभी अपने सारे अखबार में काम करनेवाले लोगों (बड़े से बड़े संवाददाताओं) को नीतीश कुमार की सेवा में लगा दिया करता था, साथ ही अखबार के कई पेज भी नीतीश को सुपूर्द कर दिये जाते थे, पर आज आश्चर्य हैं कि उक्त अखबार में ये सब दिखाई नहीं पड़ रहा। आखिर क्यों? वजह साफ हैं, जिन कारणों से यह सब होता था, अब वह कारण सीधे नीतीश कुमार से जुड़ गया हैं, और उस कारण का अब उक्त अखबार से लेना देना शायद नहीं रहा।

आश्चर्य यह भी रहा कि रांची से निकलनेवाले कई अखबारों ने भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यक्रम को उतनी प्राथमिकता नहीं दी। रांची से प्रकाशित प्रभात खबर, दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण ने नीतीश कुमार की खबर को अंदर के पृष्ठों पर दिया। हिन्दुस्तान ने प्रथम पृष्ठ पर दो कॉलम की खबरें दी है, पर उसने भी जिस प्रकार से पत्थलगड़ी को स्थान दिया, वह नीतीश कुमार को नहीं दिया, ऐसे में क्या समझा जाये कि नीतीश कुमार की लोकप्रियता में गिरावट या झारखण्ड में नीतीश कुमार और उनकी पार्टी के जनाधार का नहीं होना।

सच्चाई यह है कि झारखण्ड में जनता दल यूनाईटेड मृतप्रायः हैं, पूर्व में रांची से प्रकाशित एक अखबार, अपनी कुछ खास वजहों से यहां नीतीश कुमार को वह जगहें दे देता था, जिसका आवश्यकता नहीं थी, अब चूंकि सब कुछ क्लियर हैं तो सच्चाई सामने है, नीतीश कुमार को उनकी योग्यता के अनुसार अखबारवालों ने जगह दे दी, जिससे पता चल जाता है कि नीतीश कुमार झारखण्ड के लिए कितना प्रासंगिक हैं, नीतीश से ज्यादा तो यहां लालू प्रसाद की धमक हैं, लोग उनसे जुड़ी समाचारों को जानना व समझना चाहते हैं, ऐसा इसलिए नहीं कि वे चारा घोटाले में बंद है, ऐसा इसलिए कि लालू प्रसाद की लोकप्रियता को कोई चुनौती दे ही नहीं सकता।

Krishna Bihari Mishra

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मैंने आप पर कृपा लूटाई, अब आप हम पर कृपा बनाये रखियेगा, और क्या कहूं?

Tue Feb 27 , 2018
दिल्ली व झारखण्ड में क्या अंतर हैं? दिल्ली और झारखण्ड में सिर्फ इतना ही अंतर है कि दिल्ली का सीएस अपने अपमान का बदला लेने के लिए अरविन्द केजरीवाल सरकार से टकरा रहा है, संघर्ष कर रहा है, जबकि झारखण्ड के सीएस के सम्मान की रक्षा के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास विपक्ष ही नहीं बल्कि अपने लोगों भी से टकरा जा रहा है, और उसे हर प्रकार से क्लीन चिट दिलवाकर सदा के लिए विभिन्न आरोपों से मुक्त कर देने का दुस्साहस भी करता है।

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